शिक्षित वर्ग में जातीय पूर्वाग्रह का स्थायित्व

संविधान ने समानता और सामाजिक न्याय के आदर्शों को स्थापित किया, परंतु भारतीय समाज में जाति चेतना अभी भी गहराई से विद्यमान है। शिक्षित और शहरी वर्गों में यह चेतना प्रत्यक्ष भेदभाव के बजाय सूक्ष्म रूपों में प्रकट होती है—जैसे रोजगार, विवाह और सामाजिक नेटवर्क में। आर्थिक प्रगति और आधुनिकता ने जाति को कमजोर किया…

नवाब बंगश वेलफेयर सोसाइटी की कार्यकारिणी गठित : काजिम हुसैन फिर बने अध्यक्ष

फर्रुखाबाद।(आवाज न्यूज ब्यूरो)।  नवाब मोहम्मद खान बंगस वेलफेयर सोसाइटी की बैठक बारादरी स्थित संस्था के कार्यालय प्रांगण में हुई जिसमें समिति की नई कार्यकारिणी का सर्व सम्मति से गठन किया गया।बैठक में सर्वसम्मति से नवाब काजिम हुसैन बंगस को अध्यक्ष अनीश अहमद खान एडवोकेट को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, एडवोकेट सलीम राजा को महासचिव वसीमुज्ज्जमा खां को…

काकोरी के मंदिर में दलित के साथ अभद्र बर्ताव पर सत्याग्रह करेंगे सपा सांसद अवधेश प्रसाद

लखनऊ।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। रामनगरी अयोध्या में रविवार को प्रेसवार्ता करके सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने भाजपा सरकार को घेरा। कहा कि लखनऊ में काकोरी के एक मंदिर में दलित के साथ आरएसएस व भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए अभद्र बर्ताव के विरोध में सत्याग्रह करेंगे। इसका एलान 16 नवंबर को शहीद ऊदा देवी पासी की…

छठ महापर्व  : धर्म से अधिक, समाज और संस्कृति का पर्व

छठ महापर्व केवल सूर्य की उपासना नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, स्त्री-सशक्तिकरण, पर्यावरणीय चेतना और पारिवारिक एकता का प्रतीक है। यह पर्व हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखता है, कारीगरों और ग्रामीण जीवन को सम्मान देता है और समानता का संदेश फैलाता है। आधुनिकता के युग में भी इसकी सादगी और अनुशासन भारतीय समाज की आत्मा…

बचपन बिक रहा है : बच्चों से भीख मंगवाना एक सामाजिक अपराध

“मासूम बच्चों का शोषण सिर्फ गरीबी का परिणाम नहीं, बल्कि समाज और व्यवस्था की बड़ी विफलता है।” मासूम बच्चों का शोषण समाज की गंभीर समस्या बन चुका है। भीख मंगवाना केवल गरीबी का नतीजा नहीं, बल्कि बच्चों की मासूमियत का फायदा उठाने वाला व्यवस्थित व्यवसाय है। लोग दया के भाव में पैसा देते हैं, जबकि…

त्योहारों से आगे की सच्चाई : भारतीय शहरों में वायु प्रदूषण सालभर का संकट

(भारत में वायु प्रदूषण को प्रायः दिवाली या सर्दियों की समस्या माना जाता है, जबकि यह एक सतत और संरचनात्मक चुनौती है, जिसे दीर्घकालिक दृष्टिकोण और नागरिक सहभागिता से ही हल किया जा सकता है।)  भारत के अधिकांश शहरों में वायु प्रदूषण को गलत रूप से एक मौसमी या त्योहार-केन्द्रित समस्या समझा जाता है। दिवाली…

जनरेशन अल्फ़ा की बेचैन बुद्धिमत्ता

“मुझे नियम पता हैं, कृपया उन्हें समझाना शुरू मत कीजिए” आज के बच्चों की आँखों में ज्ञान की नहीं, प्रतिक्रिया की चमक है। वे सुनना नहीं चाहते, क्योंकि हमने उन्हें सुना ही नहीं। “मुझे नियम पता हैं, कृपया उन्हें समझाना शुरू मत कीजिए” – यह वाक्य केवल एक बाल संवाद नहीं, बल्कि आधुनिक पालन-पोषण की…

बदलते समय में भाई दूज : प्रेम और अपनापन कैसे बना रहे

> “त्योहार अब सिर्फ़ रस्म नहीं, रिश्तों की परीक्षा बनते जा रहे हैं — सवाल यह है कि क्या हमारे दिलों में अब भी वही स्नेह बचा है?” भाई दूज सिर्फ़ तिलक और मिठाई का त्योहार नहीं, बल्कि रिश्तों की वह डोर है जो समय की रफ़्तार में भी स्नेह का रंग बनाए रखती है।…

पराली जलाने की आग में झुलसता उत्तर भारत : समाधान किसानों और पर्यावरण दोनों के हित में

हर वर्ष अक्टूबर–नवंबर के महीनों में पंजाब और हरियाणा के खेतों से उठने वाला धुआँ दिल्ली सहित पूरे उत्तर भारत की साँसें रोक देता है। पराली जलाना किसानों की विवशता और नीतिनिर्माताओं की विफलता दोनों का परिणाम है। जब तक किसान के हित, कृषि की आवश्यकताएँ और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़कर देखा नहीं…

यू.पी. ट्रेड मेले में कवि सम्मेलन : स्वदेशी की गूंज

फर्रुखाबाद । (आवाज न्यूज ब्यूरो)। नगर के क्रिश्चियन इंटर कॉलेज ग्राउंड पर आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियानके अंतर्गत आयोजित स्वदेशी मेले में कवि सम्मेलन का वरिष्ठ कवि नलिन श्रीवास्तव की अध्यक्षता में हुआ।संचालन युवा कवि वैभव सोम वंशी ने किया।कार्यक्रम में वरिष्ठ कवि संतोष पांडेय, महेश पाल सिंह उपकारी, उपकार मणि उपकार, प्रांशु पांडेय ने काव्य पाठ…