दोहरे मापदंड! कर्मचारी परेशान, सांसद मालामाल

‘‘महंगाई में पिसते कर्मचारी, राहत में नहाते सांसद : 2 फीसदी बनाम 24 फीसदी का गणित!‘‘नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो) सरकार ने जहां सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में मात्र 2 फीसदी की वृद्धि की, वहीं सांसदों के भत्तों और वेतन में 24 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी। यह विरोधाभास कर्मचारियों और जनता में नाराजगी पैदा कर…

 नैतिक पतन के चलते खतरे में इंसानी रिश्ते। 

(घोर कलयुग की दस्तक) समाज में कितना पतन बाकी है?  यह सुनकर दिल दहल जाता है कि कोई बेटा अपने ही माता-पिता की इतनी निर्ममता से हत्या कर सकता है? महिला ने जेठ के साथ मिलकर अपने दो वर्ष के बेटे को मरवा दिया। पत्नी ने प्रेमी सँग मिलकर मर्चेंट नेवी मे अफसर पति के टुकड़े-टुकड़े…

क्या सचमुच सिमट रही है दामन की प्रतिष्ठा?

समय के साथ परिधान और समाज की सोच में बदलाव आया है। पहले “दामन” केवल वस्त्र का टुकड़ा नहीं, बल्कि मर्यादा और संस्कृति का प्रतीक माना जाता था। पारंपरिक वस्त्रों—साड़ी, घाघरा, अनारकली—को महिलाओं की गरिमा से जोड़ा जाता था। “दामन की प्रतिष्ठा” अब भी बनी हुई है, परंतु उसकी परिभाषा बदल चुकी है। परंपरा और…

कुआँ सूखने पर ही पता चलती है पानी की कीमत

कहावत “जब तक कुआँ सूख नहीं जाता, हमें पानी की कीमत का पता नहीं चलता” हमें इस बात की याद दिलाती है कि हमें अपने जीवन और संसाधनों के प्रति जागरूक और कृतज्ञ रहना चाहिए। चाहे वह जल हो, प्रेम हो, स्वतंत्रता हो या स्वास्थ्य, हमें इनका सम्मान और संरक्षण करना चाहिए ताकि आने वाली…

बार-बार समाज को झकझोरते सवेंदनहीन, अमानवीय फैसले

संवेदनहीन न्याय? क्या हमारी न्याय प्रणाली यौन अपराधों के मामलों में और अधिक संवेदनशील हो सकती है? या फिर ऐसे सवेंदनहीन, अमानवीय फैसले बार-बार समाज को झकझोरते रहेंगे? यह मामला न्यायपालिका की संवेदनशीलता और यौन अपराधों के खिलाफ कड़े कानूनों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाता है। महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने फैसले का विरोध…

शादी के बाद करियर : उड़ान या उलझन?

परिवारों को यह समझना होगा कि शादी का मतलब महिलाओं के करियर का अंत नहीं होता। पुरुषों को घर और बच्चों की जिम्मेदारी में बराबर भागीदारी निभानी चाहिए।  कंपनियों को महिलाओं के लिए अधिक फ्लेक्सिबल जॉब ऑप्शंस देने चाहिए। करियर और शादी को विरोधी ध्रुवों की तरह देखने की बजाय उन्हें साथ ले चलने की…

लुप्त होती हरियाणा की अनमोल विरासत रागनी कला

हरियाणवी लोकसंस्कृति का एक महत्त्वपूर्ण अंग रागनी आज विलुप्ति के कगार पर है। मनोरंजन के आधुनिक साधनों के आगमन और बदलते सामाजिक परिवेश के कारण यह कला पिछड़ती जा रही है। यदि समय रहते इसके संरक्षण के प्रयास नहीं किए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को यह विरासत केवल किताबों में ही देखने को मिलेगी।…

अतीत की गोद में सोए तालाब और बावड़ियाँ : बस पानी ही नहीं, कहानियों का खजाना

(जल दिवस: 22 मार्च विशेष)अगर हम तालाबों और बावड़ियों को सिर्फ़ पानी जमा करने की जगह समझते हैं, तो शायद हम उनके साथ न्याय नहीं कर रहे। ये सिर्फ़ जल-स्रोत नहीं, बल्कि सदियों की कहानियों, रहस्यों, परंपराओं और लोककथाओं के ज़िंदा गवाह हैं। पुराने तालाब और बावड़ियाँ इतिहास की किताब के वह पन्ने हैं, जिन…

तलाक की भेंट चढ़ते ‘तेरे मेरे सपने’

 (जब सपने बिखरते हैं, प्रेम विवाह में तलाक बढ़ते हैं) आजकल तलाक के बढ़ते मामलों ने समाज में एक नई चिंता को जन्म दिया है। चाहे अरेंज मैरिज हो या प्रेम विवाह, रिश्तों में दूरियाँ बढ़ने से वैवाहिक जीवन अस्थिर होता जा रहा है। तलाक सिर्फ़ दो लोगों को ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों, बच्चों…

कन्नौज : मुक्ताकाशी मंच प्रांगण में भाजपाइयों ने जमकर खेली होली

बृजेश चतुर्वेदी कन्नौज।(आवाज न्यूज ब्यूरो)  भारतीय जनता पार्टी परिवार द्वारा जीटी रोड स्थिति यूपीटी के पास मुक्ता कांशीमंच प्रांगण में होली मिलन समारोह कार्यक्रम का आयोजन  किया गया। इस मौके पर सदर विधायक व उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री असीम अरुण,  कानपुर बुंदेलखंड क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल, पूर्व सांसद सुब्रत पाठक, जिला अध्यक्ष…