नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो) । पहली बार वोटर बनने के लिए भरे जाने वाले फॉर्म 6 को एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए लोगों से भरवाए जाने को भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने अपराध क़रार दिया है। उन्होंने चुनाव आयोग के इस क़दम पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि आयोग मतदाताओं को ऐसी घोषणा करने के लिए मजबूर कर रहा है, जो उनके मामले में सही नहीं है। कुरैशी के मुताबिक फॉर्म 6 पहली बार मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने वाले लोगों के लिए है। लेकिन जिन लोगों के नाम पहले से मतदाता सूची में थे और एसआईआर के दौरान हटा दिए गए उनसे भी इसी फॉर्म के ज़रिए दोबारा नाम जुड़वाने को कहा जा रहा है। फॉर्म में आवेदक को यह घोषणा करनी होती है कि वह पहली बार मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन कर रहा है। इसका मतलब है कि पुराने मतदाताओं से ग़लत घोषणा कराई जा रही है कि वे पहली बार मतदाता बन रहे हैं। कुरैशी ने कहा कि जिन लोगों को यह फॉर्म भरने के लिए मजबूर किया गया, वे एक साल तक की जेल की सज़ा वाले अपराध के दायरे में आ सकते हैं। उन्होंने चुनाव आयोग के अधिकारियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा करने के लिए मजबूर करने वाले अधिकारी अपराध में मददगार हैं।
यह विवाद तब सामने आया है जब चुनाव आयोग ने 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद छूट गए पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है। इस अभियान में फॉर्म 6 का इस्तेमाल किया जाएगा।
‘फॉर्म 6 केवल नए वोटरों के लिए है’
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने शुक्रवार को फॉर्म 6 के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह फॉर्म केवल नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए है। उन्होंने चुनाव आयोग के 1 अक्टूबर के बयान का ज़िक्र करते हुए कहा कि आयोग ने इस प्रक्रिया को बढ़ावा देकर अपराध में मदद की है। कुरैशी का सवाल है कि अगर कोई व्यक्ति पहले से मतदाता था और एसआईआर के दौरान उसका नाम सूची से हटा दिया गया है तो उसे पहली बार वोटर बनने की घोषणा क्यों करनी चाहिए? उनके अनुसार, पुराने मतदाता से ऐसी घोषणा करवाना गलत है और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।
20 राज्यों में विशेष अभियान का निर्देश
चुनाव आयोग ने 1 अक्टूबर को 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया। इन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस अभियान का मक़सद उन पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना है जो शुरुआती एसआईआर प्रक्रिया के दौरान सूची से छूट गए थे। इसमें पहली बार वोटर बनने वाले युवा और दूसरे पात्र नागरिक भी शामिल हैं। इस अभियान में फॉर्म 6 के ज़रिए आवेदन किया जाएगा। चुनाव आयोग ने ऑनलाइन फॉर्म 6 में जुलाई में जोड़ी गई अतिरिक्त घोषणा को भी हटाने का फैसला किया है। इस घोषणा के तहत आवेदक को अपने माता-पिता का विवरण पिछली एसआईआर प्रक्रिया से जोड़कर बताना पड़ता था। हालांकि, पुराने मतदाताओं के नाम हटने के बाद उन्हें दोबारा शामिल करने के लिए फॉर्म 6 का इस्तेमाल किए जाने पर सवाल बने हुए हैं।
गोवा के मतदाता का मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुँचा
फॉर्म 6 को लेकर विवाद का एक मामला गोवा से सामने आया है। उत्तरी गोवा की सांता क्रूज़ विधानसभा सीट के निवासी 41 वर्षीय परेश सालगांवकर ने अपने और परिवार के सदस्यों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ में याचिका दायर की है।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार सालगांवकर का कहना है कि वह 2003 से पंचायत, विधानसभा और लोकसभा के कई चुनावों में मतदान कर चुके हैं। इसके बावजूद एसआईआर के दौरान उनके परिवार के छह सदस्यों के नाम अंतिम मतदाता सूची से हट गए। उनका कहना है कि चुनाव आयोग उनसे फॉर्म 6 भरने के लिए कह रहा है, जबकि यह फॉर्म पहली बार मतदाता बनने वालों के लिए है। उन्होंने इसे गलत घोषणा बताया और कहा कि वह ऐसी घोषणा नहीं करना चाहते, जो उनके पुराने मतदाता होने के तथ्य के विपरीत हो। इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने प्रक्रिया पर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि वह इस बात से परेशान है कि नियमों को किस तरह निलंबित किया गया और यह भी सवाल उठाया कि ऐसे कितने लोग होंगे जो अदालत तक नहीं पहुंच पाए हैं। गुरुवार को अदालत ने चुनाव आयोग से यह सुनिश्चित करने का प्रयास करने को कहा कि कोई भी पात्र मतदाता मतदाता सूची से बाहर न रह जाए। परेश सालगांवकर और उनका परिवार आठ साल से अधिक समय पहले उत्तरी गोवा की उसी विधानसभा सीट के भीतर अपने पुराने घर से दूसरे पते पर चला गया था। एसआईआर के तहत घर-घर जाकर गणना शुरू हो गई है तो उन्होंने अपने पुराने क्षेत्र के बूथ लेवल ऑफिसर से संपर्क किया। 12 नवंबर 2025 को उन्होंने नए क्षेत्र के बीएलओ से संपर्क किया तो उन्हें पता बदलने के लिए फॉर्म 8 भरने को कहा। सालगांवकर और परिवार के अन्य सदस्यों ने फॉर्म 8 भरकर बीएलओ को दे दिए। उनका कहना है कि बीएलओ ने बताया कि 8 दिसंबर को आवेदन चुनाव आयोग के पोर्टल पर अपलोड कर दिए गए हैं और प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई है। उन्हें चुनाव आयोग की ओर से एसएमएस के ज़रिए आवेदन प्राप्त होने की सूचना भी मिली। लेकिन 16 दिसंबर को जब मतदाता सूची का मसौदा प्रकाशित हुआ तो सालगांवकर और उनके परिवार के सदस्यों के नाम उसमें नहीं थे।
‘सिस्टम की ग़लती की सज़ा नागरिक को क्यों?’
सालगांवकर ने चुनाव आयोग के राष्ट्रीय शिकायत पोर्टल और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने फॉर्म 8 खारिज किए जाने का कारण पूछा। उनके मुताबिक़, अधिकारियों की ओर से जवाब मिला कि उनके इपिक रिकॉर्ड सिस्टम में नहीं मिल रहे हैं, क्योंकि उनके नाम अनुपस्थित, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और मृत यानी एएसडीडी मतदाताओं की सूची में डालकर हटा दिए गए हैं। सालगांवकर ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि उनकी गलती क्या है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उनके पास पहले से मतदाता पहचान और मतदान का रिकॉर्ड है तो उन्हें पहली बार मतदाता बनने की घोषणा करने के लिए क्यों कहा जा रहा है?
राहुल गांधी ने भी फॉर्म 6 में बदलाव पर मांगा जवाब
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी ऑनलाइन फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर चुनाव आयोग से सवाल पूछे हैं। उन्होंने पूछा कि फॉर्म में बदलाव लागू करने के लिए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज को किसने निर्देश दिया और कंपनी के भीतर इसे किसने मंज़ूरी दी। एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों और युवा संगठन कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्रवाई से बीजेपी को लाभ पहुंच रहा है। गांधी जयंती के अवसर पर दिल्ली और मुंबई में चुनाव आयोग के ख़िलाफ़ प्रदर्शन भी हुए थे, जिनमें विपक्षी नेताओं, कलाकारों और नागरिक समाज के सदस्यों ने हिस्सा लिया।
हटाए गए वोटरों से फॉर्म 6 भरवाने पर पूर्व सीईसी एसवाई कुरैशी बोले-चुनाव आयोग जबरन अपराध करा रहा है’
