रैम्प योजना के तहत एंटरप्राइज एक्सीलरेशन कार्यक्रम का भव्य आयोजन
बृजेश चतुर्वेदी
कन्नौज।(आवाज न्यूज ब्यूरो) । आज सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय, भारत सरकार के स्वायत्तशासी संस्थान सुगन्ध एवं सुरस विकास केन्द्र (एफएफडीसी), कन्नौज में “एमएसएमई फ्रैग्रेस एवं फ्लेवर मीट” तथा रैम्प योजनांतर्गत “एंटरप्राइज एक्सीलरेशन इन द एसेंशियल ऑयल्स, फ्रैग्रेस एवं फ्लेवर सेक्टर” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि कतिकीथला श्रीनिवास (आईएएस), सचिव, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय, भारत सरकार, विशिष्ट अतिथि अंशुमान डे, संयुक्त सचिव, विशाल गंजू, कार्यकारी निदेशक, केमेक्सिल, विजय प्रकाश, वरिष्ठ महाप्रबंधक, नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन, लखनऊ संयोगिता कराना, संयुक्त निदेशक, कार्यालय विकास आयुक्त, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, योगेश दुबे, अध्यक्ष, अरोमा फेडरेशन ऑफ इंडिया एवं फ्रैगरेन्सेस एवं फ्लेवर्स एसोसिएशन ऑफ इण्डिया, डॉ० रोहित सेठ, अध्यक्ष, सुगन्ध व्यापार संघ दिल्ली, पवन त्रिवेदी, अध्यक्ष, अतर्स एवं परफ्यूमर्स एसोसिएशन, कन्नौज आशीष झुनझुनवाला, उपाध्यक्ष, एसेन्सियल ऑयल एसोसिएशन ऑफ इण्डिया, नोएडा तथा मंच पर उपस्थित गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। एफएफडीसी के निदेशक शक्ति विनय शुक्ल द्वारा मुख्य अतिथि एवं अन्य अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर आत्मीय स्वागत किया गया।
इसके पश्चात् एफएफडीसी के निदेशक शक्ति विनय शुक्ल ने अपने स्वागत उद्बोधन में एमएसएमई फ्रैग्रेंस एवं फ्लेवर मीट तथा रैम्प योजना के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने संस्थान द्वारा अगरबत्ती, धूपबत्ती, सुगन्धित तेल एवं इत्र उद्योग के संवर्धन, आधुनिक गुणवत्ता परीक्षण और युवा उद्यमियों के कौशल विकास हेतु चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी दी।
एमएसएमई विकास आयुक्त कार्यालय (नई दिल्ली) की संयुक्त निदेशक संयोगिता कराना ने अपने सम्बोधन में कहा कि मंत्रालय का मुख्य उद्देश्य इत्र व सगंध क्षेत्र से जुड़े एमएसएमई उद्योगों की जमीनी समस्याओं को समझना और उद्योग, सरकार व नए उद्यमियों के साझा समन्वय से उनका समाधान निकालना है। नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन (एनएसआईसी), लखनऊ के वरिष्ठ महाप्रबंधक विजय प्रकाश ने एमएसएमई इकाइयों के पंजीकरण से लेकर मार्केटिंग एवं डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) तक भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी।
केमेक्सिल के कार्यकारी निदेशक विशाल गंजू ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय सुगन्ध उत्पादों की बढ़ती मांग, ब्रांडिंग एवं वैश्विक निर्यात संवर्धन पर जोर दिया। सुगंध व्यापार संघ, दिल्ली के अध्यक्ष डॉ० रोहित सेठ तथा इसेंशियल ऑयल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष आशीष झुनझुनवाला ने भी भारतीय सुगंध क्षेत्र के आधुनिकीकरण एवं निर्यात विस्तार पर अपने विचार रखे।
अतर्स एवं परफ्यूमर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन त्रिवेदी ने कन्नौज के 5000 वर्षों के गौरवशाली इत्र इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इत्र हमारी प्राचीन ऋषि परंपरा और प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़ा रहा है। एफएफडीसी की सहायता से कन्नौज को जी०आई० टैग प्राप्त है और यहाँ 400 से अधिक इकाइयाँ कार्यरत हैं। उन्होंने युवा उद्यमियों को आधुनिक पैकेजिंग, निरंतर शोध और शासन की योजनाओं का लाभ उठाकर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए प्रेरित किया।
