मजदूरों का भारत : शोषण के साए में खड़ा विकास

“जिन हाथों ने इस देश की इमारतें खड़ी कीं, उन्हीं हाथों को आज रोटी, छत और पहचान के लिए जूझना पड़ रहा है। दिहाड़ीदार मजदूर केवल श्रम नहीं देते, वे इस देश की नींव हैं — लेकिन सबसे उपेक्षित भी। विकास की रफ्तार में उनका पसीना झलकता है, पर उनकी आवाज़ नहीं सुनाई देती। क्या…

स्वतंत्र स्त्री का भय : हिंदी साहित्य का अपच

“हिंदी साहित्य की आँख में किरकिरी: स्वतंत्र स्त्रियाँ” हिंदी साहित्य जगत को असल स्वतंत्र चेता प्रबुद्ध स्त्रियां अभी भी हजम नहीं होती। उन्हें वैसी ही स्त्री लेखिका चाहिए जैसा वह चाहते हैं। वह सॉफ्ट मुद्दों पर लिखे, परिवार, समाज, कुछ मनोविज्ञान, स्त्री-पुरुष संबंध। आधुनिकता का या आधुनिक स्त्री का पर्याय उनके लिए वह है कि…

वन्य जीवों और पेड़ों के लिए अपनी जान पर खेलता बिश्नोई समाज

बिश्नोई समाज राजस्थान का एक अनूठा समुदाय है जो सदियों से पेड़-पौधों और वन्य जीवों की रक्षा में अपना जीवन समर्पित करता आया है। यहां की महिलाएं घायल हिरणों को अपने बच्चों की तरह पालती हैं। 1730 में खेजड़ली गांव में अमृता देवी और 363 बिश्नोईयों ने पेड़ों की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर…

माटी की खुशबू में रची-बसी एक मंडप छह शादियाँ

आंगन में खिलती छह ख़ुशियाँ: किसान राजेश के बच्चों की अनूठी शादी की कथा हरियाणा के हिसार में, गावड़ गांव — “माटी की खुशबू में रची-बसी एक मंडप छह शादियाँ” नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। धूप की तपती किरणों के बीच, खेतों में लहलहाती फसलों के बीच, मिट्टी की सौंधी गंध में रची-बसी एक कहानी जन्म…

ढाणी बीरन की चौपाल से उठी नई सुबह : हरियाणा के एक गांव ने बेटियों-बहुओं को घूंघट से दी आज़ादी

> “परंपरा तब तक सुंदर है, जब तक वह पंख न काटे। घूंघट हटा, तो सपनों ने उड़ान भरी।” > “जहां घूंघट गिरा, वहां सिर ऊंचे हुए। ढाणी बीरन से उठी हौसलों की एक नई फसल।” हरियाणा के ढाणी बीरन गांव ने एक ऐतिहासिक पहल करते हुए बहू-बेटियों को घूंघट प्रथा से मुक्ति दिलाने का…

UPSC टॉपर या जाति टॉपर? : प्रतिभा गुम, जाति और पृष्ठभूमि का बाज़ार गर्म। 

देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा अब जातीय गौरव का तमाशा बन चुकी है। जैसे ही रिज़ल्ट आता है, प्रतिभा और मेहनत को धकिया कर जाति, धर्म और ‘किसान की झोपड़ी’ की स्क्रिप्ट सोशल मीडिया पर दौड़ने लगती है। एसी कमरों में पढ़ने वाले अब खुद को किसान का बेटा घोषित करते हैं, ताकि संघर्ष बिके।…

टीवी पर लाहौर जीत लिया, ज़मीन पर आँसू बहा दिए

— जब राष्ट्रवाद स्क्रीन पर चमकता है और असली ज़िंदगी में धुंधला पड़ जाता है।  न्यूज़ चैनल राष्ट्रवाद को एक स्क्रिप्टेड तमाशे की तरह पेश करते हैं। रात में टीवी पर ऐसा माहौल बनाया जाता है मानो भारत ने पाकिस्तान पर हमला कर दिया हो, लेकिन असलियत में कुछ नहीं होता। मीडिया, फिल्मों और चुनावी…

राजनीति की रंगमंचीय दुश्मनी और जनता की असली बेवकूफी

नेताओं की मोहब्बत और जनता की नादानी कभी किरण चौधरी और शशि थरूर मंचों पर एक-दूसरे के खिलाफ़ खड़े होते हैं, कभी हिंदू-मुस्लिम के नाम पर पार्टियों की नीतियाँ बँटती हैं, और इसी बीच पिसती है आम जनता। क्या हमने कभी सोचा कि ये नेता तो एक-दूसरे से हाथ मिलाते हैं, कार्यक्रमों में एक-दूसरे की…

कन्नौज : डॉ. अम्बेडकर के सम्मान में आयोजित जनसभा में पहलगाम के शहीदों को श्रद्धांजलि

बृजेश चतुर्वेदी कन्नौज।(आवाज न्यूज ब्यूरो)  आज डॉ भीमराव अंबेडकर चिकित्सा महाविद्यालय तिर्वा  में आयोजित संविधान निर्माता भारत रत्न बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर “सम्मान सभा “ कार्यक्रम का आयोजन जिला अध्यक्ष वीर सिंह भदौरिया की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश सरकार में मंत्री रजनी तिवारी वही विशिष्ट अतिथि…

 धर्म पर नहीं, मानवता पर चली थीं पहलगाम की गोलियाँ : प्रियंका सौरभ

नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुआ आतंकी हमला सिर्फ एक गोलीबारी नहीं थी—यह एक ऐसा खौफनाक संदेश था जिसमें गोलियों ने धर्म की पहचान पूछकर चलना शुरू किया। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो आतंकियों ने पहले पर्यटकों से उनका धर्म पूछा, फिर उन्हें जबरन कलमा पढ़ने के लिए कहा, और…