बृजेश चतुर्वेदी
कन्नौज।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। वर्षों के इंतजार के बाद महिला आरक्षण अब केवल एक वादा नहीं बल्कि एक कानूनी वास्तविकता है।
2011 की जनगणना और मौजूदा परिसीमन के आधारों को ध्यान में रखते हुए महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की रणनीति बनाई गई है। इस निर्णय से न केवल राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं का कद बढ़ेगा, बल्कि सामाजिक नीतियों के निर्माण में भी ‘स्त्री विमर्श’ को प्राथमिकता मिलेगी।
विकास भवन स्थित हर्षवर्धन सभागार में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण गोष्ठी एवं मीडिया संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी, नेतृत्व क्षमता और उनके समग्र सशक्तिकरण जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिला संयोजक प्राची गुप्ता तथा समाज सेविका गीता पाठक एवं पत्रकार सुश्री इरा अवस्थी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संचालन जिला प्रोबेशन अधिकारी महेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर डॉ0 नेहा मिश्रा प्रवक्ता राजकीय महिला महाविद्यालय तथा डॉ0रितु सिंह प्रवक्ता राजकीय महिला महाविद्यालय एवं सुमन समाज सेविका, अनुपमा भदोरिया अध्यापिका जी0जी0आई0सी0 इंटर कॉलेज, छिबरामऊ, गुंजन भदोरिया प्रधानाध्यापिका प्राथमिक विद्यालय कन्नौज को जिला में प्रेरक कार्य करने के लिए सम्मानित भी किया गया l
मुख्य अतिथि जिला संयोजक प्राची गुप्ता ने विधानसभा एवं लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह कदम देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक समावेशी एवं सशक्त बनाएगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी केवल प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि नीति निर्माण, निर्णय प्रक्रिया और सामाजिक विकास में भी उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
समाज सेविका गीता पाठक ने कहा कि देश की आधी आबादी के रूप में महिलाएं हर क्षेत्र—शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग एवं प्रशासन—में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। ऐसे में उन्हें समान अवसर और मंच प्रदान करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन किया और इसे महिलाओं के अधिकारों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। इरा अवस्थी ने कहा कि लोकतंत्र की सफलता के लिए महिलाओं की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। दशकों से यह चर्चा का विषय रहा है कि राजनीति और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। 33 प्रतिशत महिला आरक्षण की संकल्पना वर्षों तक फाइलों और बहसों में दबी रही, लेकिन वर्तमान सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति ने इसे धरातल पर उतारने का ऐतिहासिक कार्य किया है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (128वां संवैधानिक संशोधन विधेयक) पेश किया गया। पूर्व में यह संशय था कि इसे अगली जनगणना और परिसीमन के पश्चात ही लागू किया जा सकेगा, जिसमें लंबा समय लग सकता था। किंतु महिला समाज के सशक्तिकरण की तात्कालिकता को देखते हुए, सरकार ने सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए इस दिशा में ठोस कदम उठाए हैं ताकि आगामी चुनावों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने कहा कि उल्लेखनीय है कि देश के पहले आम चुनाव (1951-52) के समय लोकसभा में सीटों की संख्या 489 थी। समय के साथ जनसंख्या और क्षेत्रों के विस्तार के फलस्वरूप वर्तमान में यह संख्या 543 है (जिसमें केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व शामिल है)। लंबे अंतराल के बाद अब परिसीमन और आरक्षण की व्यवस्था के माध्यम से संसद और विधानसभाओं की तस्वीर बदलने वाली है।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग से महिला चिकित्सक, आशा एवं एएनएम, पुलिस विभाग एवं स्वरोजगार विभाग से स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं, माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा विभाग से महिला अध्यापिकाएं, बाल विकास विभाग से आंगनवाड़ी, सुपरवाइजर तथा कार्यकत्रियां, महिला कल्याण विभाग इत्यादि की उपस्थित रही।