अरोमा फेडरेशन ऑफ इंडिया एवं फ्रैगरेन्सेस एवं फ्लेवर्स एसोसिएशन ऑफ इण्डिया के अध्यक्ष योगेश दुबे ने उद्यमियों व युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि कन्नौज और भारत में प्रतिभा व संसाधनों की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल सही दिशा, दृढ़ संकल्प और गुणवत्ता नियंत्रण की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरने के लिए उद्यमियों को सिंगल-माइंडेड फोकस के साथ मिलावटरहित शुद्ध उत्पाद तैयार करने होंगे। उन्होंने गोबर से प्राकृतिक अगरबत्ती, नागरमोथा व खस की वैज्ञानिक खेती का उदाहरण देते हुए किसानों और उद्योग जगत के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का आह्वान किया।
पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव अंशुमान डे ने अपने सम्बोधन में देश के एमएसएमई व स्टार्टअप्स के लिए क्रेडिट, आधुनिक तकनीक और सस्टेनेबल सोर्सिंग के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज का वैश्विक उपभोक्ता उत्पादों की ट्रेसेबिलिटी और इकोसिस्टम के प्रति जागरूक है। उन्होंने पूर्वोत्तर के अगरवुड का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि किसानों को मूल्य-श्रृंखला में उचित लाभांश मिलना चाहिए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कतिकीथला श्रीनिवास (आईएएस), सचिव, भारत सरकार ने अपने प्रेरणादायी सम्बोधन में उपस्थित उद्यमियों, शोधार्थियों और देशभर से आए स्टार्टअप्स का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के यही समय है, सही समय है के विजन के साथ भारत तीव्र गति से विकास की राह पर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि भारत के पास विशाल भूमि और असीम प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग कर हम अपने फ्रैग्रेस व फ्लेवर उद्योग को वैश्विक स्तर पर कई गुना बढ़ा सकते हैं। उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों की समृद्ध जैव विविधता और ऑर्गेनिक खेती का उल्लेख करते हुए कन्नौज के पारंपरिक इत्र उद्योग को पूर्वोत्तर के प्राकृतिक संसाधनों से जोड़ने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों (महाराष्ट्र, तेलंगाना, केरल, मिजोरम आदि) से आए युवा व महिला उद्यमियों और 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्ति के बाद नया स्टार्टअप शुरू करने वाले उद्यमियों की विशेष सराहना की।
उद्घाटन सत्र के उपरांत मुख्य अतिथि एवं गणमान्य अतिथियों द्वारा संस्थान के आधुनिक परीक्षण प्रयोगशालाओं, प्रोसेसिंग इकाइयों तथा एक्सपो (प्रदर्शनी) का भ्रमण किया गया। इस कार्यक्रम में देश-विदेश से लगभग 200 से अधिक प्रतिभागियों, उद्यमियों, उद्योग प्रतिनिधियों तथा नवोदित उद्यमियों ने भाग लिया।
सत्र के दौरान एफएफडीसी द्वारा संचालित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों के प्रतिभागियों एवं स्टार्टअप्स ने अपने विचार साझा किए। इनमें मिजोरम से आई उद्यमी सुश्री सँगपुई (एसेंशियल ऑयल शोधार्थी), ओमान से आए अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागी अहमद, हैदराबाद से मंदिर के पुष्पों से अगरबत्ती व धूप निर्माण करने वाले स्टार्टअप “पफो ऑर्गेनिक्स’, ठाणे व मुंबई (महाराष्ट्र) से आई महिला उद्यमी दल (गोबर व प्राकृ तिक घटकों से धूपबत्ती निर्माण), केरल के अगरवुड उत्पादक, तथा मध्य प्रदेश, तमिलनाडु व उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए नवोदित उद्यमी शामिल रहे।
दोपहर के तकनीकी सत्रों में शक्ति विनय शुक्ल (निदेशक, एफएफडीसी) ने फ्रैग्रेस एवं फ्लेवर क्षेत्र में व्यापारिक संभावनाएं तथा एफएफडीसी की भूमिका विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। द्वितीय सत्र में आशीष झुनझुनवाला के संयोजन में नए उद्यमियों हेतु अवसरों पर तथा तृतीय सत्र में डॉ० रोहित सेठ के संयोजन में मानकीकरण, डिजिटल कॉमर्स एवं निर्यात चुनौतियों पर विस्तृत पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं।
कार्यक्रम के अंत में एफएफडीसी के सहायक निदेशक ए० पी० सिंह द्वारा मुख्य अतिथि, मंचस्थ विशिष्ट अतिथियों, देश-विदेश से आए प्रतिभागियों, मीडिया बंधुओं एवं उद्योग प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में एफएफडीसी के उप निदेशक डॉ० नदीम अकबर सहित समस्त अधिकारियों व वैज्ञानिकों का सराहनीय योगदान रहा।
