आरएसएस के पूर्व कार्यकर्ता ने की संघ, विहिप और बजरंग दल को आतंकवादी संगठन घोषित करने की मांग

नई दिल्ली।(आवाज न्यूज़ ब्यूरो)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्व प्रचारक यशवंत सहदेव शिंदे ने कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर मांग की है कि आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल को ‘आतंकवादी संगठन’ घोषित किया जाए।
अपने पत्र में शिंदे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार और विहिप के महासचिव मिलिंद परांडे समेत कई वरिष्ठ नेताओं पर आरोप लगाते हुए कहा है कि 2000 के दशक में देश के अलग-अलग हिस्सों में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों में उनकी कथित भूमिका की ‘जांच की जाए और उन्हें गिरफ्तार किया जाए।’
अगस्त की शुरुआत में भेजा गया शिंदे का यह पत्र उनके कई वर्षों से चले आ रहे उस अभियान की ताजा कड़ी है, जिसमें वह 2000 के दशक में हुए कई बम विस्फोटों में हिंदुत्ववादी दक्षिणपंथ से जुड़े लोगों की कथित भूमिका के आरोप लगाते रहे हैं। इन मामलों की अदालतों और जांच एजेंसियों द्वारा जांच की गई थी, लेकिन आखिरकार आरोपियों को बरी कर दिया गया। शिंदे साल 1990 से पूर्णकालिक आरएसएस कार्यकर्ता थे। उनका कहना है कि संगठन से उनका संबंध तब खत्म हुआ, जब कथित तौर पर उन्हें ‘बम बनाने और प्रशिक्षण देने वाली टीम में शामिल होने’ के लिए कहा गया। अगस्त 2022 में महाराष्ट्र के नांदेड़ में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत के समक्ष दिए गए एक हलफनामे में शिंदे ने दावा किया था कि उन्होंने ऐसी बैठकों में हिस्सा लिया था, जिनमें आरएसएस और विहिप के सदस्यों, जिनमें वर्तमान विहिप महासचिव मिलिंद परांडे भी शामिल थे- ने देशभर में सिलसिलेवार बम विस्फोटों की कथित योजना बनाई थी। अपने हलफनामे में शिंदे ने दावा किया था कि 2003 में परांडे के मार्गदर्शन में करीब 20 अन्य लोगों के साथ उन्हें बम बनाने का प्रशिक्षण दिया गया था। यह हलफनामा अप्रैल 2006 के नांदेड़ विस्फोट मामले की उस समय चल रही सुनवाई के दौरान दाखिल किया गया था। इस घटना में कथित आरएसएस कार्यकर्ता लक्ष्मण राजकोंडवार के घर हुए विस्फोट में उनके बेटे नरेश और एक अन्य व्यक्ति हिमांशु पानसे की मौत हुई थी। हिमांशु पानसे के बारे में बताया गया था कि वह विहिप से जुड़ा हुआ था। सीबीआई ने इसे ‘बम तैयार करने की कार्रवाई’ बताया था और आशंका जताई थी कि इसका उद्देश्य औरंगाबाद की किसी मस्जिद को निशाना बनाना हो सकता था। शिंदे ने इस मामले में गवाह बनाए जाने की मांग की थी। तत्कालीन ट्रायल कोर्ट के न्यायाधीश एआर धमेजा ने शुरू में उनके हलफनामे पर विचार किया था, लेकिन अगली सुनवाई से पहले उनका अचानक तबादला हो गया। इसके बाद नए न्यायाधीश ने शिंदे की गवाह बनाए जाने की अर्जी खारिज कर दी। 4 जनवरी 2025 को नांदेड़ की एक अदालत ने मामले में जीवित बचे सभी नौ आरोपियों को बरी कर दिया। उस समय दिए गए कई साक्षात्कारों में शिंदे ने यह भी दावा किया था कि उन्हें पाकिस्तान में गुप्त अभियानों और भारत में ऐसे बम धमाकों के लिए प्रशिक्षण दिया गया था, जिन्हें बाद में ‘मुसलमानों के सिर मढ़ा जा सके।’ उनका आरोप था कि उनके साथ प्रशिक्षण लेने वाले कुछ लोगों ने 2003-04 में जालना, पूर्णा और परभणी में मस्जिदों में बम धमाके किए थे।
हालांकि सीबीआई की शुरुआती जांच में दावों का समर्थन करने के लिए मजबूत सबूत होने का दावा किया गया था, लेकिन जब ये मामले अदालत के सामने आए, तो मौजूदा भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार के तहत सभी मामलों में आरोपी बरी हो गए। आरएसएस और विहिप ने शिंदे द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर उनके पहली बार सामने आने के बाद से पिछले चार वर्षों में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। नांदेड़ अदालत द्वारा आरोपियों को बरी किए जाने के बाद विहिप ने इस फैसले को ‘कांग्रेस के मुंह पर करारा तमाचा’ बताया था। अलग से, अप्रैल 2026 में जब आरएसएस की तुलना अमेरिका के श्वेत वर्चस्ववादी संगठनों से किए जाने के बारे में सवाल पूछा गया था, तब आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने वॉशिंगटन में कहा था कि आरएसएस का ‘कू क्लक्स क्लान’ (केकेके) से कोई संबंध या समानता नहीं है। उन्होंने कहा था कि आरएसएस को अक्सर गलत तरीके से हिंदू वर्चस्ववादी या मुस्लिम विरोधी संगठन के रूप में पेश किया जाता है।
हाल के महीनों में कर्नाटक के गृहमंत्री प्रियंक खरगे ने भी आरएसएस को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मोहन भागवत को लिखे एक खुले पत्र में संगठन की कानूनी स्थिति, वित्तीय स्थिति, संगठनात्मक ढांचे और कर अनुपालन से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की थी। शिंदे का कहना है कि खरगे को भेजे गए उनके ताजा पत्र में उन्होंने अदालत के समक्ष पहले लगाए गए अपने आरोपों को ही दोहराया है। अपने पत्र में शिंदे ने अजमेर शरीफ दरगाह विस्फोट के संबंध में इंद्रेश कुमार पर भी आरोप लगाए हैं। उन्होंने कर्नल प्रसाद पुरोहित और पूर्व भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर का भी जिक्र किया है, जिन पर 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में मुकदमा चला और अंततः उन्हें बरी कर दिया गया। इसके अलावा शिंदे ने 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण, करगिल युद्ध, 2002 के गुजरात दंगों, 2019 के पुलवामा हमले और अनुच्छेद 370 को कमजोर किए जाने को लेकर भाजपा और आरएसएस के नेताओं पर कई अन्य आरोप भी लगाए हैं।
‘हिन्दी द वायर से साभार’(10.08.2026)