रोहतक से उठी बहस : क्या जन प्रतिनिधि कानून से ऊपर है?
-डॉ. सत्यवान सौरभ नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने और सत्ता प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आचरण, मर्यादा और संस्थाओं के प्रति सम्मान की एक सतत प्रक्रिया भी है। किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था की वास्तविक शक्ति उसके संविधान, कानूनों और संस्थाओं में निहित होती है। जब जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी अपने-अपने…

