मतदाताओं के कटे नामों के लिये संगठन नहीं सरकार जिम्मेदार
बृजेश चतुर्वेदी
लखनऊ।(आवाज न्यूज ब्यूरो) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को घेरने के लिये टीम गुजरात ने केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाने का जो कूटनीतिक निर्णय लिया उसका असर दिखने लगा। यूपी में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर सरकार और संगठन में तलवारें खींच गयी है। यूपी में एसआईआर में बड़े संख्या में मतदाताओं के नाम कटने के जिम्मेदार कौन है? संगठन या सरकार? इसको लेकर भाजपा में घमासान छिड़ गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एसआईआर में करीब चार करोड़ मतदाता कम होने के लिए संगठन को आरोपित कर चुके हैं। जवाब में यूपी भाजपा के नये प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में प्रदेश भर से आये भाजपा कार्यकर्ताओं के सामने एसआईआर को लेकर सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि संगठन हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है लेकिन ड्राइविंग सीट पर सरकार ही है। दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद लौटे पंकज चौधरी के इस बयान को शासन और सत्ता के गलियारों में सरकार और संगठन के बीच टकराव के रूप में देखा जा रहा है। बैठक में पंकज चौधरी ने कहा एसआईआर सरकार की जिम्मेदारी है, हमें सहयोग करना है कि एक भी पात्र वोटर, मतदाता सूची में नाम शामिल कराने से वंचित नहीं रहे। पार्टी की ओर से जिन्हें बीएलओ-2 बनवाया गया कई जगह उनकी भी दगाबाजी पकड़ में आई है। नीचे के कार्यकर्ता को सत्ता में जितनी हिस्सेदारी और सम्मान दिया गया है, उसी अनुपात में उसने अपना योगदान दिया है। ताली एक हाथ से नहीं बजती है।
एसआईआर को लेकर बीजेपी संगठन और प्रदेश की सरकार की ओर से जितनी ब्रांडिंग की गई थी, हकीकत उससे इतर है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने 27 दिसंबर को मथुरा से अपने प्रदेश दौरे की शुरुआत की। ब्रज, पश्चिम, गोरखपुर क्षेत्र, काशी का दौरा करते हुए पंकज चौधरी अवध पहुंचे। छह में से पांच क्षेत्रों का दौरा करने के दौरान पार्टी के प्रदेश नेतृत्व को जिलाध्यक्षों और क्षेत्रीय अध्यक्षों से जो फीडबैक मिल रहा है, उसमें पार्टी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा प्रमुख रही। जिसके कारण संगठन की राजनीति से अनभिज्ञ पंकज चौधरी पार्टी कार्यकर्ताओं से तेजी से जुड़ने के चक्कर में हर दिन एक डायलॉग बोलते हैं, “मैं कार्यकर्ताओं के लिये लड़ूंगा भी-अड़ूंगा भी”। प्रदेश में सरकार भाजपा की है, संगठन के मुखिया पंकज चौधरी स्वयं हैं, वह हर दिन किससे लड़ने और अड़ने की बात बोल कर कार्यकर्ताओं में सनसनी पैदा कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा का अनुभव बहुत खराब रहा, जब हर लोकसभा क्षेत्र में पोलिंग पार्टी को दी गई मतदाता सूची में हजारों मतदाताओं के नाम के आगे डिलीट लिखा था जबकि पार्टी और प्रत्याशी को दी गई मतदाता सूची में वह मतदाता शामिल थे। भाजपा की हार के पीछे इसे भी बड़ी वजह माना गया। जानकार मानते हैं कि फिर वही स्थिति न हो इसके लिए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने साफ कर दिया है कि एसआईआर सरकार की जिम्मेदारी है।
जिस दिन पंकज चौधरी की प्रदेश अध्यक्ष बनाने की खबर आयी थी उसी दिन से लगातार यह चर्चा राजनैतिक गलियारों में छिड़ गयी थी कि टीम गुजरात द्वारा यह “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घेरेबंदी है”। गोरखपुर से डॉ राधामोहन दास अग्रवाल को पहले राज्यसभा भेजा गया फिर भाजपा का राष्ट्रीय महामंत्री बना दिया गया। अग्रवाल इससे पहले संगठन में किसी ऐसे पद पर नहीं रहे जो कार्यकर्ताओं के बीच सांगठनिक सामंजस्य स्थापित करने का अनुभव रखते हों। उसके पहले शिव प्रताप शुक्ल को राज्यसभा और फिर केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री उसके बाद हिमांचल प्रदेश का राज्यपाल बना कर ताकत दी जा रही है। गोरखपुर की संगीता यादव को भी राज्यसभा भेजा गया। स्वयं