पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण : भारत की बौद्धिक अस्मिता का संकल्प

“डिजिटलीकरण से सुरक्षित होगी धरोहर, रुकेगी बौद्धिक चोरी, और खुलेगा राष्ट्रीय पुनर्जागरण का मार्ग” भारत की प्राचीन पांडुलिपियाँ केवल कागज़ पर लिखे शब्द नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता की आत्मा हैं। इनमें विज्ञान, चिकित्सा, दर्शन और कला का अनमोल खजाना है। उपेक्षा और उपनिवेशकाल की लूट ने इन्हें खतरे में डाल दिया। प्रधानमंत्री मोदी का आह्वान…

“एक दिवस में क्यों बंधे, हिन्दी का अभियान। रचे बसे हर पल रहे, हिन्दी हिन्दुस्तान।। ”

हिंदी दिवस केवल एक औपचारिक उत्सव न रह जाए, बल्कि यह हमारी चेतना और जीवन का स्थायी हिस्सा बने। भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और आत्मगौरव की पहचान है। यदि हम अपने घर, शिक्षा, तकनीक और कार्यस्थल पर हिंदी को सहजता से अपनाएँ, तभी इसका वास्तविक विस्तार संभव होगा। अंग्रेज़ी सीखना…

भारत की चिप क्रांति : सपनों से साकार होती हकीकत

उम्मीदों की चिप ने दिए आत्मगौरव और नवाचार को पंख भारत आज उस ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है जहाँ तकनीकी आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक प्रगति का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गर्व और वैश्विक नेतृत्व की दिशा भी बन गई है। दशकों तक चिप और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में केवल उपभोक्ता के रूप में पहचाने जाने वाला भारत…

खतरनाक मौसम में भी स्कूल खुले क्यों?

“बच्चों की सुरक्षा बनाम औपचारिकता का सवाल: जर्जर स्कूल भवन, प्रशासन की संवेदनहीनता और बाढ़-गंदगी के बीच पढ़ाई नहीं, जीवन की रक्षा पहली प्राथमिकता – आपदा में भी आदेशों की राजनीति क्यों?” बारिश और बाढ़ की स्थिति में बच्चों और शिक्षकों को स्कूल बुलाना उनकी जान से खिलवाड़ है। जर्जर इमारतें, गंदगी, जलभराव और यातायात…

सैनिक ही असली ध्वजवाहक

गाँव-नगरों में ध्वज केवल पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिवारों के हाथों में लहराए (79वें स्वतंत्रता दिवस पर विशेष संपादकीय) तिरंगा केवल राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आत्मा और बलिदानों की गाथा है। इसकी असली गरिमा तभी बनी रहेगी जब इसे वही हाथ फहराएँ जो इसके लिए प्राणों की आहुति देने को तत्पर…

पीएम मोदी का लाल किले से पाकिस्तान को सख्त संदेश : ’ना सिंधु का पानी मिलेगा, ना आसिम मुनीर की धमकी चलेगी’

नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए पड़ोसी देश पाकिस्तान को कड़ा और सीधा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत अब न तो सिंधु जल समझौते के मौजूदा स्वरूप को स्वीकार करेगा और न ही पाकिस्तानी सेना…

मेरे कान्हा — जन्माष्टमी विशेष

उपशीर्षक: मोरपंख, मुकुट और बांसुरी से आगे — बच्चों के मन में कान्हा के संस्कार बोने का अवसर कान्हा बनाना केवल मोरपंख और मुकुट पहनाना नहीं, बल्कि बच्चों में प्रेम, साहस, करुणा और रचनात्मकता के बीज बोना है। आधुनिक कान्हा वह है जो तकनीक का सही उपयोग करे, अन्याय के विरुद्ध खड़ा हो, और अपने…

भारत@79: अटूट शक्ति की ओर

 *”79 वर्षों की यात्रा से विश्व-नेतृत्व की दहलीज़ तक — भारत का समय अब है।”*  79 वर्षों पहले मिली स्वतंत्रता केवल एक तारीख या घटना नहीं, बल्कि करोड़ों सपनों की जीत थी। आज भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र और पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। पर अब सवाल है — क्या हम विश्व की सबसे…

स्वतंत्रता का अधूरा आलाप

“आज़ादी केवल तिथि नहीं, एक निरंतर संघर्ष है। यह सिर्फ़ झंडा फहराने का अधिकार नहीं,बल्कि हर नागरिक को समान अवसर और सम्मान देने की जिम्मेदारी है। जब तक यह जिम्मेदारी पूरी नहीं होती, हमारी स्वतंत्रता अधूरी है।” — डॉ. प्रियंका सौरभ नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। 15 अगस्त 1947 को हमने विदेशी शासन की बेड़ियों को तोड़…

अलविदा रजिस्टर्ड डाक — एक युग की ख़ामोश विदाई

लेखिका: डॉ. प्रियंका सौरभ नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। एक सितंबर दो हज़ार पच्चीस को जब भारत डाक की रजिस्टर्ड डाक सेवा औपचारिक रूप से समाप्त कर दी जाएगी, तो संभवतः किसी समाचार पत्र के मुख्य पृष्ठ पर यह नहीं छपेगा, न ही किसी समाचार चैनल पर विशेष चर्चा होगी। यह समाचार जितना सामान्य प्रतीत होता…