दलित-गरीब हों या सीजेआई : भाजपा राज में सब निशाने पर!

‘‘सरकार के खिलाफ कांग्रेस का मास्टर प्लान तैयार‘‘
नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)।
यूपी के रायबरेली में एक दलित युवक की पीट-पीटकर हत्या और सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बी.आर. गवई पर जूता उछालने की कोशिश। ये दो घटनाएं देश की राजनीति में भूचाल ला रही हैं। कांग्रेस पार्टी ने इन घटनाओं को जोड़कर बीजेपी सरकार पर हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि बीजेपी के राज में दलित, गरीब.. और यहां तक कि संविधान के रक्षक सीजेआई भी सुरक्षित नहीं हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी जल्द ही इन मुद्दों पर संयुक्त बयान जारी करेंगे। यह बयान कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा है जिसका मकसद बीजेपी को ‘जंगल राज’ और ‘संविधान-विरोधी’ साबित करना है।
आपको बता दें कि सोनिया गांधी ने सीजेआई पर हमले को ‘संविधान पर सीधा प्रहार’ बताया है और उन्होंने कहा कि कोई शब्द इसकी निंदा के लिए काफी नहीं, वहीं खरगे ने इसे न्यायपालिका की गरिमा पर हमला कहा। ये बयान सिर्फ निंदा तक सीमित नहीं हैं। कांग्रेस इन्हें चुनावी हथियार बनाने की तैयारी में है। खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में, जहां दलित वोट बैंक महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश का रायबरेली जिला सोनिया गांधी का परिवारिक गढ़ माना जाता है। एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार खुशी से नहीं, बल्कि एक दिल दहला देने वाली घटना से है। 2 अक्टूबर 2025 की रात, 40 साल के दलित युवक हरिओम की गांववालों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। हरिओम सिल्हौती गांव के रहने वाले थे वे अपनी ससुराल जा रहे थे। जब कुछ लोगों ने उन्हें ‘ड्रोन चोर’ समझ लिया।
हरिओम रात करीब 9 बजे साइकिल पर सिल्हौती से महाराजगंज की ओर बढ़ रहे थे। गांव में अफवाह फैल चुकी थी कि कुछ चोर ड्रोन का इस्तेमाल करके लूटपाट की योजना बना रहे हैं। ड्रोन छोटा हवाई यंत्र हैं, जो आजकल खेती और निगरानी के लिए इस्तेमाल होते हैं, लेकिन यहां ये मौत का बहाना बने। कुछ ग्रामीणों ने हरिओम को घेर लिया और उन्होंने लाठियों, बेल्टों और मुट्ठियों से उनकी पिटाई शुरू कर दी। हरिओम चीखे, गिड़गिड़ाए, लेकिन किसी ने नहीं सुना। एक वायरल वीडियो में दिखा कि आखिरी सांसों में हरिओम ने राहुल गांधी का नाम लिया और उन्होंने कहा कि राहुल जी, बचाओ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सुबह हरिओम की लाश मिली।
रायबरेली पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया। ये सभी स्थानीय ग्रामीण थे। एसपी ने बताया कि आरोपी ड्रोन की अफवाह पर भ्रमित हो गए थे लेकिन ये सिर्फ अफवाह नहीं थी। पुलिस जांच में पता चला कि गांव में पहले से ही चोरी की शिकायतें थी। पुलिस ने 3 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड भी किया जिनमें एक सब-इंस्पेक्टर शामिल थे। वे घटनास्थल पर देर से पहुंचे। योगी आदित्यनाथ सरकार ने इसे ‘मॉब लिंचिंग’ करार दिया और सख्त कार्रवाई का वादा किया लेकिन विपक्ष का कहना है कि ये सिर्फ दिखावा है।
राहुल गांधी ने हरिओम के परिवार से फोन पर बात की और उन्होंने परिवार को न्याय का भरोसा दिलाया। कांग्रेस ने इसे ‘जंगल राज’ का प्रतीक बताया। खरगे और राहुल का संयुक्त बयान आया। ये मॉबोक्रेसी का डरावना दौर है। दलित युवक की हत्या संविधान पर हमला है। बयान में कहा गया कि यूपी में दलितों पर अत्याचार बढ़ रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि 2017 से अब तक यूपी में 200 से ज्यादा लिंचिंग के मामले हुए, जिनमें ज्यादातर दलित और अल्पसंख्यक पीड़ित हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के अनुसार 2024 में ही 50 से ज्यादा दलितों की हत्या हुई।
हरिओम की कहानी सिर्फ एक मौत नहीं बल्कि समाज की गहरी दरार दिखाती है। वे मजदूर थे, परिवार चलाने के लिए दिन-रात मेहनत करते। पत्नी और दो बच्चे अब अनाथ-जैसे हैं। गांववालों का कहना है कि डर ने उन्हें पागल बना दिया लेकिन कांग्रेस इसे बीजेपी की नफरत की राजनीति से जोड़ रही है। राहुल गांधी ने कहा कि ये हत्या सिर्फ हरिओम की नहीं, पूरे दलित समाज की है। पुलिस जांच जारी है लेकिन परिवार न्याय की आस में तड़प रहा है। यह घटना रायबरेली को सदमे में डाल गई, जहां 20फीसदी आबादी दलित है।
कांग्रेस ने इसे बीजेपी पर हमले का मौका बनाया। पार्टी कार्यकर्ता गांव में पहुंचे, पोस्टर बांटे। बीजेपी राज में दलित सुरक्षित नहीं। यूपी चुनाव नजदीक हैं, और ये मुद्दा वोटों को प्रभावित कर सकता है। द हिंदू ने लिखा कि राहुल गांधी ने इसे ‘राष्ट्र पर दाग’ कहा- इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार पुलिस ने 5 गिरफ्तारियां की लेकिन विपक्ष पूछ रहा है क्या ये काफी है? हरिओम की मौत ने पूरे देश को सोचने पर मजबूर कर दिया। क्या अफवाहें इतनी घातक हो सकती हैं?
