ईरान की जवाबी कार्रवाई : उड़ा दिया अमेरिकी युद्धपोत

नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। शांति के नाम पर चल रही बातचीत अब बारूद की गंध में बदल चुकी है। सीजफायर के झूले पर बैठे ईरान, अमेरिका-इजरायल अब एक दूसरे को परख नहीं बल्कि परास्त करने की मुद्रा में दिखाई दे रहे हैं। आसमान में ड्रोन की गूंज के बाद अब जंग का दायरा समंदर तक फैल चुका है। क्या यह फेज-2 है उस टकराव का जो सिर्फ क्षेत्रीय नहीं वैश्विक संतुलन को हिला सकता है? कूटनीति जब ठहरती है तो बंदूकें बोलने लगती हैं और इस बार उनकी गूंज पानी के भीतर सुनाई दे रही है। हालिया घटना ने यह साफ कर दिया है कि ईरान और अमेरिका के बीच टकराव अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। अमेरिका द्वारा एक ईरानी कार्गो जहाज़ को अपने नियंत्रण में लेना सिर्फ एक सामरिक कदम नहीं बल्कि एक संदेश था समुद्री रास्तों पर उसका वर्चस्व अभी भी कायम है। लेकिन जवाब भी उतना ही तेज आया। ईरान ने ड्रोन के जरिए अमेरिकी जंगी जहाज़ को निशाना बनाते हुए यह संकेत दिया कि अब जंग सिर्फ आसमान तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि अब जंग का नया मैदान नीले पानी वाला समंद्र होगा। ईरान ने साफ कर दिया है कि यह पलटवार था जवाब था उस गोलीबारी का जो उसके वाणिज्यिक जहाज पर की गई।
डगमगाता सीजफायर का झूला
कूटनीति की मेज खाली हो रही है और समुद्र में लहरें ऊंची। यह सिर्फ दो देशों की जंग नहीं बल्कि उस विश्व व्यवस्था की परीक्षा है जो शांति की बात तो करती है लेकिन युद्ध की आहट पर अक्सर खामोश हो जाती है।
तेल बाजार और तनाव
इस टकराव का असर सिर्फ सैन्य नहीं है। तेल की कीमतों में हलचल समुद्री बीमा दरों में बढ़ोतरी और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता यह सब संकेत हैं कि दुनिया इस संघर्ष को गंभीरता से देख रही है। अगर स्थिति और बिगड़ती है तो इसका सीधा असर एशिया यूरोप और मध्य-पूर्व की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। और यही वजह है कि कई अंतरराष्ट्रीय शक्तियां पर्दे के पीछे से इस टकराव को शांत करने की कोशिश में लगी होंगी। सबसे बड़ा सवाल यही है क्या यह यहीं थमेगा? अगर समुद्र में टकराव बढ़ता है तो अगला चरण क्या होगा? सीधे सैन्य ठिकानों पर हमले? या फिर किसी तीसरे देश की भागीदारी? इतिहास बताता है जब बड़े देश सीधे भिड़ते हैं तो असर सीमाओं से बाहर जाता है और फिलहाल जो संकेत मिल रहे हैं वह यही कहते हैं कि यह संघर्ष अभी खत्म होने से दूर है।