पानी में घुलनशील उर्वरक : पर्यावरण के अनुकूल और फ़सल उत्पादकता में सुधार की कुंजी।

नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो) जल-घुलनशील उर्वरकों जैसे पर्यावरण के अनुकूल और कुशल उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने वाली नीतियों और सब्सिडी को मज़बूत किया जाना चाहिए। जल-घुलनशील उर्वरकों को अन्य टिकाऊ कृषि पद्धतियों, जैसे फ़सल चक्रण, कार्बनिक पदार्थ समावेशन और जल प्रबंधन तकनीकों के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए। जल-घुलनशील उर्वरक मक्का चारा उत्पादन में…

मेला रामनगरिया में लगाए गए बीमा सखी शिविर का समापन : महिलाओं में दिखा खास उत्साह

फर्रुखाबाद।(आवाज न्यूज ब्यूरो) मेला रामनगरिया में लगाए गए जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के बीमा सखी शिविर का समापन बुधवार को हुआ। समापन अवसर पर शिविर की उपलब्धियों पर विस्तार से चर्चा की गई और मेले में मौजूद लोगों को एलआईसी की विभिन्न बीमा एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की जानकारी दी गई।शिविर में यह बताया गया…

नर्सरी से कॉलेज तक, एडमिशन की युद्धभूमि

(दाख़िले की दौड़ में बच्चों पर बढ़ता दबाव और प्रतिस्पर्धा) – डॉ० सत्यवान सौरभ नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो) आज शिक्षा का अर्थ सीखना नहीं, बल्कि साबित करना हो गया है। साबित करना कि बच्चा बेहतर है, तेज़ है, दूसरों से आगे है। और यह साबित करने की ज़िम्मेदारी बच्चे से ज़्यादा उसके माता-पिता के कंधों…

ज्ञान, स्क्रीन और संवेदना का संकट

— डॉ. सत्यवान सौरभ नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो) “ज्ञान बढ़ा पर भाव क्या, अब भी मन लाचार”—यह पंक्ति केवल एक दोहा नहीं, बल्कि इक्कीसवीं सदी के मनुष्य की सामूहिक आत्मस्वीकृति है। हमने जितना ज्ञान अर्जित किया है, उतना शायद मानव इतिहास के किसी भी कालखंड में नहीं किया गया। सूचनाएँ उँगलियों पर नाच रही हैं,…

मासिक धर्म और सैनिटरी पैड: स्कूलों में गरिमा की परीक्षा

– डॉ. प्रियंका सौरभ नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो) सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्कूलों में छात्राओं को निःशुल्क सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने और मासिक धर्म स्वच्छता को अनिवार्य करने संबंधी निर्देश केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं हैं, बल्कि यह भारतीय समाज की उस सामूहिक सोच को आईना दिखाते हैं, जिसमें आज भी मासिक धर्म को संकोच, चुप्पी…

रिश्ते, शर्तें और डर से घिरी एक पीढ़ी

— डॉ. प्रियंका सौरभ नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो) आज के समय में यदि कोई सबसे जोखिम भरा सामाजिक कार्य है, तो वह है—किसी को रिश्ते की बात कहना। यह कोई अतिशयोक्ति नहीं, बल्कि हमारे बदलते सामाजिक मानस की सच्चाई है। जिस विषय को कभी परिवार, भरोसे और सामूहिक निर्णय का आधार माना जाता था, वह आज…

सम्मान, सम्मेलन और कविता का खोता जन-सरोकार

(जब कविता मंचों में सिमट जाए, जन-सरोकार पीछे छूट जाएँ और आत्ममुग्धता के बंद वृत्त में कवियों का लोकतंत्र तमगों व सर्टिफ़िकेटों में बदल जाए।)   – डॉ. सत्यवान सौरभ नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो) कविता समाज की सामूहिक चेतना की आवाज़ होती है। वह समय का दस्तावेज़ भी है और समय से टकराने का साहस भी। लेकिन…

मेला श्रीरामनगरिया में गांधी विचार प्रचार मंच का आयोजन

फर्रुखाबाद।(आवाज न्यूज ब्यूरो) मेला श्रीरामनगरिया के सांस्कृतिक पांडाल में गांधी विचार प्रचार मंच के बैनर तले कार्यक्रम आयोजित हुआ।इस विचार प्रचार मंच का गठन मेला श्रीरामनगरिया के संस्थापक पूर्व विधायक स्मृतिशेष महरम सिंह ने किया था।कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व डी.जी.सी वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह सोमवंशी ने की। विशिष्ट अतिथि राजेपुर ब्लॉक प्रमुख पल्लव सोमवंशी तथा…

सुनो नहरों की पुकार : जब आस्था पर्यावरण से संवाद करती है

“आस्था का सच्चा स्वरूप यही है कि हम प्रकृति का सम्मान करें, नहरों को निर्मल रखें और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ जल का उपहार दें।”  –  डॉ. प्रियंका सौरभ नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो) आज जब हम पूजा, परंपरा और श्रद्धा की बात करते हैं, तो अक्सर भूल जाते हैं कि धर्म का मूल उद्देश्य…

कैश न मिल पाने से उपभोक्ताओं का फूटा गुस्सा

फर्रुखाबाद।(आवाज न्यूज ब्यूरो)  शमशाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम रजला मई स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में पिछले कई दिनों से चली आ रही कैश की समस्या गुरुवार को उस समय उफान पर आ गई, जब परेशान उपभोक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने बैंक परिसर में जमकर हंगामा किया। उपभोक्ताओं का आरोप है कि…