बृजेश चतुर्वेदी
कन्नौज:(आवाज न्यूज ब्यूरो) समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व सांसद सुब्रत पाठक के बीच सोशल मीडिया पर जुबानी जंग तेज हो गई है। यह विवाद अखिलेश यादव की सुब्रत पाठक के काले चश्मे पर की गई टिप्पणी से शुरू हुआ, जिसके जवाब में पाठक ने सपा की लाल टोपी को ‘आतंक का प्रतीक’ बताया।
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दो दिन पहले सुब्रत पाठक के काले चश्मे को ‘काले कारनामों’ से जोड़ते हुए टिप्पणी की थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था कि “कन्नौज के पूर्व भाजपाई सांसद का बयान बेहद आपत्तिजनक है। क्या वो जायज़ वोटों को कटवाने की सलाह दे रहे हैं। चुनाव आयोग तत्काल संज्ञान ले। काले कारनामों का काला चश्मा लगाए, ये महानुभाव बोलते समय भूल गये कि ये जो कह रहे हैं वो उन्हीं के दल के भाजपाई मुख्यमंत्री से उल्टी बात है”।
अखिलेश यादव की इस टिप्पणी पर भाजपा के पूर्व सांसद सुब्रत पाठक ने शुक्रवार को उन्हीं के अंदाज में सोशल मीडिया पर पलटवार किया। उन्होंने लिखा, “काला चश्मा आंखों को धूप से ठंडक देता है, जिससे पहनने वाले की नजर पैनी बनी रहती है। किंतु लाल टोपी उत्तर प्रदेश में आतंक की प्रतीक है और इन टोपीबाजों की टोपी का रंग भले ही लाल हो, किंतु ये जाने तो काले कारनामों के लिए ही जाते हैं।”
जारी किया। इसमें उन्होंने अखिलेश यादव पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का सही मतलब नहीं बता पा रहे हैं। पाठक ने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री का बेटा भला पिछड़ा कैसे हो सकता है, जबकि मुलायम सिंह यादव जैसे नेता संघर्ष कर के मुख्यमंत्री बने थे।
उन्होंने कहा कि अगर अखिलेश यादव खुद को पीडीए का नेता मानते हैं, तो उन्हें कन्नौज लोकसभा के सबसे गरीब व्यक्ति को नेता या मुख्यमंत्री बनाना चाहिए। पाठक ने इसमें अपना समर्थन देने की बात भी कही। इन टिप्पणियों से सोशल मीडिया पर सियासी हलचल तेज हो गई है।