नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। तमिलनाडु में 4 मई को चुनावी नतीजे सामने आने के बाद से अभिनेता से नेता बने थलपति विजय की पार्टी भले ही 108 सीटों के साथ राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी..लेकिन, फिर भी सरकार बनाने के लिए थलपति विजय का रास्ता आसान नहीं था,क्योंकि सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा है 118 सीटों का और इसी वजह से थलपति विजय की पार्टी का सरकार बनाने का जो सपना था..वो डिले होता जा रहा था लेकिन, इसी बीच बड़ी खबर निकलकर सामने आई है कि अब ये सपना पूरा होने जा रहा है क्योंकि टीवीके ने सरकार बनाने के बहुमत के आंकड़े से एक सीट स्यादा का समर्थन जुटा लिया है। जी हां, खबर देखिए लिखा है विजय की सरकार बनने का रास्ता साफ, कांग्रेस के बाद इन तीन पार्टियों के सपोर्ट से मिल गया जादुई आंकड़ा यानी अब तमिलनाडु के सुपरस्टार के रूप में लोगों का दिल जीतने वाले थलपति विजय अब बतौर मुख्यमंत्री राज्य की कमान सभालेंगे और लोगों का दिल जीतेंगे।
दरअसल, 4 मई को नतीजे सामने आने के बाद तमिलनाडु की राजनीति में कई दिनों से चल रही हलचल अब लगभग खत्म हो गई है जैसा कि आप जानते हैं कि चुनाव के नतीजों के बाद किसी भी पार्टी को साफ बहुमत नहीं मिला था..जिसके कारण सरकार बनाने को लेकर लगातार सस्पेंस बना हुआ था। सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थलपति विजय की टीवीके भी बहुमत से कुछ सीटें पीछे रह गई थी। यही वजह थी कि सरकार गठन का रास्ता बार-बार अटक रहा था और राज्य में त्रिशंकु विधानसभा जैसी स्थिति बन गई थी।
शुरुआत में विजय की पार्टी के पास 108 सीटें थीं जो उन्हें सबसे बड़ा दल तो बनाती थीं लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी 118 सीटों का जादुई आंकड़ा उनसे दूर था। इसी कमी की वजह से विजय को समर्थन जुटाने की कोशिश करनी पड़ी। चुनाव के तुरंत बाद उन्होंने सहयोगी दलों से बातचीत शुरू की लेकिन शुरुआती दौर में कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया जिससे राजनीतिक हलचल और भी तेज हो गई। इसी बीच विजय खुद सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए राज्यपाल के पास पहुंचे। उन्होंने आर एन रवि से मुलाकात कर सरकार बनाने की इच्छा जताई। लेकिन राज्यपाल ने साफ कह दिया कि बिना बहुमत के समर्थन के वो सरकार बनाने की अनुमति नहीं दे सकते। उन्होंने विजय से कहा कि पहले जरूरी संख्या में विधायकों का समर्थन दिखाइए तभी आगे की प्रक्रिया होगी। इस जवाब के बाद विजय को खाली हाथ लौटना पड़ा। पहली बार निराश होने के बाद भी विजय ने हार नहीं मानी। उन्होंने फिर से समर्थन जुटाने की कोशिश तेज कर दी। इसके बाद कांग्रेस ने उनका साथ देने का फैसला किया। कांग्रेस के 5 विधायकों के समर्थन से विजय का आंकड़ा 113 तक पहुंच गया। ये उनके लिए एक बड़ा कदम था लेकिन फिर भी बहुमत से 5 सीटें कम थीं। कांग्रेस के समर्थन के बाद विजय एक बार फिर राज्यपाल के पास पहुंचे। उन्हें उम्मीद थी कि इस बार बात बन सकती है लेकिन ऐसा नहीं हुआ। राज्यपाल अपने रुख पर कायम रहे और उन्होंने दोबारा साफ कर दिया कि 118 का आंकड़ा पूरा किए बिना सरकार बनाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। दूसरी बार भी विजय को निराश होकर लौटना