देश-समाज को जगाने वालों पर सवाल क्यों?- डॉ सत्यवान सौरभ

नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो) किसी भी जीवंत समाज की पहचान यह नहीं होती कि वह कितनी परंपराओं का पालन करता है, बल्कि यह होती है कि वह परंपराओं को कितनी विवेकपूर्ण दृष्टि से देखता है। इतिहास गवाह है कि जिन समाजों ने प्रश्न पूछने वालों को सम्मान दिया, वही आगे बढ़े; और जिन्होंने उन्हें दबाने…

हांसी : इतिहास के केंद्र से हाशिये तक और फिर जिले की दहलीज़ पर

(हांसी : इतिहास ने छीना, वक्त ने लौटाया जिला)  हांसी कभी हरियाणा क्षेत्र की राजधानी रही है। जॉर्ज थॉमस के शासनकाल में यह प्रशासनिक और व्यापारिक केंद्र था। मुगल काल में यहां टकसाल और सैनिक छावनी स्थापित की गई। 1857 के विद्रोह में अंग्रेजों के खिलाफ तीव्र प्रतिरोध के कारण हांसी से जिला दर्जा छीना…

कन्नौज : विजय दिवस 1971 युद्व मे शहीद हुए सैनिको की वीर नारियो का सम्मान

बृजेश चतुर्वेदी कन्नौज।(आवाज न्यूज ब्यूरो)  आज जिला सैनिक कल्याण एवं पुर्नवास कार्यालय प्रांगण मे 1971 के युद्व मे पाकिस्तान पर मिली जीत की 54वीं वर्षगाॅठ के अवसर पर विजय दिवस समारोह का आयोजन किया गया। सबसे पहले कर्नल रोहित भटारा द्वारा झण्डा रोहण किया गया। तत्पश्चात राष्ट्रगान उसके बाद युद्व मे शहीद हुए सैनिको के…

नार्को टेस्ट और संविधान : अधिकार, नैतिकता और न्याय

जब जांच ही अधिकारों का उल्लंघन बन जाए– डॉ सत्यवान सौरभ ‘‘नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)  सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनैच्छिक नार्को‑विश्लेषण परीक्षणों को पुनः असंवैधानिक करार देना भारतीय लोकतंत्र में संविधान की सर्वोच्चता की एक महत्वपूर्ण पुनःघोषणा है। यह निर्णय केवल आपराधिक जांच की किसी एक तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की दंडात्मक शक्ति,…

जेल की दीवारों के भीतर दिव्यांगता : गरिमा, अधिकार और राज्य की जिम्मेदारी

– डॉ सत्यवान सौरभ –  नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। किसी भी लोकतांत्रिक समाज में कारागार व्यवस्था केवल अपराध और दंड का प्रतीक नहीं होती, बल्कि वह राज्य की संवेदनशीलता, मानवीय दृष्टि और संवैधानिक प्रतिबद्धता की भी कसौटी होती है। भारतीय संविधान व्यक्ति की गरिमा को सर्वोच्च मूल्य के रूप में स्वीकार करता है और यह…

डिजिटल व्यापार समझौते और भारत की स्वदेशी डिजिटल क्षमताएँ – डॉ. सत्यवान सौरभ

राष्ट्रीय हितों व डिजिटल संप्रभुता की दीर्घकालिक रक्षा का विश्लेषण नई दिल्ली। (आवाज न्यूज ब्यूरो)। डिजिटल युग में वैश्विक शक्ति-संतुलन तेल से डेटा की ओर, भू-राजनीति से तकनीक-राजनीति की ओर और पारंपरिक व्यापार से डिजिटल व्यापार की ओर निर्णायक रूप से स्थानांतरित हो चुका है। ऐसे समय में भारत एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है…

सेना की वर्दी में आस्था की संवैधानिक परिधि- डॉ सत्यवान सौरभ

 नई दिल्ली। (आवाज न्यूज ब्यूरो)। भारतीय संविधान नागरिकों को धर्म का पालन, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है, परंतु यह स्वतंत्रता पूर्णतः निरपेक्ष नहीं है। विशेषकर उन सेवाओं में, जहाँ सामूहिक अनुशासन, पदानुक्रम, आज्ञापालन और इकाई-एकजुटता ही अस्तित्व की शर्तें हैं, वहाँ व्यक्तिगत स्वतंत्रता का दायरा स्वाभाविक रूप से सीमित हो जाता है।…

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कल लखनऊ आएंगी : राष्ट्रीय जंबूरी में स्काउट गाइड के बीच 90 मिनट रहेंगी

लखनऊ।(आवाज न्यूज ब्यूरो)।  भारत स्काउट एंड गाइड की संरक्षक व राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शुक्रवार को लखनऊ में होंगी। वृंदावन स्थित डिफेंस एक्सपो ग्राउंड में आयोजित 19वीं राष्ट्रीय जंबूरी के समापन पर बतौर मुख्य अतिथि राष्ट्रपति करीब 90 मिनट तक स्काउट्स गाइड्स के बीच रहेंगी। इस दौरान अलग-अलग प्रांत, राज्य व विदेश के 15 हजार प्रतिभागी…

संविधान : भारतीय लोकतंत्र की अटूट नींव और भविष्य की रोशनी

तेजी से बदलते समय में संविधान हमें स्थिरता, दिशा और लोकतांत्रिक चेतना प्रदान करता है।  संविधान दिवस केवल एक औपचारिक तिथि नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है। यह हमें यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि क्या हम वास्तव में संविधान की भावना के अनुरूप समाज का निर्माण कर रहे हैं। संविधान हमें अधिकार…

आतंक पर निर्णायक सख़्ती ज़रूरी

सुरक्षा, कानून और नागरिक चेतना—तीनों मोर्चों पर एक साथ बड़े बदलाव की आवश्यकता भारत को आतंकवाद से निर्णायक रूप से निपटने के लिए तकनीक, क़ानून और नागरिक सहभागिता—तीनों स्तरों पर तेज़ बदलाव की आवश्यकता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित राष्ट्रीय निगरानी तंत्र और आधुनिक डिजिटल जाँच प्रयोगशालाएँ सुरक्षा की मजबूत आधारशिला बन सकती हैं। त्वरित न्यायालय…