कानपुर के अखिलेश दुबे से जुड़े विवाद से जनता का ध्यान भटकाने के लिए कराया गया बरेली कांड : अखिलेश

‘‘पुलिस थानों में पिछड़े और मुसलमानों के साथ हो रहा भेदभाव‘‘
लखनऊ।(आवाज न्यूज ब्यूरो)।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि बरेली में हाल ही में हुई हिंसा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जानबूझकर कराई गई थी, ताकि कानपुर के वकील अखिलेश दुबे से जुड़े विवाद से जनता का ध्यान भटकाया जा सके। पार्टी कार्यालय पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अखिलेश ने कहा कि प्रदेश प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने में विफल हो चुका है। सरकार के दबाव में अधिकारियों ने उन्हें और उनकी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल को बरेली जाने से रोका।
अखिलेश ने कहा कि जब अखिलेश दुबे का मामला तूल पकड़ रहा था, तभी कानपुर में बारावफात जुलूस के दौरान आई लव मुहम्मद पोस्टर को लेकर नया विवाद शुरू हुआ, जिसे कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने मुद्दा बनाया। इसके बाद तनाव फैला और 26 सितंबर को बरेली में हिंसा भड़क उठी। उन्होंने आरोप लगाया, सच्चाई यह है कि बरेली की घटना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा थी, ताकि कानपुर के अखिलेश दुबे केस से जनता का ध्यान हटाया जा सके।“
श्रीयादव ने आगे आरोप लगाया कि कानपुर के शीर्ष पुलिस अधिकारी आपसी पोस्टिंग और ट्रांसफर को लेकर टकराव में उलझे हुए हैं। साथ ही उन्होंने सरकार पर भ्रष्टाचार को लेकर ‘चुनिंदा कार्रवाई’ का आरोप लगाया और पूछा, “गरीबों और मुसलमानों की संपत्तियों पर ही बुलडोज़र क्यों चलता है, जबकि अखिलेश दुबे जैसे लोगों को संरक्षण मिलता है?”
उन्होंने कहा, “बुलडोज़र अखिलेश दुबे पर क्यों नहीं चलता? क्योंकि उसके दोस्त ऊंचे पदों पर बैठे पुलिस अफसर हैं। प्रशासन के पास भाजपा नेताओं की अवैध संपत्तियों की सूची है, लेकिन उन पर कभी कार्रवाई नहीं होती।” श्रीयादव ने एक राजस्व अधिकारी पर रू 100 करोड़ की अवैध संपत्ति बनाने का आरोप भी लगाया। यादव ने भाजपा सरकार की ‘बुलडोज़र राजनीति’ की आलोचना करते हुए कहा, “हम गरीबों को सजा देने के लिए बुलडोज़र संस्कृति के खिलाफ हैं। अगर सरकार ने अंबेडकर और कांशीराम स्मारकों का ठीक से रखरखाव किया होता, तो उनके पत्थर काले न पड़ते। उन्होंने पुलिस थानों में पोस्टिंग में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ भेदभाव के आरोप भी लगाए। इससे पहले बुधवार को अखिलेश यादव ने रामपुर में सीनियर सपा नेता आज़म खान से मुलाकात की, जिसे उन्होंने “एक अच्छी और सार्थक बातचीत“ बताया।