फर्रूखाबाद।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। आदरणीय अन्नदाता साथियों,,,विकास होना अच्छी बात है,लेकिन विकास के नाम पर जमीन की लूट का मैं कतई पक्षधर नहीं हूं,,,,विचार करे फरूखाबाद आईटीआई में किसकी जमीन गयी,राजकीय पालिटेकिनक भोलेपुर में किसकी जमीन गयी,,,आवास विकास फरूखाबाद में किसकी जमीन गयी????अब विचार करें,जिन परिवारों की जमीन गयी उन परिवारों को यहां संचालित योजनाओं का कितना लाभ मिला?इन परिवारों को कितना मुआवजा मिला?उस मुआवजे से इन परिवारों का कितना विकास हुआ!यह भी विचार योग्य है कि यह परिवार आज किस स्थित में हैं,क्या अभी भी कई परिवारों का मुआवजा बकाया है और लोग अदालतों के चक्कर लगाने को विवश है,,,क्या आवास विकास के नाम पर सरकार सस्ती में जबरिया भूमि अधिग्रहण कर मंहगे में जमीन बेंच कर धंधा नही कर रही है और इस धंधे से मूल निवासियों को क्या कुछ फायदा हो रहा है,
अब पुनः धंसुआ,विजाधरपुर पपियापुर,टिकुरियननगला,उगायतपुर,नगला कलार,देवरामपुर,निनौआ,कीरतपुर,रम्पुरा,बुढनामऊ,नगला पजावा,जगतनगर,याकूतगंज सहित इकसठ गांवों के किसानों,मूल वासिंदो की जमीन पर गिद्ध द्रष्टि है,इन गांव की भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र,आवास विकास,फरूखाबाद विकास प्राधिकरण सहित अन्य योजनाओं में भुमि अधिग्रहण की कार्यवाही फरुखाबाद महायोजना 2031 की मंजूरी के बाद अमल में लाना शुरु हो गया है,ग्रीन बेल्ट के लिए आरक्षित भूमि पर न किसान कोई निर्माण कर सकता है और न ही इस भूमि का कोई मुआवजा किसान को मिले गा,अन्य अधिग्रहित भूमि का कितना मुआवजा मिले गा इसकी जानकारी भी किसान को नहीं मिल पा रही है,किसान की जमीन लूटने के तंत्र में सरकार के साथ नेता,अफसर,का भी मौन सहयोग रहता है क्योकि जब कुछ लुटे गा तभी तो कुछ बटे गा,“एक रहेंगे तो शेफ रहें गे“ का बिचार किसानों को मजबूती देता है,हम सब मूल निवासी मिल कर इस संकट का बेहतर मुकाबला व इलाज कर सकते हैं,बिचार करे,विचार दें ,,इस संघर्ष में साथ दें,,,जय अन्नदाता,,,अशोक कटियार,कीरतपुर,7007871870
पीएम मोदी की तर्ज पर भाजपा नेता अशोक कटियार ने कही मन की बात,,,,,

