नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारतीय उपभोक्ताओं के लिए आज सुबह एक ऐसी खबर आई जिसने सबको चौंका दिया। खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव और युद्ध की आहट के बीच, केंद्र सरकार ने आम आदमी की जेब को बड़ी राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज डयुटी (उत्पाद शुल्क) में भारी कटौती का ऐलान किया है। सरकार ने दोनों ईंधनों पर सीधा 10 रुपये प्रति लीटर का बोझ कम कर दिया है। इस कटौती के बाद अब पेट्रोल पर टैक्स रू 13 से गिरकर सिर्फ रू 3 रह गया है, जबकि डीजल पर इसे पूरी तरह खत्म करते हुए शून्य कर दिया गया है।
क्यों जरूरी था यह फैसला?
यह राहत ऐसे समय में आई है जब अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध ने ’ैजतंपज वि भ्वतउन्र’ जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को ब्लॉक कर दिया है। यह वही रास्ता है जहां से दुनिया का 20 फीसदी कच्चा तेल गुजरता है और भारत अपनी जरूरत का लगभग आधा हिस्सा (करीब 28 लाख बैरल रोजाना) यहीं से मंगाता है। युद्ध की वजह से सप्लाई रुकने और कीमतें बढ़ने का जो डर बना हुआ था, सरकार ने टैक्स घटाकर उस डर को फिलहाल शांत कर दिया है।
रसोई से लेकर रफ्तार तक, सब सुरक्षित
सिर्फ पेट्रोल ही नहीं, भारत अपनी रसोई गैस और प्राकृतिक गैस के लिए भी कतर और यूएई जैसे देशों पर निर्भर है। युद्ध के कारण देश के 33 करोड़ परिवारों के चूल्हे ठंडे न पड़ें, इसके लिए सरकार पूरी सतर्कता बरत रही है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि देश के पास अगले 60 दिनों का तेल और एक महीने का गैस स्टॉक सुरक्षित है। इसके अलावा सरकार ने ईंधन निर्यात और विदेश जाने वाले विमानों के ईंधन आपूर्ति पर भी उत्पाद शुल्क में छूट प्रदान की है। इसके अलावा, केंद्र ने 2022 में जारी पहले के अधिसूचना को रद्द करते हुए आयातित विमानन टरबाइन ईंधन पर कस्टम शुल्क राहत दी है। यह कटौती उस समय हुई है जब यूएस-इज़राइल और ईरान के बीच के संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के ब्लॉक होने से वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका है, जिससे ईंधन की कीमतों में वृद्धि का डर था।
तेल विपणन कंपनियों से उम्मीद है कि वे इस कटौती को अवशोषित करेंगे ताकि बढ़ते नुकसान को कम किया जा सके। वर्तमान में अनुमानित है कि तेल विपणन कंपनियां ईंधन बिक्री पर लगभग 48.8 रुपये प्रति लीटर का नुकसान उठा रहे हैं, जो मुख्य रूप से वैश्विक क्रूड की ऊंची कीमतों के कारण है। वैश्विक तेल कीमतों में गिरावट देखी गई है, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2.29 प्रतिशत घटकर $105.53 प्रति बैरल और अमेरिकी डब्लूटीआई फ्यूचर्स 2.54 प्रतिशत गिरकर $92.08 पर पहुंच गए हैं (सुबह 8ः50 बजे तक)।
60 दिन का स्टॉक मौजूद
सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि भारत में पेट्रोलियम और एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में है, और नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी “जानबूझकर चलाए जा रहे, व्यवस्थित गलत सूचना अभियान“ में न फंसें। पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा, भारत में कुल भंडार क्षमता 74 दिन की है, और वर्तमान में वास्तविक स्टॉक कवरेज लगभग 60 दिन का है (जिसमें क्रूड स्टॉक्स, उत्पाद स्टॉक्स और रणनीतिक भंडारण शामिल हैं), जबकि “हम मध्य पूर्व संकट के 27वें दिन पर हैं।“ सभी रिटेल ईंधन आउटलेट्स में पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध है।
मंत्रालय ने बयान में कहा, “देश में कहीं भी पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कमी नहीं है। प्रत्येक भारतीय नागरिक के लिए लगभग दो महीने की निरंतर आपूर्ति उपलब्ध है, चाहे वैश्विक हालात कुछ भी हों। अगले दो महीनों की क्रूड खरीद भी सुनिश्चित कर ली गई है। भारत कई महीनों तक पूरी तरह सुरक्षित है, और रणनीतिक कैवर्न भंडारण में मात्रा इस आपूर्ति स्थिति में गौड है। इसलिए, किसी भी प्रतिनिधित्व को कि भारत के भंडार अपर्याप्त हैं, गंभीरतापूर्वक खारिज कर दिया जाना चाहिए।“
अफवाहों पर लगाम
बाजार में तेल की कमी को लेकर फैल रही खबरों को सरकार ने पूरी तरह निराधार बताया है। इसे “जानबूझकर फैलाया गया भ्रम“ करार देते हुए सरकार ने जनता से अपील की है कि वे घबराकर खरीदारी न करें। यह टैक्स कटौती इस बात का प्रमाण है कि अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल के बावजूद सरकार घरेलू अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

