मोदी सरकार ने टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार क्यों नहीं किया : कांग्रेस

‘‘मोदी ने अमेरिका के सामने एकतरफा आत्मसमर्पण कर दिया: खरगे’’
नई दिल्ली। (आवाज न्यूज ब्यूरो)। अमेरिकी सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ को खारिज करने के फैसले की गूंज भारत में सुनाई दे रही है। कोर्ट के निणर्य के बाद भारत में सियासी बवाल मच गया है। पूरे विपक्ष ने मोदी सरकार को इस मामले में घेर लिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को सवाल उठाया कि क्या नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की विदेश नीति अस्पष्ट है या उसने अमेरिका के सामने एकतरफा आत्मसमर्पण कर दिया है। यह सवाल अमेरिकी सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ को खारिज करने के बाद उठाया गया।
एक्स पर एक पोस्ट में, खरगे ने पूछा कि केंद्र ने अंतरिम व्यापार समझौते में जल्दबाजी करने से पहले अमेरिकी अदालत के फैसले का इंतजार क्यों नहीं किया। खरगे ने समझौते के संयुक्त वक्तव्य की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें कई अमेरिकी निर्यातों पर शून्य टैरिफ शामिल हैं, जिससे भारत की कृषि को अमेरिकी वस्तुओं के लिए प्रभावी रूप से खोल दिया गया है, 500 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के अमेरिकी उत्पादों के आयात की योजना है, रूसी तेल की खरीद पर रोक है जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को नुकसान पहुंच सकता है, और कई डिजिटल कर रियायतें शामिल हैं। खरगे के एक्स पोस्ट में लिखा था कि अस्पष्ट विदेश नीति या एकतरफा आत्मसमर्पण? मोदी सरकार ने टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार क्यों नहीं किया, इससे पहले कि वह जल्दबाजी में एक ऐसे धोखेबाज़ समझौते में फंस गई, जिससे भारत से भारी रियायतें हासिल की गईं? संयुक्त बयान में भारत को निर्यात होने वाले कई अमेरिकी उत्पादों पर शून्य टैरिफ की बात कही गई थी, जिससे भारत की कृषि को अमेरिकी वस्तुओं के लिए लगभग खोल दिया गया था, 500 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के अमेरिकी सामान आयात करने की योजना थी, हमारी ऊर्जा सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाले रूसी तेल की खरीद पर रोक लगाने की प्रतिबद्धता थी और डिजिटल क्षेत्र में कई कर रियायतें थीं। उन्होंने आगे मांग की कि मोदी स्पष्ट करें कि किसने सरकार पर भारत के राष्ट्रीय हित और रणनीतिक स्वायत्तता से समझौता करने के लिए दबाव डाला।
पीएम बताएं समझौते के पीछे क्या मजबूरी थी: जयराम
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए यह सवाल भी किया कि ऐसी क्या मजबूरी थी कि प्रधानमंत्री मोदी ने सुनिश्चित किया कि दो फरवरी 2026 की रात राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा करें? रमेश ने पोस्ट किया, कल अमेरिका के उच्चतम न्यायालय द्वारा उनकी शुल्क नीति को खारिज किए जाने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि प्रधानमंत्री उनके बहुत अच्छे मित्र हैं, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता घोषणा के अनुसार जारी रहेगा और उन्होंने 10 मई 2025 को भारतीय निर्यात पर शुल्क बढ़ाने की धमकी देकर व्यक्तिगत रूप से ऑपरेशन सिंदूर रुकवाया था। उन्होंने कहा, दो फरवरी 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप ने सबसे पहले घोषणा की थी कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम रूप ले चुकी है। रमेश ने सवाल किया कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि मोदी ने सुनिश्चित किया कि दो फरवरी 2026 की रात राष्ट्रपति ट्रंप ही भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा करें? कांग्रेस नेता ने कहा, उस दोपहर लोकसभा में ऐसा क्या हुआ था, जिसने प्रधानमंत्री मोदी को इतना व्याकुल कर दिया कि उन्होंने ‘व्हाइट हाउस’ (अमेरिकी रार्ष्ट्रपति का आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) में अपने ‘अच्छे मित्र’ से संपर्क कर ध्यान भटकाने वाली स्थिति पैदा की?’’