नेहा बोरा की याचिका दिल्ली हाईकोर्ट से खारिज: मजिस्ट्रेट के सामने पेश होना होगा, पीस बांड भी भरना होगा

नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो) । दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष नेहा बोरा की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने कोर्ट के उस नोटिस को चुनौती दी थी, जिसमें उनसे शांति बनाए रखने के लिए एक पीस बांड (मुचलका) भरने को कहा गया था। यह मामला हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों, खासकर 16 अक्टूबर को मंडी हाउस में हुए प्रोटेस्ट से जुड़ा है।
जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने गुरुवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे शुक्रवार (23 अक्टूबर) शाम 6 बजे के बाद सुनाया गया। यानी अब नेहा बोरा को मजिस्ट्रेट के सामने बांड भरना ही होगा। नई दिल्ली जिले के स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने 17 अक्टूबर को यह नोटिस जारी किया था यानी ठीक उसी दिन जब नेहा बोरा को हिरासत से रिहा किया गया था। इस नोटिस में उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश होकर 10,000 रुपये का पर्सनल बांड और एक जमानतदार पेश करने का निर्देश मिला था।
वकीलों के बीच हुई तीखी बहस
कोर्ट में नेहा बोरा की तरफ से वकील अभिख चिमनी और सीनियर एडव्होकेट गोपाल शंकारायण ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि पुलिस का यह नोटिस बिल्कुल अस्पष्ट और गलत तथ्यों पर आधारित है। यह संविधान के आर्टिकल 19 और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। उनका कहना था कि नोटिस में ऐसा कोई पुख्ता आधार नहीं बताया गया जिससे लगे कि शांति भंग हो सकती है। वहीं, दिल्ली पुलिस की तरफ से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कोर्ट के सामने नेहा बोरा के खिलाफ कानून के 12 उल्लंघनों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह से एहतियाती है। पुलिस ने आरोप लगाया कि नेहा बोरा उस भीड़ का हिस्सा थीं जहां एक्टिविस्ट प्रशांत भूषण और कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं ने सरकार बदलने की बात कही थी। इस पर नेहा बोरा के वकील ने पलटवार करते हुए कहा- लोकतंत्र में सरकार बदलना कोई गलत बात नहीं है। इसके जवाब में पुलिस के वकील ने कहा- सरकार वोटों से बदलेगी, नई दिल्ली में असामाजिक तत्वों के इकट्ठा होने से नहीं।
चर्चा में क्यों हैं नेहा बोरा?
29 साल की नेहा बोरा जेएनयू में थिएटर आर्टिस्ट और पीएचडी स्टूडेंट हैं। इस महीने वे चुनाव आयोग के खिलाफ हुए अलग-अलग प्रदर्शनों के दौरान कई बार हिरासत में ली जा चुकी हैं और फिर छोड़ी गई हैं। वे अक्सर पुलिस बस या डिटेंशन सेंटर के अंदर से सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करती नजर आती हैं। खास बात यह है कि वामपंथी दल की नेता नेहा बोरा इन दिनों सिर्फ लेफ्ट ही नहीं, बल्कि कांग्रेस की लीडरशिप वाले इंडिया गठबंधन और सीजेपी जैसे नए संगठनों के साथ भी तालमेल बिठाते नजर आ रही हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट तक हुए विपक्षी दलों के मार्च के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ उनकी तस्वीरें भी काफी चर्चा में रही थीं।