लखनऊ।(आवाज न्यूज़ ब्यूरो)। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। दोनों पूर्व सहयोगी अब राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बन गए हैं। अखिलेश यादव ने हाल ही में चवन्नी वाली टिप्पणी की थी। इस पर राष्ट्रीय लोक दल सुप्रीमो जयंत चौधरी ने अब तीखा पलटवार किया है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह टकराव अखिलेश यादव के चवन्नी वाले कटाक्ष को लेकर है। अखिलेश यादव ने हाल ही में एक कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा था, जाने कहां-कहां से आ गए थे लोग गठबंधन बनाने। यादव ने आगे कहा कि हमने चवन्नी का रुपया बना दिया था, तब भी हमें छोड़कर चले गए वो। उन्होंने किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया था। लेकिन उनकी यह टिप्पणी जयंत चौधरी के लिए मानी गई। यह 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान की बात है। तब जयंत चौधरी ने भाजपा की पेशकश को अस्वीकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि वह चवन्नी नहीं हैं जिसे आसानी से पलटा जा सके। अखिलेश ने यह भी कहा कि कई लोग सपा छोड़कर चले गए हैं। उनकी पार्टी ने जनता से जुड़ने का संकल्प लिया है। सपा सामाजिक न्याय स्थापित करने और लोगों पर भरोसा करने को प्रतिबद्ध है। यह विवाद 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सामने आया है। रालोद ने अखिलेश यादव के बयान को किसान नेता चौधरी चरण सिंह की विरासत का अपमान कहा। साथ ही जाट समुदाय का भी अपमान बताया गया है।
जयंत चौधरी का जवाब
शुक्रवार को रालोद के अध्यक्ष और केंद्री मंत्री जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें सस्ती राजनीतिक टिप्पणियां करनी थीं, तो कम से कम उनका नाम लेना चाहिए था। जयंत चौधरी ने एक्स पर एक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, अगर आपको कुछ सस्ते शब्द इस्तेमाल करने थे, तो कम से कम मेरा नाम लेकर कहते। जयंत चौधरी ने अपनी पोस्ट में जोड़ा, जाट समुदाय को निशाना बनाना और कहना कि हमने एबीसीडी सिखाई? उन्होंने यादव का नाम लिए बिना कहा कि ऐसा अहंकार केवल पतन लाता है। चौधरी ने कहा, मैं इस अहंकार को देख चुका हूं करीब से और मानता हूं ऐसा आचरण सिर्फ़ पतन लाता है! समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल ने 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव गठबंधन में लड़े थे। इस गठबंधन के तहत रालोद ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 33 सीटों पर चुनाव लड़ा था। पार्टी ने इनमें से आठ सीटों पर जीत हासिल की थी। यह रालोद के लिए एक बड़ी बढ़त थी। 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बहुत खराब रहा था। तब रालोद ने पूरे उत्तर प्रदेश में 277 सीटों पर चुनाव लड़ा था। लेकिन पार्टी को सिर्फ एक सीट पर जीत मिली थी।
अखिलेश यादव ने अपनी टिप्पणी से संकेत दिया कि सपा के साथ गठबंधन ने रालोद को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खोई हुई जमीन वापस पाने में मदद की थी। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले जयंत चौधरी ने भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल होने का फैसला किया। वह वर्तमान में केंद्र सरकार में मंत्री हैं।
रालोद की तीखी प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश के मंत्री और रालोद नेता अनिल कुमार ने यादव के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे अत्यधिक आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। अनिल कुमार ने आरोप लगाया कि यह टिप्पणी केवल जयंत चौधरी का अपमान नहीं है। यह चौधरी चरण सिंह की विचारधारा और पूरे किसान समुदाय का भी अपमान है। कुमार ने कहा, समाजवादी पार्टी के नेताओं को यह नहीं भूलना चाहिए। आज समाजवादी पार्टी के राजनीतिक अस्तित्व में चौधरी चरण सिंह परिवार का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि किसान समुदाय 2027 के विधानसभा चुनाव में इस कथित अपमान का लोकतांत्रिक जवाब देगा।
अखिलेश की चवन्नी टिप्पणी पर जयंत चौधरी: ये जाट समुदाय का अपमान-ऐसा अहंकार केवल पतन लाता है