पंकज चौधरी के पास संगठन का अनुभव नहीं है। इससे पहले वह मात्र प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य थे। टीम गुजरात ने कैडर बेस पार्टी में गोरखपुर को अपवाद बना दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 2017 से पहले 5 बार सांसद थे, विधानसभा का कोई अनुभव नहीं रखते थे, उनको तब मुख्यमंत्री बनाया गया जब तत्कालीन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य, विधानसभा में भाजपा विधान दल के नेता सुरेश खन्ना, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही, हृदय नारायण दीक्षित और सतीश महाना जैसे वरिष्ठ नेता दावेदार थे लेकिन योगी ने प्रचंड हिंदुत्व और कानून व्यवस्था की नई लकीर खींची है। बिना आर्थिक-चारित्रिक आरोप के सरकार चलाई है।जो जातीय आरोप उन पर लगाये गये, उसे धोने की वह कभी कोशिश करते भी नहीं दिखे। उनके करीबी बताते हैं कि वह जातिवादी हैं ही नहीं तो विरोधी उनके माफिया उन्मूलन को जातीय ज्वाला से ग्रस्त बताते हैं। सत्ता में बैठे लोगों का प्रशासनिक अधिकारियों पर अधिक निर्भर होने से बार-बार कार्यकर्ताओं पर प्रशासनिक अधिकारी भारी पड़ते रहे। यह कहने की हिम्मत जुटाने में कार्यकर्ताओं के पसीने छूट रहे हैं। समय रहते यूपी भाजपा के नेता समझ लें किसी कारण 2027 में सरकार चली गयी तो निस्वार्थ समाज में वैचारिक प्रतीक बन कर जो लोग भाजपा की लड़ाई लड़ रहे हैं उनका संघर्ष बढ़ जायेगा। फिर बाहर से आये रुस्तम जहाजी पलक झपकते ही कब जहाज से कूद गये, पता भी नहीं लग पायेगा। इनमें बहुत सारे लोग पूर्णरूप से भाजपा मय हो चुके हैं। उनका बाहरी होने का ताना और जिनको साथ लेकर आये उन्हें संतुष्ट न कर पाना एक अलग व्यथा है।
एसआईआर के लिए रविवार, 11 जनवरी को चुनाव आयोग ने सभी बूथों पर विशेष शिविर लगाए, लेकिन भाजपा को इसकी जानकारी नहीं दी गई। नतीजतन बूथ पर भाजपा के बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) नहीं पहुंचे, इसको लेकर जिलाध्यक्षों ने शिकायत की।एसआईआर की मतदाता सूची में एक ही परिवार के सदस्यों के पोलिंग बूथ अलग-अलग कर दिए गए हैं, इससे चुनाव के दौरान मतदान कराने में दिक्कत होगी। जिला निर्वाचन अधिकारी तर्क दे रहे हैं कि बूथ पर मतदाता की संख्या 1200 करने के कारण ऐसा हुआ, जबकि पार्टी का तर्क है कि एक परिवार के सभी सदस्य एक ही बूथ पर नहीं जाएंगे तो एसआईआर में क्या काम हुआ? गैरमौजूद, शिफ्टेड और डेथ (एएसडी) की मतदाता सूची में भी खामियां सामने आ रही हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी यह बताने का प्रयास कर रहे हैं कि उनका काम बिल्कुल सही है लेकिन राजनीतिक दलों का सहयोग नहीं मिला है।
एसआईआर के दौरान जिलों में प्रशासन बनाम भाजपा की स्थिति बनती जा रही है। एसआईआर के बहाने मुख्यमंत्री ने संगठन पर सवाल उठाया तो लगा कि वास्तव में इसके लिये संगठन के कार्यकर्ता जिम्मेदार हैं लेकिन जब संगठन का आम कार्यकर्ता मुख्यमंत्री से पूछना जानना चाहता है कि आप 2017 से मुख्यमंत्री बन कर प्रदेश की शीर्ष सत्ता पर विराजमान हो गये हम सभासद तक नामित नहीं हो पाये। कार्यकर्ता खाली पड़े अनेक निगमों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य बनने के लिये तरस रहे हैं, इसका जिम्मेदार कौन है? 2017, 2022 में भाजपा सरकार बना कर सफल तो हो गयी लेकिन जमीनी स्तर पर उसके कार्यकर्ता सम्मान से वंचित हैं। ओहदेदार अपने-अपने काम में लगे थे। जिस दिन अभियानों के डाटा और रिकॉर्ड की जांच होगी उस दिन आईटी और कॉल सेंटर वालों के कठिन परिश्रम की हकीकत सामने आ जायेगी। यह तथ्य किसी से छुपा है क्या कि जिम्मेदार पदाधिकारी जमीन पर उतरने से ज्यादा डाटा दुरुस्त करने में ताकत लगाये हैं। जो लोग एक जगह बैठ कर अभियानों को सफल किये हैं वही लोग एसआईआर की लुटिया डुबोये हैं। सूत्रों की मानें तो संगठन हित में अभियानों से जुड़े किसी कार्यकर्ता द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमितशाह को भेजे गये मेल में यूपी के ओहदेदारों के क्रिया कलाप की विस्तृत जानकारी भेजी गयी है।

