नारी वंदन : महिला आरक्षण बिल.. पूरा मीडिया इस कुचक्र में फंस गया कि विपक्ष ने महिला बिल पास नहीं होने दिया

फर्रुखाबाद। (आवाज न्यूज ब्यूरो)। नारी वंदन : महिला आरक्षण बिल.. पूरा मीडिया इस कुचक्र में फंस गया कि विपक्ष ने महिला बिल पास नहीं होने दिया, जबकि 2023 में ही महिला बिल दोनों सदनों से पास हो गया था, जिसे मोदी सरकार ने अभी तक लागू नहीं किया… ’कहीं पर निगाहें कहीं पर निशाना…’ राजनीतिक दल तो राजनीति करेंगे ही, लेकिन भारत की मीडिया इस जाल में फंसते हुए कोई सवाल नहीं कर रही, बल्कि सरकार की लाइन को ही सही मानकर विपक्ष को घेर रही है, जबकि सच्चाई इसके विपरीत है…
बच्चू यह खेल राजनीति का है, जिस खेल में भारत का पूरा मीडिया फंस गया…
👉 किसी विद्वान ने सच ही कहा था कि प्रजातंत्र मूर्खों का शासन है… ’गया कौआ कान लेकर और हम दौड़ पड़े कौए के पीछे…’
क्या कहा आपने.. ऐसा नहीं है..
ऐसा ही है साहब… सब चिल्ला रहे हैं कि महिला आरक्षण बिल विपक्ष ने पास नहीं होने दिया… क्षमा करिएगा मैं आप में से किसी को बेवकूफ नहीं कह रहा, पर आप तय करें न कि आख़रिकार आपको कहा क्या जाय… पुनः पुनः पुनः क्षमा की याचना करते हुए कृपया आप नाराज न होइए प्लीज.. पर विचार तो करिए…
चलिए समझते है कि हुआ क्या…
आपके संज्ञान में होगा कि संसद के दोनों सदनों में महिला आरक्षण बिल सन 2023 में बिना किसी विरोध के (लोकसभा में मात्र दो वोट विरोध में पड़े थे और राज्य सभा में तो सर्व सम्मति से) ही पारित हो गया था, जिसपर महामहिम राष्ट्रपति के हस्ताक्षर भी हुए। पर, मोदी सरकार ने उस बिल को 15 अप्रैल 2026 तक कानून के रूप में लागू ही नहीं किया.. विडम्बना देखिए गत दिनों संसद में तीन बिल लाए गए.. पहले तो यह जानिए कि वे क्या थे…
1- भारतीय संविधान में जो वर्तमान व्यवस्था है उसके तहत लोकसभा में सांसदों की अधिकतम संख्या 552 की ही हो सकती है..
{वर्तमान स्थिति अब तक.. लोकसभा : अधिकतम 552 सदस्य (530 राज्यों से $ 20 केंद्र शासित प्रदेशों से $ 2 एंग्लो-इंडियन) हालांकि, 104वें संशोधन के बाद एंग्लो-इंडियन मनोनयन समाप्त हो चुका है, फिर भी संवैधानिक सीमा 552 है} वर्तमान में लोकसभा सदस्यों की संख्या है 545 है। अब यदि यह संख्या 850 तक ले जानी है तो संविधान संशोधन आवश्यक है, सो एक बिल संविधान संशोधन हेतु लाया गया और साथ ही दो अन्य संशोधन बिल सन 2023 में पारित महिला आरक्षण बिल में शुरुआती क्लाज को बदलने हेतु लाए गए.. पुनः ध्यान में रखिए कि जो कानून बना ही नहीं उस महिला आरक्षण कानून में संशोधन बिल लाकर सरकार स्वयं को कटघरे में खड़ा कर चुकी थी तो आनन फानन में इसी 15 अप्रैल 2026 की रात एक अध्यादेश लाकर सन 2023 में पारित बिल को कानून का दर्जा दिया गया.. संज्ञान में हो कि जो कानून अस्तित्व में था ही नहीं उस कानून में दो संशोधन बिल संसद में पेश किया जा चुका था और जिसपर 16 व 17 अप्रैल को बहस हेतु विशेष सत्र बुलाया जा चुका था जो भारतीय राजनीति की एक अभूतपूर्व घटना है। चलिए 15 अप्रैल की रात उसे कानून के रूप में लागू कर दिया गया… बहस शुरू हुई और 17 अप्रैल को उस संविधान संशोधन बिल पर वोटिंग कराई गई जिसके द्वारा लोकसभा की 545 सीटों को 850 सीटों तक ले जाना था। वोटिंग हुई और यह संविधान संशोधन बिल पास नहीं हुआ। अब यहां यह लिखना आवश्यक है कि इस बिल के पास होने या न होने से महिला आरक्षण पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता… सरकार को पहले से पता था कि यह बिल पास नहीं होगा, क्योंकि किसी भी संवैधानिक संशोधन के लिए दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है जो सरकार के पास नहीं है। अब सरकार यदि महिला आरक्षण बिल पर ईमानदार होती तो महिला आरक्षण बिल में प्रस्तावित संशोधन पर भी वोटिंग कराती जो विपक्ष के असहयोग के बाद भी बिना किसी रुकावट के निश्चित ही पास हो जाता, क्योंकि इसे पास करने के लिए लोकसभा में उपस्थित सदस्यों के आधे से एक अधिक वोट की आवश्यकता होती जो सरकार के पास है ही, पर फिर 2029 में ही अपेक्षित महिला आरक्षित सीटों पर चुनाव कराना पड़ता… पर सरकार ने ऐसा नहीं किया और संविधान संशोधन बिल के गिरते ही शेष दोनों बिल जो महिला आरक्षण कानून से जुड़े थे उन्हें वापस ले लिया… अध्याय समाप्त..!!
सरकार यही चाहती थी.. सरकार की मंशा थी कि इस संविधान संशोधन बिल की आड़ में महिला आरक्षण बिल को पुनः हाशिए पर डाल दिया जाए.. सरकार सिर्फ एक नकारात्मक संदेश देना चाहती थी कि विपक्ष ने महिला आरक्षण बिल को पास नहीं होने दिया… अब लगे पड़े हैं सब के सब जिसमें आई टी सेल मीडिया जगत और इस कुचक्र में फंसकर हम भी विपक्ष के विरुद्ध खड़े हैं और उस कौए के पीछे अपने कान की तलाश में दौड़ पड़े है जो अस्तित्व में है ही नहीं ठीक अनुच्छेद 370 की तरह.!!
दे लीजिए गाली मुझे पर सच यही है..
धन्यवाद् सादर वन्दे 🙏🏻