नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। कांग्रेस नेता और पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने भारत में बढ़ते वायु प्रदूषण को एक गंभीर जन स्वास्थ्य आपदा बताया है, जो न केवल फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि दिमाग और शरीर पर भी गहरा असर डाल रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम में बड़े बदलाव और 2009 के वायु गुणवत्ता मानकों को तुरंत अपडेट करने की मांग की है।
कांग्रेस नेता और पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा है कि भारत में वायु प्रदूषण अब सिर्फ सांस की बीमारी का कारण नहीं, बल्कि यह हमारे दिमाग और शरीर के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम में बड़े बदलाव और वायु गुणवत्ता मानकों को जल्द से जल्द अपडेट किया जाना चाहिए।
उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि वायु प्रदूषण एक जन स्वास्थ्य आपदा है, जो समाज, स्वास्थ्य सेवाओं और भविष्य की कार्यशक्ति के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा है। कांग्रेस नेता ने बताया कि 2023 में भारत में लगभग 20 लाख मौतें वायु प्रदूषण से जुड़ी हुई हैं, जिनमें 2000 से 43 फीसदी की बढ़त हुई है। उन्होंने कहा कि इनमें से लगभग 10 में से 9 मौतें गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) जैसे हृदय रोग, फेफड़ों के कैंसर, मधुमेह और अब मनोभ्रंश के कारण होती हैं। उन्होंने कहा कि भारत में प्रति 100,000 लोगों पर लगभग 186 वायु प्रदूषण से मौतें दर्ज की जाती हैं। ये उच्च आय वाले देशों (17/100,000) की दर से 10 गुना ज्यादा हैं।
किस बीमारी से कितनी मौतें?
जयराम रमेश ने कहा कि भारत में सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) से होने वाली मौतों का लगभग 70 फीसदी, फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मौतों का लगभग 33 फीसदी, हृदय रोग से होने वाली मौतों का लगभग 25 फीसदी और मधुमेह से होने वाली मौतों का लगभग 20 फीसदी वायु प्रदूषण के कारण होता है।
उन्होंने कहा कि माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर (पीएम 2.5) में मापे गए सूक्ष्म कण पदार्थ के संपर्क को अब मस्तिष्क क्षति और त्वरित संज्ञानात्मक गिरावट से भी जोड़ा गया है। 2023 में वैश्विक स्तर पर लगभग 626,000 मनोभ्रंश से होने वाली मौतें वायु प्रदूषण से जुड़ी हुई हैं।
वायु प्रदूषण सुरक्षित मानकों से बहुत ज्यादा
जयराम रमेश ने कहा कि भारत में वायु प्रदूषण बहुत बड़ा खतरा बन गया है। यह लोगों की सेहत, समाज, अस्पताल और भविष्य में काम करने वाले लोगों के लिए नुकसानदायक है। यह देश की सुरक्षा के लिए भी खतरा है। पीएम 2.5 (हवा में मौजूद छोटे-छोटे खतरनाक कण) का स्तर भारत में डब्लूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन) के सुरक्षित मानकों से बहुत ज्यादा है। साल भर के लिए ये 8 गुना ज्यादा है।
उन्होंने कहा कि 2017 में शुरू हुआ राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम काम नहीं कर पाया और पीएम 2.5 का स्तर बढ़ता जा रहा है। भारत में अब हर शख्स ऐसी हवा में सांस ले रहा है जो डब्लूएचओ के मानकों से ज्यादा खराब है। उन्होंने कहा कि एनसीएपी में बड़े बदलाव हों और 2009 में बने वायु गुणवत्ता मानकों को तुरंत अपडेट किया जाए। उन्होंने स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2025 रिपोर्ट शेयर की, जो बताती है कि 2023 में वायु प्रदूषण से दुनिया भर में और खासकर भारत में सेहत को कितना नुकसान हुआ।

