अमेरिका-इजरायल और ईरान जंग के बीच खतरनाक हॉर्मुज़ से तेल लेकर मुंबई पहुंचा पहला विशाल टैंकर

’नई दिल्ली। (आवाज न्यूज ब्यूरो)। मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और समुद्री सुरक्षा खतरे के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लाइबेरिया के झंडे वाला तेल टैंकर सेनलांग सूजमैक्स सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर सुरक्षित रूप से मुंबई पोर्ट पहुंच गया है। यह जहाज ईरान-अमेरिका संघर्ष शुरू होने के बाद हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पार कर भारत आने वाला पहला जहाज माना जा रहा है। यह टैंकर रस तनूरा पोर्ट से 1 मार्च को कच्चा तेल लोड करके 3 मार्च को रवाना हुआ था। जहाज 1,35,335 मीट्रिक टन सऊदी क्रूड ऑयल लेकर आया है, जिसे पूर्वी मुंबई के महुल इलाके की रिफाइनरियों में भेजा जाएगा। समुद्री ट्रैकिंग डेटा के अनुसार जहाज 8 मार्च को स्ट्रेट आफ हार्मुज से गुजरा।
अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा ट्रांसपोंडर
इस दौरान जहाज ने जोखिम वाले हिस्से में अपना एआईएस ट्रांसपोंडर अस्थायी रूप से बंद कर दिया था। यह सिस्टम जहाज की पहचान, गति और दिशा की जानकारी आसपास के जहाजों और तटीय स्टेशनों को भेजता है। सुरक्षा कारणों से कभी-कभी जहाज इसे बंद कर देते हैं। 9 मार्च को जहाज दोबारा ट्रैकिंग सिस्टम पर दिखाई दिया। टैंकर बुधवार दोपहर करीब 1 बजे मुंबई पोर्ट पहुंचा और शाम 6ः06 बजे जवाहर द्वीप टर्मिनल पर उसे बर्थ दिया गया। क्रूड ऑयल को खाली करने की प्रक्रिया लगभग 36 घंटे तक चलने की उम्मीद है। जहाज का स्वामित्व सेनलांग शिपिगं लि के पास है और इसका प्रबंधन ग्रीस की कंपनी डायनाकाम टेंकंर मैनेजमेंट करती है। जहाज पर 29 क्रू सदस्य हैं, जिनमें भारतीय, पाकिस्तानी और फिलीपीनी नाविक शामिल हैं। जहाज का कप्तान भी एक भारतीय है।
ईरान की सख्त चेतावनी
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की नौसेना के कमांडर ने चेतावनी दी है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को ईरान से अनुमति लेनी होगी। उन्होंने दावा किया कि दो जहाजों को चेतावनी के बावजूद जलडमरूमध्य पार करने की कोशिश करने पर निशाना बनाया गया। विशेषज्ञों के अनुसार हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा मार्ग है। यहां से रोज 20 मिलियन बैरल से ज्यादा तेल गुजरता है। यह वैश्विक तेल खपत का लगभग 20 फीसदी है। दुनिया की बड़ी मात्रा में एलएनजी भी इसी रास्ते से जाती है। इस रास्ते में थोड़ी भी रुकावट वैश्विक तेल बाजार और आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकती है। भारत के जहाजरानी मंत्रालय के अनुसार फिलहाल 28 भारतीय-ध्वज वाले जहाज फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं। 24 जहाज हॉर्मुज़ के पश्चिम में हैं, जिन पर 677 भारतीय नाविक सवार हैं। 4 जहाज पूर्व में हैं, जिन पर 101 भारतीय नाविक हैं। सरकार ने उनकी सुरक्षा के लिए 24 घंटे का कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है।