‘‘निजीकरण के विरोध में एक जनवरी से काली पट्टी बांधकर काम करेंगे बिजली कर्मचारी‘‘
लखनऊ। (आवाज न्यूज ब्यूरो) राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने मंडल स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया। परिषद के अध्यक्ष जेएन तिवारी ने कहा कि सरकार कर्मचारियों की समस्याओं की लगातार अनदेखी कर रही है। आंदोलन का तीसरा चरण पूरा हो चुका है, लेकिन अफसर वार्ता करने तक को तैयार नहीं हैं। इसलिए अब 20 जनवरी को विधानभवन का घेराव किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि संगठन ने अगस्त में प्रदेश के मुख्य सचिव को कर्मचारियों की समस्याओं से अवगत कराते हुए तीन सितंबर तक समस्याओं के समाधान करने की मांग की थी। इसके बाद भी कोई सुनवाई नहीं की गई। सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारी निगम का गठन तो कर दिया, लेकिन आउटसोर्स कर्मचारियों को न्यूनतम मानदेय का लाभ अभी तक नहीं मिल रहा है। इसके अलावा सभी मांगें जस की तस हैं। इसलिए अब आंदोलन का चौथा चरण शुरू किया जा रहा है। सम्मेलन में संगठन के पदाधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
एक जनवरी से काली पट्टी बांधकर दर्ज कराएंगे विरोध
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की शनिवार को हुई बैठक में तय किया गया कि निजीकरण के विरोध में एक जनवरी से काली पट्टी बांध कर विरोध दर्ज कराया जाएगा। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्रवाई के विरोध में एक जनवरी, 2026 को सभी जिलों में विरोध दिवस मनाया जाएगा। बिजली कर्मी पूरे दिन दाहिने हाथ पर काली पट्टी बंधेंगे और भोजन अवकाश अथवा कार्यालय समय के बाद प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान बिजली कर्मियों के घर पर स्मार्ट मीटर लगाने के आदेश की निंदा की गई। समिति के सदस्यों ने कहा कि रियायती बिजली की सुविधा इलेक्ट्रिसिटी रिफॉर्म एक्ट 1999, यूपी ट्रॉन्सफर स्कीम 2000 और इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 के प्रावधानों के अनुसार मिल रही है। इसमें कोई भी छेड़छाड़ इन अधिनियमों का उल्लंघन है, जिसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।