पड़ा हालांकि इस दौरान उन्होंने राज्यपाल से समय मांगा ताकि बाकी समर्थन भी जुटा सकें। यहीं से असली राजनीतिक खेल शुरू हुआ। विजय ने वामपंथी दलों और अन्य क्षेत्रीय पार्टियों से बातचीत तेज कर दी। लगातार बैठकों और चर्चा के बाद आखिरकार उन्हें बड़ा समर्थन मिल गया। सीपीआई, सीपीआई एम और वीसीके ने उनकी पार्टी को समर्थन देने का फैसला कर लिया। इन तीनों पार्टियों के समर्थन से तस्वीर पूरी तरह बदल गई क्योंकि सीपीआई के 2 विधायक, सीपीआई-एम के 2 विधायक और वीसीके के 2 विधायक टीवीके के साथ आ गए। इस तरह कुल 6 सीटों का और इजाफा हुआ। अब अगर कुल आंकड़े की बात करें तो विजय के पास 108 सीटें पहले से थीं। कांग्रेस के 5 विधायक जुड़ने के बाद ये संख्या 113 हो गई थी और अब इन तीनों पार्टियों के 6 विधायक जुड़ने के बाद कुल आंकड़ा 119 तक पहुंच गया। यानी अब विजय न सिर्फ 118 के जादुई आंकड़े को पार कर चुके हैं बल्कि उनके पास एक सीट ज्यादा भी है जोकि उन्हें मजबूती देती है और सरकार बनाने का पूरा रास्ता साफ करती है। अब उनके पास चार दलों का खुला समर्थन है। जिससे ये गठबंधन स्थिर भी नजर आ रहा है वहीं राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, इस समर्थन को लेकर औपचारिक ऐलान भी किया जाने वाला है। बताया जा रहा है कि सभी सहयोगी दलों के नेता एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं। जिसमें विजय को समर्थन देने की घोषणा की जाएगी। ये प्रेस कॉन्फ्रेंस सरकार गठन की दिशा में अंतिम मुहर साबित हो सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम में एक और दिलचस्प पहलू ये रहा कि विजय को शुरुआत में सरकार बनाने से सिर्फ 10 कदम दूर माना जा रहा था। जहां जनता का बड़ा समर्थन उनके साथ था लेकिन जरूरी संख्या न होने के कारण वो सत्ता तक नहीं पहुंच पा रहे थे। यही वजह थी कि उन्हें दो बार राज्यपाल के पास जाना पड़ा और दोनों बार उन्हें बहुमत साबित करने के लिए कहा गया लेकिन, अब जब विजय ने जरूरी समर्थन जुटा लिया है तो माना जा रहा है कि वो जल्द ही एक बार फिर राज्यपाल से मुलाकात करेंगे। इस बार उनके पास 119 विधायकों का समर्थन होगा जो सरकार बनाने के लिए काफी है। ऐसे में इस बार राज्यपाल के पास उन्हें रोकने की कोई बड़ी वजह नहीं होगी। अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक होता है तो जल्द ही तमिलनाडु को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है और वो चेहरा होंगे थलपति विजय जो फिल्मी दुनिया से निकलकर अब राजनीति में भी अपनी मजबूत पहचान बना चुके हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने ये भी दिखा दिया कि राजनीति में संख्या का खेल कितना अहम होता है। सिर्फ सबसे बड़ी पार्टी होना काफी नहीं होता बल्कि बहुमत का आंकड़ा जुटाना सबसे जरूरी होता है विजय ने ये चुनौती पार कर ली है और अब वो सत्ता के दरवाजे पर खड़े हैं। कुल मिलाकर, तमिलनाडु की राजनीति में अब तस्वीर साफ हो चुकी है जहां लंबे इंतजार और राजनीतिक उठापटक के बाद आखिरकार विजय ने जादुई आंकड़ा जुटा लिया है। अब सिर्फ औपचारिकताओं का इंतजार है। जिसके बाद ये तय माना जा रहा है कि तमिलनाडु को मिलने वाला है नया मुख्यमंत्री, और वो होंगे थलपति विजय।
बडी खबर : विजय ने जुटाया जादुई आंकड़ा, तमिलनाडु में बनेगी टीवीके की सरकार

