880 मेडिकल दुकानों और दवा फैक्ट्रियों पर एफडीए की बड़ी कार्यवाही: नियम तोड़ने पर 203 लाइसेंस रद्द

‘‘11.41 करोड़ का माल जब्त’’
नई दिल्ली।।(आवाज न्यूज ब्यूरो)   महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने राज्य भर में मिलावटी और अवैध दवाओं के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा अभियान चलाया है। एफडीए ने जून और अगस्त के बीच 880 दवा बनाने और बेचने वाली जगहों के खिलाफ कार्रवाई की और 11.41 करोड़ रुपये की अवैध दवाएं और कॉस्मेटिक्स ज़ब्त किए। एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंडे के पद संभालने के बाद से राज्य में खाद्य सुरक्षा और दवाओं की क्वालिटी सुनिश्चित करने के लिए नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यवसायों पर शिकंजा कसा जा रहा है।
विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन महीनों में एफडीए की टीमों ने कुल 2,902 ठिकानों पर छापेमारी और जांच की। जिसमें से 607 दवा बनाने वाली फैक्ट्रियों और 2,295 मेडिकल स्टोर्स का निरीक्षण किया गया। और वहीं नियम तोड़ने वाली 140 निर्माण इकाइयों और 740 दवा विक्रेताओं पर गाज गिरी। विभाग ने 677 दुकानों व फैक्ट्रियों के लाइसेंस सस्पेंड (निलंबित) किए, जबकि 203 लाइसेंस पूरी तरह से रद्द कर दिए। कुल 104 सर्च-एंड-सीजर ऑपरेशन चलाए गए, 20 एफआईआर दर्ज की गईं और 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया। ज़ब्त किए गए सामान की कीमत 11.41 करोड़ रुपये थी। एफडीए ने कहा कि पिछले फाइनेंशियल ईयर में 13.64 करोड़ रुपये का सामान ज़ब्त किया गया था। एफडीए की टीमों को छापेमारी के दौरान गंभीर खामियां देखने को मिलीं। बिना उचित क्वालिटी-कंट्रोल और रिकॉर्ड के घटिया दवाएं बनाई जा रही थीं। इसके अलावा मेडिकल स्टोरों पर बिना रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट के ही दवाएं बेची जा रही थीं। अधिकारियों को बिना बिल के दवाएं बेचे जाने, बिना प्रिस्क्रिप्शन के शेड्यूल वाली दवाएं दिए जाने, एक्सपायर हो चुकी दवाओं को गलत तरीके से रखने और इंसुलिन और वैक्सीन जैसे तापमान-संवेदनशील उत्पादों को गलत तरीके से स्टोर करने के मामले भी मिले। एफडीए के अनुसार, शिकायतों में 557 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि शिकायतों की जांच में 378 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सर्च-एंड-सीज़र ऑपरेशन 217 प्रतिशत बढ़े और ज़ब्त किए गए सामान की कीमत में 234 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
एफडीए प्रमुख तुकाराम मुंडे ने कहा, नागरिकों के लिए सुरक्षित, अच्छी क्वालिटी वाली और नियमों के तहत आने वाली दवाएं सुनिश्चित करना फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि नियमों का पालन करने वाले प्रतिष्ठानों को सहयोग दिया जाएगा, जबकि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।