“कन्नौज :  इत्रोत्सव–2026” में सुगंध, संस्कृति और परंपरा का अनूठा संगम दिखा

बृजेश चतुर्वेदी

कन्नौज।(आवाज न्यूज ब्यूरो)।  इत्र नगरी कन्नौज की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से पहली बार आयोजित किए जा रहे “कन्नौज इत्रोत्सव–2026” का आयोजन जनपद  स्थित बोर्डिंग ग्राउंड में 14 से 16 मार्च 2026 तक भव्य रूप से किया जा रहा है। यह इत्रोत्सव केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि कन्नौज की उस प्राचीन सुगंधित परंपरा का उत्सव है, जिसने सदियों से इस नगर की पहचान को जीवंत बनाए रखा है। इत्रोत्सव के माध्यम से कन्नौज की पारंपरिक इत्र कला, संस्कृति, लोकजीवन और हस्तशिल्प को नई पहचान देने का प्रयास किया जा रहा है।*

इत्रोत्सव के द्वितीय दिवस पर विभिन्न विभागों एवं कलाकारों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर  आला गायन, सोलो डांस, कत्थक नृत्य, अवधी लोकनृत्य, लोकगीत एवं संगीत प्रस्तुतियां दी गईं, जिन्हें उपस्थित दर्शकों ने अत्यंत सराहा। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने कन्नौज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं की झलक प्रस्तुत की।

कार्यक्रम में जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री, पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार, मुख्य विकास अधिकारी रामकृपाल चौधरी सहित अन्य जनपद स्तरीय अधिकारीगण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अधिकारियों ने इत्रोत्सव के विभिन्न स्टॉलों एवं प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए आयोजकों और प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन कन्नौज की पारंपरिक इत्र उद्योग को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा देंगे।

इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष वीर सिंह भदौरिया ने कहा कि कन्नौज सदियों से अपनी पारंपरिक इत्र निर्माण कला और सुगंधित संस्कृति के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध रहा है। ऐसे में पहली बार आयोजित हो रहा कन्नौज इत्रोत्सव जनपद की इस गौरवशाली परंपरा को नई पहचान दिलाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

उन्होंने कहा कि यह उत्सव केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि कन्नौज की उस विरासत का उत्सव है जो पीढ़ियों से यहां के कारीगरों और इत्र व्यवसाय से जुड़े लोगों के श्रम और समर्पण से जीवित है। इत्रोत्सव के माध्यम से कन्नौज की प्रसिद्ध इत्र उद्योग, स्थानीय शिल्पकारों की कला और यहां की सांस्कृतिक धरोहर को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिल रहा है।

इत्रोत्सव के दौरान वृद्धजनों द्वारा भी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए, जिसने कार्यक्रम को विशेष रूप से भावनात्मक और प्रेरणादायक बना दिया। जिला समाज कल्याण अधिकारी वेद प्रकाश मिश्रा ने बताया कि “कलम” नामक स्वैच्छिक संस्था के सहयोग से वृद्धजनों, युवाओं और बच्चों द्वारा संयुक्त रूप से सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। इस पहल का उद्देश्य समाज में अंतरपीढ़ीगत संवाद और जुड़ाव को बढ़ावा देना है, जिससे विभिन्न आयु वर्ग के लोग एक-दूसरे के अनुभवों और ऊर्जा से प्रेरणा ले सकें।

इत्रोत्सव में आए बड़ी संख्या में आगंतुकों एवं पर्यटकों ने सूचना विभाग द्वारा लगाई गई जनकल्याणकारी योजनाओं से संबंधित प्रदर्शनी, पारंपरिक इत्र स्टॉल, स्थानीय व्यंजनों के फूड स्टॉल तथा विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया। इन स्टॉलों के माध्यम से लोगों को सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई, वहीं स्थानीय कारीगरों और इत्र निर्माताओं को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने का अवसर भी मिला।

इत्रोत्सव के माध्यम से कन्नौज की प्राचीन इत्र निर्माण कला, जो पीढ़ियों से चली आ रही है, को नई पहचान देने का प्रयास किया जा रहा है। यह आयोजन न केवल कन्नौज की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि इससे स्थानीय कारीगरों, कलाकारों और उद्यमियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा तथा पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

इत्रोत्सव में आयोजित विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रदर्शनी एवं जनजागरूकता गतिविधियों ने उपस्थित लोगों को कन्नौज की समृद्ध परंपरा, संस्कृति और सुगंधित विरासत से परिचित कराया। आयोजन के आगामी दिवसों में भी विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रदर्शनी एवं अन्य आकर्षक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है।