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट देश का सबसे ऊंचा न्याय मंदिर है। यहां कानून की मूर्ति विराजमान है लेकिन 6 अक्टूबर 2025 को ये मंदिर हिल गया। चीफ जस्टिस बी.आर. गवई की बेंच सुनवाई कर रही थी। तभी एक 71 साल के वकील ने अपना जूता निकाला और सीजेआई की ओर उछालने की कोशिश की। जूता नहीं लगा लेकिन सदमा लगा। ये घटना न सिर्फ कोर्ट रूम को, बल्कि पूरे देश को सुन्न कर गई।
वकील राकेश किशोर मयूर विहार, दिल्ली के रहने वाले हैं। वे एक याचिका पर बहस कर रहे थे। ये याचिका किसी मंदिर की मूर्ति को लेकर थी। सीजेआई गवई ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि मॉरिशस जाकर कहिए। ये टिप्पणी राकेश को चुभ गई। वे भावुक हो गए। कोर्ट में चिल्लाए, फिर जूता निकाला। सिक्योरिटी ने उन्हें पकड़ लिया। सीजेआई ने संयम दिखाया और उन्होंने वकीलों से कहा कि बातें जारी रखिए, कुछ नहीं हुआ लेकिन अंदर से ये अपमान था। राकेश किशोर ने बाद में कोई पछतावा नहीं जताया। हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा कि मुझे डर नहीं, पछतावा नहीं। कोर्ट ने मेरा मजाक उड़ाया। वे कहते हैं कि ये भावनाओं का फूटना था लेकिन सवाल ये है कि क्या कोर्ट में जूता उछालना सही है। बार काउंसिल ने उन्हें सस्पेंड कर दिया। अब वे प्रैक्टिस नहीं कर सकते। पुलिस ने केस नहीं दर्ज किया, लेकिन जांच चल रही है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने लिखा कि राकेश ने कहा कि ये सनातन धर्म का अपमान था।
सीजेआई गवई वे दलित समुदाय से आते हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट के जज रह चुके है। 2021 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और संविधान के रक्षक माने जाते हैं। वायर ने लिखा कि ये घटना जातिवाद की गहराई दिखाती है। एक दलित सीजेआई पर ऊंची जाति का वकील हमला करता है और बिना केस के छूट जाता है। ये न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाता है। सीजेआई ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि कुछ नहीं लगा, लेकिन ये दुखद है।
कांग्रेस ने इस मामले को तुरंत पकड़ा.. सोनिया गांधी ने बयान जारी किया कि कोई शब्द इसकी निंदा के लिए काफी नहीं.. ये सीजेआई पर नहीं, संविधान पर हमला है.. और उन्होंने कहा कि सीजेआई गवई दयालु हैं, लेकिन राष्ट्र को एकजुट होकर उनका साथ देना चाहिए.. खरगे ने एक्स पर पोस्ट किया कि ये शर्मनाक है.. योग्यता से ऊंचे पद पर पहुंचे व्यक्ति को निशाना बनाना चिंताजनक। कांग्रेस सिर्फ निंदा नहीं कर रही। ये सोची-समझी रणनीति है। पार्टी का मास्टर प्लान है। दलित हत्या और सीजेआई हमले को जोड़कर बीजेपी को ‘नफरत की राजनीति’ का दोषी ठहराना। बीजेपी राज में दलित-गरीब हों या सीजेआई, सब निशाने पर है। संविधान खतरे में है। खरगे और राहुल का संयुक्त बयान इसी पर केंद्रित होगा।
कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया ने कहा कि ये हमला संविधान पर है। राष्ट्र एकजुट हो। उनका बयान इंडियन नेशनल कांग्रेस की वेबसाइट पर है। खरगे ने पोस्ट में लिखा कि न्यायपालिका की गरिमा पर प्रहार। राहुल ने कहा कि ये क्राइम संविधान के खिलाफ है। राहुल ने ‘मोस्ट बैकवर्ड जस्टिस मेनिफेस्टो’ लॉन्च किया, जो दलितों को मजबूत करेगा। द हिंदू ने लिखा कि विपक्ष इसे ‘हेट का जहर’ बता रहा है। न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, ये ‘लोकतंत्र का खतरनाक नया निचला स्तर’ है।
ये घटनाएं राजनीति को गरमा रही है।
यूपी में योगी सरकार दबाव में है। बिहार चुनाव में कांग्रेस-आरजेडी गठबंधन को फायदा होगा। बीजेपी कह रही है हम कार्रवाई करेंगे लेकिन विपक्ष पूछ रहा है कि क्यों बार-बार होता है? समाज में जातिवाद का मुद्दा उभरा है। एनसीआरबी आंकड़े बताते है कि दलितों पर अत्याचार 10 फीसदी बढ़े है। न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।