गटर में उतरती इंसानियत : सफाईकर्मियों की मौतें बताती हैं कि जातिवाद आज भी जिंदा है

 डॉ. प्रियंका सौरभ  नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। भारत के शहर आज दो तस्वीरों में बँटे हुए दिखाई देते हैं। एक तस्वीर चमचमाती सड़कों, स्मार्ट सिटी योजनाओं, बड़े-बड़े मॉल और स्वच्छता अभियानों की है, जबकि दूसरी तस्वीर कूड़े के ढेरों, बदबूदार नालियों, उफनते सीवरों और उनमें उतरते इंसानों की है। दुर्भाग्य यह है कि दूसरी तस्वीर को…

पढ़ाई बढ़ी… लेकिन स्किल क्यों नहीं बढ़ी?

– डॉ. सत्यवान सौरभ नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। आज का समाज एक अजीब विरोधाभास के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ शिक्षा का स्तर पहले से कहीं अधिक ऊँचा दिखाई देता है—हर घर में बच्चे पढ़ रहे हैं, कोचिंग, ऑनलाइन क्लासेस और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हैं, और परिणामस्वरूप अंक भी लगातार बेहतर…

ससुराल से दूरी और पति पर पकड़ क्यों?

(विवाह में सियासत बंद करो, साझेदारी का समय आ गया)  – डॉ. प्रियंका सौरभ नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। शादी कोई सत्ता-संघर्ष नहीं, बल्कि दो व्यक्तियों के बीच भरोसे, सम्मान और जिम्मेदारी का रिश्ता है। लेकिन हमारे समाज में कई बार विवाह को साझेदारी के बजाय नियंत्रण का खेल बना दिया जाता है, जहाँ एक पक्ष…

पत्रकारिता केवल माइक या कैमरे का खेल नहीं

हर हाथ में माइक, हर आवाज़ पत्रकार नहीं (व्यूज़ के खेल में तथ्यहीन रिपोर्टिंग से कमजोर होता जनविश्वास) — डॉ. प्रियंका सौरभ नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। आज के डिजिटल युग में सूचना का प्रवाह पहले से कहीं अधिक तेज़ और व्यापक हो चुका है। स्मार्टफोन और सस्ते इंटरनेट ने हर व्यक्ति को अभिव्यक्ति का मंच…

बारात, संस्कार और बदलता समाज

— डॉ. प्रियंका सौरभ नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। एक समय था जब बारात का आना केवल एक परिवार का दूसरे परिवार तक पहुँचना नहीं, बल्कि पूरे गाँव का उत्सव माना जाता था। घर-आँगन सजते थे, पंगत लगती थी, गीत गाए जाते थे, बुज़ुर्ग आशीर्वाद देते थे और मेहमानों की आवभगत को सम्मान का प्रश्न समझा जाता…

पीएचडी : उपाधि नहीं, ज्ञान-सृजन की निरंतर यात्रा

– डॉ. प्रियंका सौरभ नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। आज के समय में पीएचडी (Doctor of Philosophy) को लेकर समाज में अनेक धारणाएँ प्रचलित हैं। कुछ लोग इसे केवल “डिग्री” मानते हैं, कुछ इसे नौकरी पाने का साधन समझते हैं, जबकि कुछ इसे प्रतिष्ठा का प्रतीक मान बैठते हैं। सोशल मीडिया पर भी समय-समय पर ऐसे…

आरक्षण की बहस—समान अवसर, सामाजिक न्याय और बदलते समय की चुनौती

– डॉ. सत्यवान सौरभ नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। भारत में आरक्षण पर बहस कोई नई नहीं है, लेकिन समय-समय पर यह मुद्दा नई परिस्थितियों और घटनाओं के कारण फिर से केंद्र में आ जाता है। हाल के दिनों में उच्च शिक्षा और संस्थागत नीतियों को लेकर University Grants Commission (UGC) से जुड़े विवादों ने इस चर्चा…

उच्च शिक्षा में ‘मार्केट फॉर लेमन्स’ डॉ. प्रियंका सौरभ

नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। भारत में उच्च शिक्षा का तीव्र विस्तार अवसरों के साथ-साथ गंभीर चुनौतियाँ भी लेकर आया है। एक ओर विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और निजी शिक्षण संस्थानों की संख्या तेजी से बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर गुणवत्ता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर लगातार प्रश्न उठ रहे हैं। ऐसे समय में अर्थशास्त्री जॉर्ज अकेलॉफ का ‘मार्केट…

एक देश, एक पाठ्यक्रम : संघीयता का संकट या शिक्षा क्रांति?

— डॉ. सत्यवान सौरभ नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। “रुकने वालों का इतिहास नहीं होता। एक देश–एक पाठ्यक्रम… शिक्षा के नाम पर लूट का विरोध जारी रहना चाहिए।” यह वाक्य आज भारतीय शिक्षा व्यवस्था में चल रहे सबसे बड़े विमर्श को सटीक रूप से सामने रखता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अंतर्गत प्रस्तावित “एक…

क्यों बीमा से दूर है आम भारतीय?— डॉ. सत्यवान सौरभ

नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। भारत आज दुनिया की सबसे तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है। ऊंची विकास दर, डिजिटल क्रांति, बढ़ती आय और वैश्विक मंच पर मजबूत होती स्थिति—ये सब संकेत देते हैं कि देश आर्थिक रूप से आगे बढ़ रहा है। लेकिन इस चमकदार तस्वीर के पीछे एक सच्चाई ऐसी भी है, जो अक्सर…