कन्नौज : 5 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई डुबकी, पूर्व संध्या पर हुई गंगा महाआरती

बृजेश चतुर्वेदी कन्नौज। (आवाज न्यूज ब्यूरो)। मेहंदी घाट पर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। बुधवार तड़के से ही 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई और पूजा-अर्चना की। प्रशासन ने भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए थे। आसपास…

गुरु नानक जयंती : सत्य, सेवा और समानता का मार्ग 

गुरु नानक देव जी की जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानवता के सार्वभौमिक मूल्यों की पुनर्स्मृति है। सत्य, करुणा, समानता और सेवा उनके जीवन के आधार स्तंभ थे। आज जब समाज विभाजन, भेदभाव और स्वार्थ की दीवारों में उलझा है, तब गुरु नानक के उपदेश हमें यह सिखाते हैं कि ईश्वर की प्राप्ति…

छठ महापर्व  : धर्म से अधिक, समाज और संस्कृति का पर्व

छठ महापर्व केवल सूर्य की उपासना नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, स्त्री-सशक्तिकरण, पर्यावरणीय चेतना और पारिवारिक एकता का प्रतीक है। यह पर्व हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखता है, कारीगरों और ग्रामीण जीवन को सम्मान देता है और समानता का संदेश फैलाता है। आधुनिकता के युग में भी इसकी सादगी और अनुशासन भारतीय समाज की आत्मा…

गोवर्धन पूजा से श्रद्धा बढ़े, दिखावा नहीं

 “कृष्ण का पर्व हमें सिखाता है कि असली भक्ति धरती, गाय और करुणा में है, कैमरे की चमक में नहीं।” गोवर्धन पूजा केवल भगवान कृष्ण का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, गाय और धरती के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति दिखावे में नहीं, संवेदना में है। आज जब पूजा…

खुशियों की दीपावली : मन की अंधियारी दूर करने का समय

(रोशनी बाहर नहीं, मन के भीतर जलाएं दीये, रिश्तों और सुकून से रौशन होती है असली दीपावली।)  दीपावली केवल दीप जलाने का पर्व नहीं, बल्कि मन के अंधकार को मिटाने और आत्मा में उजाला भरने का अवसर है। आज यह जरूरी है कि हम इसे दिखावे या प्रदूषण का उत्सव न बनाएं, बल्कि सादगी, करुणा…

धनतेरस : समृद्धि का नहीं, संवेदना का उत्सव

(आभूषणों से ज़्यादा मन का सौंदर्य जरूरी, मन की गरीबी है सबसे बड़ी दरिद्रता।)  धनतेरस का अर्थ केवल ‘धन’ नहीं बल्कि ‘ध्यान’ भी है — ध्यान उस पर जो हमारे जीवन को सार्थक बनाता है। यह त्योहार हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि समृद्धि का असली अर्थ क्या है। अगर घर में प्रेम…

करवा चौथ : परंपरा, प्रेम और पितृसत्ता के बीच

(प्रेम, आस्था और समानता के बीच झूलता एक पर्व — जहाँ परंपरा भी है, और बदलाव की दस्तक भी।)  करवा चौथ भारतीय संस्कृति का एक लोकप्रिय पर्व है, जिसमें विवाहित महिलाएँ अपने पति की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। हालांकि इसकी परंपरा प्रेम और समर्पण से जुड़ी है, लेकिन आधुनिक समाज में यह…

बुराई पर विजय: क्या रावण सच में मर गए?

क्या दशहरे का संदेश खो गया है? दशहरा बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है, लेकिन आज रावण दहन केवल मनोरंजन बन गया है। पुतले जलते हैं, पर समाज में अपराध, दुष्कर्म, घरेलू हिंसा और भ्रष्टाचार लगातार बढ़ रहे हैं। पुराना रावण विद्वान और शक्तिशाली था, पर अहंकार और वासना के कारण विनष्ट हुआ।…

जलते पुतले, बढ़ते रावण : दशहरे का बदलता अर्थ

“पुतलों का दहन नहीं, मन और समाज के भीतर छिपी बुराइयों का संहार ही दशहरे का असली संदेश है।” दशहरे पर रावण के पुतले जलाना केवल परंपरा नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। लेकिन आज पुतले केवल मनोरंजन बनकर रह गए हैं, जबकि समाज में अहंकार, हिंसा, वासना और अन्य बुराइयाँ…

धूमधाम से सम्पन्न हुआ रामलीला कमेटी फतेहगढ़ की पत्रिका का विमोचन

फर्रुखाबाद।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। गुरुवार को श्री रामलीला कमेटी फतेहगढ़ की वार्षिक पत्रिका का विमोचन पूर्व जिला पंचायत सदस्य विजय कुमार यादव के कोल्ड स्टोरेज प्रांगण में किया गया। पत्रिका विमोचन समारोह में नगर और क्षेत्र के लोगों की भारी भीड़ उमड़ी, जिसने आयोजन को भव्य रूप प्रदान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत पूजा-अर्चना के साथ…