‘‘बंगाल में लड़ाई केवल चुनाव की नहीं बल्कि अधिकार और अस्तित्व की भी है।‘‘
नई दिल्ली। (आवाज न्यूज ब्यूरो)। पश्चिम बंगाल की सियासत में इस वक्त जो कुछ हो रहा है वह केवल प्रशासनिक टकराव नहीं है यह सीधे-सीधे सत्ता और संवैधानिक अधिकारों की टक्कर है। चुनाव आयोग ने सात सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को निलंबित कर दिया आरोप लगाया कि उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण एसआईआर में लापरवाही बरती। लेकिन इससे पहले कि चुनाव आयोग अपनी कार्रवाई का प्रभाव देख पाता ममता बनर्जी ने साफ ऐलान कर दिया कि उनकी नौकरी नहीं जाएगी। यह केवल एक बयान नहीं है यह दिल्ली के लिए एक सीधा संदेश है।
यह संदेश है कि बंगाल में वह सब नहीं चलेगा जो दूसरे राज्यों में चुनाव आयोग करता आया है। चुनाव आयोग ने बिहार उत्तर प्रदेश और कई अन्य राज्यों में आक्रामक रवैया दिखाया है। अधिकारियों को हटाया गया निलंबित किया गया सरकारों को निर्देश दिए गए और उन्हें मानना पड़ा। लेकिन बंगाल में तस्वीर उलटी है। यहां आयोग कार्रवाई करता है और ममता बनर्जी उसके सामने ढाल बनकर खड़ी हो जाती हैं। यह वही ममता हैं जो आईपैक के दफ्तर पर छापेमारी की खबर मिलते ही खुद वहां पहुंच गई थीं। यह वही ममता हैं जो चुनाव आयोग के फैसलों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक चली गईं।
यह वही ममता हैं जो हर बार यह साबित कर रही हैं कि बंगाल में लड़ाई केवल चुनाव की नहीं बल्कि अधिकार और अस्तित्व की भी है। आज स्थिति यह है कि चुनाव आयोग कार्रवाई कर रहा है लेकिन उसका असर दिखाई नहीं दे रहा। ममता बनर्जी हर फैसले का जवाब दे रही हैं और इतना सख्त जवाब दे रही हैं कि आयोग भी रणनीति बदलने को मजबूर हो गया है।
फुटबाल की तरह खेल रही है राजनीति
फुटबाल गेम में जब दो मजबूत टीमे आमने सामने होती है तो वह पूरा टाइम लेकर खेल को आगे बड़ाती हैं। पश्चिम बंगाल के होने वाले विधानसभा चुनाव में भी कुछ ऐसा ही दिखाई दे रहा है। समय तेजी से आगे बढ़ रहा है और ममता बनर्जी भी यही चाहती हैं। क्योंकि राजनीति में समय ही सबसे बड़ा हथियार होता है। जितना समय बीतेगा उतना आयोग की कार्रवाई का असर कमजोर होगा और ममता की पकड़ मजबूत होती जाएगी।
क्या है ताजा मामला
पश्चिम बंगाल में चल रहे एसआईआर को लेकर काम में लापरवाही बरतने के आरोप में भारत निर्वाचन आयोग ने सात सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (एईआरओ) को निलंबित करने का फरमान सुना दिया। फरमान के ठीक दूसरे दिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एलान कर दिया कि जिन कर्मचारियों को चुनाव आयोग ने निलंबित किया है उनकी नौकरी नहीं जाएगी और उन्हें दूसरे काम में लगा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों का चुनाव संबंधी किसी भी कार्य से कोई संबंध नहीं होगा। लेकिन राज्य सरकार द्वारा उन्हें वैकल्पिक क्षेत्रों में नियुक्त किया जाएगा। मुझे विश्वास है कि वे वहां अच्छा काम करेंगे।
चुनाव आयोग की एकतरफा कार्रवाई से खफा ममता
सीएम ममता बनर्जी ने ईसीआई पर सात एईआरओ को एकतरफा रूप से निलंबित करने का आरोप भी लगाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें अपना पक्ष रखने का कोई मौका नहीं दिया गया। आयोग लगातार निर्वाचन अधिकारियों को धमका रहा है और राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप भी कर रहा है। मैं आयोग से अधिक लोकतांत्रिक तरीके से कार्य करने का अनुरोध करती हूं। हालांकि पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि सात एईआरओ को एसआईआर के लिए ईसीआई द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने के वास्तविक कारणों से निलंबित किया गया था।
ममता बनर्जी ने सुरक्षा में चूक का आरोप लगाया
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पिछले कुछ वर्षों में अपने कालीघाट आवास पर कई सुरक्षा उल्लंघनों का आरोप लगाया है, जिनमें कथित तौर पर हथियार लेकर परिसर में प्रवेश करने की घटनाएं भी शामिल हैं। विधानसभा चुनाव से पहले एबीपी आनंद को दिए एक साक्षात्कार में बनर्जी ने दावा किया कि कम से कम तीन से चार बार घुसपैठ के प्रयास हुए हैं। उन्होंने बताया कि एक बार एक व्यक्ति लोहे की छड़ लेकर परिसर में घुसा, जबकि दूसरी बार एक व्यक्ति कथित तौर पर बंदूक लेकर आया था। उन्होंने कहा कि जब भी कुछ होता है, तो कहा जाता है कि वह व्यक्ति मनोरोगी या मानसिक रूप से अस्थिर है। अभी तक कोई उचित जांच नहीं हुई है।
सीसीटीवी कैमरों से छेड़छाड़
हाल ही की एक घटना का जिक्र करते हुए बनर्जी ने आरोप लगाया कि करीब छह महीने पहले कालीघाट रोड पर लगे सीसीटीवी कैमरों से छेड़छाड़ की गई थी। उन्होंने दावा किया कि एक राजनीतिक दल, जो अक्सर उनके लिए परेशानी खड़ी करता है, के सदस्यों ने कैमरों को बंद करवाने के लिए लोगों को भेजा था। उनके अनुसार, स्थानीय निवासियों ने हस्तक्षेप किया और इसमें शामिल लोगों को पकड़ लिया। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें इस मामले में की गई किसी भी कार्रवाई की जानकारी नहीं है और उन्होंने पुलिस की ओर से लापरवाही का आरोप लगाया।
ममता बनर्जी और चुनाव आयोग आमने-सामने!

