मिडिल ईस्ट संकट पर केंद्र सरकार अलर्ट, पीएम मोदी ने मंत्रियों को दिए अहम निर्देश

नई दिल्ली। (आवाज न्यूज ब्यूरो)। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कैबिनेट बैठक में स्थिति की समीक्षा की। बैठक के दौरान उन्होंने सभी मंत्रालयों और विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट का असर आम लोगों पर कम से कम पड़े, इसके लिए पहले से तैयारी रखी जाए।
11वें दिन में पहुंचा संघर्ष
28 फरवरी 2026 से शुरू हुआ यह टकराव अब लगातार बढ़ता जा रहा है। खबरों के मुताबिक प्तंद और प्ेतंमस के बीच तनाव के दौरान अमेरिका की भागीदारी से हालात और जटिल हो गए हैं। अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर कई हवाई हमले किए गए, जिसके जवाब में ईरान ने भी क्षेत्रीय लक्ष्यों पर कार्रवाई की। इस संघर्ष का असर खाड़ी क्षेत्र के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग ैजतंपज वि भ्वतउन्र पर भी पड़ा है, जो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का प्रमुख रास्ता माना जाता है।
भारत पर भी पड़ रहा असर
भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बन सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ने से कच्चे तेल और एलपीजी सप्लाई पर दबाव देखा जा रहा है। कुछ राज्यों में घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडरों की उपलब्धता को लेकर चिंता जताई जा रही है। कई होटल और रेस्तरां संचालकों ने भी सप्लाई को लेकर मुश्किलों की बात कही है।
सरकार ने उठाए कई कदम
स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए कई फैसले किए हैं। देश की रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। घरेलू उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर की आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए 25 दिन का इंटर-बुकिंग नियम लागू किया गया है। अस्पताल, स्कूल और अन्य आवश्यक संस्थानों के लिए आयातित एलपीजी की विशेष व्यवस्था की जा रही है। कमर्शियल गैस की मांग की समीक्षा के लिए एक विशेष समिति गठित की गई है। साथ ही रूस और पश्चिम अफ्रीका जैसे क्षेत्रों से वैकल्पिक आयात स्रोतों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
सरकार का आश्वासन
केंद्र सरकार का कहना है कि फिलहाल घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त गैस और ऊर्जा स्टॉक उपलब्ध है। हालांकि अगर अंतरराष्ट्रीय संकट लंबा चलता है तो सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है। इसी कारण सरकार ने पहले से तैयारी करते हुए ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया है।