जल की बूंद-बूंद पर संकट : नीतियों के बावजूद क्यों प्यासी है भारत की धरती?  

  नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। भारत दुनिया की 18% आबादी और मात्र 4% ताजे जल संसाधनों के साथ गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। भूजल का अत्यधिक दोहन, प्रदूषण, असंतुलित खेती, और जलवायु परिवर्तन इसके प्रमुख कारण हैं। सरकारी योजनाओं और नीतियों के बावजूद कार्यान्वयन और जनभागीदारी की कमी से हालात बिगड़ते जा…

संजय गांधी और मारुति सुजुकी

नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। ऐसी जानकारी जो बहुत कम लोगों को है। 1970 के दशक में भारत में कारें केवल अमीरों की पहुंच में थीं। फिएट और एम्बेसडर जैसी कारें न सस्ती थीं, न किफायती। इसी दौर में संजय गांधी, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के छोटे बेटे, ने एक सपना देखा हर भारतीय परिवार के…

कॉलर ट्यून की विदाई : जनता की सुनवाई या थकान की जीत?

“कॉलर ट्यून की विदाई: जनता की सुनवाई या थकान की जीत?” “कॉलर ट्यून को अलविदा कहा गया।”  6 दिन पहले प्रकाशित हुआ मेरा लेख — “कॉलर ट्यून या कलेजे पर हथौड़ा: हर बार अमिताभ क्यों? जब चेतावनी बन गई चिढ़” अमिताभ बच्चन की कोविड कॉलर ट्यून ने देश को जागरूक किया, पर समय के साथ…

नफरत की बात करने वालों को मोहब्बत और विकास से हराएंगे : तेजस्वी यादव

नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने गुरुवार को कहा कि 2025 में जो पार्टी नफरत और समाज को बांटने की बात करती है, उसे हम लोग मोहब्बत और विकास से हराएंगे। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि ये लोग धर्म को धर्म से और जाति को जाति से…

अबू आजमी की मुसलमानों से अपील : एकजुट हों और सेक्युलर हिंदुओं के साथ मिलकर खड़े हों

नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। सपा विधायक अबू आजमी ने मुसलमानों से अपील की कि एक हो जाएं। सेक्युलर हिंदू भाइयों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो जाएं। वक्फ कानून पर सपा विधायक अबू आजमी ने कहा कि आप सबको मालूम है कि ये बिल मुसलमानों के खिलाफ है। हमें करना क्या है, हमें…

लैंगिक समानता की राह में भारत की गिरावट: एक चिंताजनक संकेत

-प्रियंका सौरभ नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम) की वैश्विक लैंगिक अंतर रिपोर्ट 2024 में भारत को 148 देशों में 131वाँ स्थान प्राप्त हुआ है। यह न केवल दो पायदान की गिरावट है, बल्कि भारत की विकास यात्रा में छुपी उस असमानता का पर्दाफाश भी करती है जिसे हम अक्सर नजरअंदाज…

संविधान हत्यारे कौन? – जब अवसरवाद शर्म को भी खा जाता है

आपातकाल: लोकतंत्र पर लगा पहला आधिकारिक तालाजनता ने विरोध किया, फिर क्षमा भी दीबदले हुए चेहरे, वही मौकापरस्तीआज की सत्ता क्या सच में लोकतांत्रिक है?संविधान की हत्या के असली अपराधी कौन? राजनीति में परिवर्तन स्वाभाविक है, लेकिन चरित्रहीनता नहीं। आज जो नेता इंदिरा गांधी को कोसते हुए ‘संविधान बचाओ’ का नारा लगा रहे हैं, कल…

संपादकीय रिक्त है — क्योंकि लोकतंत्र अभी मौन है।

“जब कलम चुप हो जाए: लोकतंत्र का शोकगीत” आपातकाल के दौरान अख़बारों ने विरोध में अपना संपादकीय कॉलम ख़ाली छोड़ा था। आज औपचारिक सेंसरशिप नहीं है, लेकिन आत्म-सेन्सरशिप, भय और ‘राष्ट्रभक्ति’ के नाम पर विचारों का गला घोंटा जा रहा है। सवाल पूछना देशद्रोह बन गया है, और संपादकीय अब सत्ता के प्रवक्ता हो गए…

पेंशन का अधूरा वादा : भारत के बुज़ुर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा की लड़ाई

भारत आज जनसंख्यिकीय संक्रमण के उस मोड़ पर खड़ा है, जहाँ युवाओं की अधिकता के पीछे छिपी एक चुप्पी है — बुज़ुर्गों की बढ़ती आबादी, जिनके पास न आय का स्रोत है, न सामाजिक सुरक्षा का भरोसा। जिस देश में “बुजुर्गों को आशीर्वाद का भंडार” माना जाता है, वहाँ उनकी वृद्धावस्था की सबसे बड़ी सच्चाई…

दलितों पर हमले को लेकर बोलीं ममता बनर्जी : अब अल्पसंख्यक आयोग कहां है?

‘‘पश्चिम बंगाल में अगर कुछ होता है तो 100 आयोग आते हैं, अब आयोग कहां है?‘‘नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। ओडिशा और उत्तर प्रदेश में दलितों पर हुए हमले को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मैं दलितों को दलित नहीं बल्कि इंसान के तौर पर देखती…