संजय गांधी और मारुति सुजुकी

नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। ऐसी जानकारी जो बहुत कम लोगों को है। 1970 के दशक में भारत में कारें केवल अमीरों की पहुंच में थीं। फिएट और एम्बेसडर जैसी कारें न सस्ती थीं, न किफायती। इसी दौर में संजय गांधी, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के छोटे बेटे, ने एक सपना देखा हर भारतीय परिवार के पास अपनी कार हो। उनका विजन था एक ऐसी पीपल्स कार बनाना, जो सस्ती, भरोसेमंद और भारतीय सड़कों की खराबी, गर्म मौसम व सीमित संसाधनों के लिए उपयुक्त हो।
संजय ने ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की, लेकिन उसे बीच में छोड़कर 1966 में इंग्लैंड चले गए। वहाँ उन्होंने रोल्स रॉयस में इंटर्नशिप की, जहाँ कार निर्माण की तकनीकी बारीकियाँ सीखीं। 1971 में भारत लौटकर उन्होंने “मारुति मोटर्स लिमिटेड” की स्थापना की। हरियाणा के गुड़गांव में एक छोटा प्लांट शुरू हुआ, जहाँ संजय ने कार के डिज़ाइन और प्रोटोटाइप पर खुद काम शुरू किया। हर पहलू डिज़ाइन, निर्माण, फैक्ट्री की प्लानिंग को वे बारीकी से मॉनिटर करते थे। उनके लिए यह सिर्फ कार बनाना नहीं, बल्कि देश को आत्मनिनिर्भर बनाने और रोज़गार पैदा करने का मिशन था। उनका सपना था कि भारत के गरीब और मध्यम वर्ग के लोग भी कार खरीदने का सपना पूरा कर सकें।
लेकिन रास्ता आसान नहीं था। तकनीकी विशेषज्ञता की कमी, सीमित पूंजी और राजनैतिक विरोध ने कई चुनौतियाँ खड़ी कीं। कई लोग इसे “राजकुमार का हवाई सपना” कहकर मजाक उड़ाते थे। 1977 में जनता पार्टी की सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर मारुति का लाइसेंस रद्द कर दिया, और प्रोजेक्ट ठप हो गया। फिर भी संजय अपने सपने पर अडिग रहे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
आज के ही दिन 23 जून, 1980 को एक विमान दुर्घटना में संजय की असामयिक मृत्यु ने इस सपने को बड़ा झटका दिया। लेकिन उसी साल इंदिरा गांधी की सत्ता में वापसी के बाद उन्होंने अपने बेटे के सपने को पुनर्जनन करने का फैसला किया। 1981 में मारुति उद्योग लिमिटेड की स्थापना हुई, और जापान की सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन के साथ तकनीकी साझेदारी की गई।
दिसंबर के महीने सन 83 को मारुति 800 लॉन्च हुई। यह कार सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि लाखों भारतीयों के सपनों की चाबी बनी। किफायती, भरोसेमंद और भारतीय सड़कों के लिए एकदम सही, इस कार ने मध्यम वर्ग के लिए कार खरीदने का सपना सच कर दिखाया।
इंदिरा गांधी की दृढ़ इच्छाशक्ति और सुजुकी के सहयोग ने संजय के सपने को एक ऐसी विरासत में बदला, जो आज भी भारत की सड़कों पर दौड़ रही है। मारुति सुजुकी आज भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता है, जिसके पास बाजार का 40% से अधिक हिस्सा है। यह कहानी संजय गांधी के उस विजन की है, जिन्होंने न डिग्री पूरी की, न नाम कमाने की चाह रखी, बस भारत के आम आदमी को सशक्त करना चाहा।
आज भी जब सड़क पर आपको मारुति सुजुकी की कोई कार दौड़ती नजर आए तो संजय गांधी को याद करना ये उन्हें का देखा गया सपना था जो भारत की सड़कों की शान बना हुआ है।