नई दिल्ली।(आवाज न्यूज़ ब्यूरो)। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रसन्ना वराले ने मराठी मीडियम स्कूलों के बंद होने, आश्रम स्कूलों में सुविधाओं की कमी, फर्श पर सोने को मजबूर छात्राओं की दुखद मौतों और महाराष्ट्र में एजुकेशन बजट में कम बढ़ोतरी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि एजुकेशन पर ज़्यादा खर्च करने से कई स्कूलों को बंद होने से बचाया जा सकता था। सोमवार को धुले में एक स्कूल के इवेंट में अपने भाषण के दौरान, जस्टिस वराले ने कहा कि अगर कुंभ मेले, कॉरिडोर और अलग-अलग डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के लिए रखे गए हज़ारों करोड़ रुपये का 0.1 परसेंट भी स्कूलों पर खर्च किया जाता, तो 100 से 150 मराठी स्कूल बंद नहीं होते। जस्टिस वराले ने कहा, एक बात मुझे समझ आई कि एक तरफ, हमारी सरकार दावा करती है कि वह अलग-अलग कामों के लिए भारी फंड देगी।
डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स पर हजारों करोड़ रुपये खर्च
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने कुंभ मेले के लिए 34,000 करोड़ रुपये देने की बात कही। फिर मैंने कहीं खबर पढ़ी कि एक कॉरिडोर पर 11,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार अलग-अलग डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स पर हज़ारों करोड़ रुपये खर्च कर रही है। उन्होंने आगे कहा, मुझे इस पर कोई एतराज़ नहीं है। लेकिन, अगर इन हज़ारों करोड़ रुपये का सिर्फ़ 0.1 परसेंट- यानी लगभग 32 करोड़ रुपये स्कूलों पर खर्च किया गया होता, तो राज्य में बंद हुए 100 से 150 मराठी स्कूल अभी भी चल रहे होते।
मराठी स्कूल बंद होने पर जस्टिस प्रसन्ना ने जताई चिंता
जस्टिस ने कहा कि अगर मराठी स्कूल बंद होते रहे, तो यह बहुत चिंता की बात है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन मुद्दों को सामने लाने से सुधार होगा। उन्होंने यह भी कहा कि आश्रम स्कूल में सही सुविधाओं की कमी के कारण, छात्राओं को फ़र्श पर सोने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो मराठी को अपनी पहली भाषा के तौर पर पढ़ने वाले बहुत सारे छात्र फेल हो जाएंगे, और इस हालात को बदलने की ज़रूरत है।
छात्रों को खुले और आज़ाद माहौल में पढ़ने की इजाज़त हो
उन्होंने कहा, मैं आम बातों से हटकर बात कर रहा हूं, लेकिन मेरा मकसद स्कूलों को बेहतर बनाने की कोशिशों को सपोर्ट करना है। अगर कोई स्कूलों को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है और ऐसे सुझाव दे रहा है, तो उनका स्वागत किया जाना चाहिए। मैं शिक्षा मंत्री का स्वागत करता हूं। जस्टिस ने यह कहते हुए अपनी बात खत्म की कि छात्रों को खुले और आज़ाद माहौल में पढ़ने की इजाज़त मिलनी चाहिए। उन्हें अच्छे क्लासरूम, अच्छे टीचर, साफ़ टॉयलेट और साफ़ पानी मिलना चाहिए। पढ़ाई और करियर पर ध्यान देने के साथ-साथ बच्चों को दूसरी स्किल्स भी सीखनी चाहिए। उन्होंने माता-पिता से अपील की कि वे अपने बच्चों को मौके दें और उन्हें अपनी पसंद और शौक बढ़ाने दें, जिससे स्टूडेंट्स को पढ़ाई की अहमियत के बारे में प्रेरणा मिले।
स्कूलों की बदहाली पर बोले एससी जस्टिस प्रसन्ना वराले: कुंभ के बजट का 0.1ः भी मिलता तो हालात बदल जाते
