जनगणना बन गई सबसे बड़ा कारण, सियासत में हलचल तेज
बृजेश चतुर्वेदी
लखनऊ। (आवाज न्यूज ब्यूरो)। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव समय से पहले कराए जाने की अटकलें तेज हैं। जनगणना 2027 के कारण चुनाव और प्रशासनिक संसाधनों के टकराव की आशंका जताई जा रही है, हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इन दिनों यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या 2027 विधानसभा चुनाव अपने निर्धारित समय से पहले कराए जा सकते हैं। हालांकि भारत निर्वाचन आयोग या केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
प्रशासनिक संसाधनों पर बढ़ेगा दबाव
जानकारों के अनुसार यदि चुनाव और जनगणना का समय टकराता है तो जिला प्रशासन पर भारी दबाव पड़ेगा। यही कारण है कि चुनाव को दिसंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच कराए जाने की संभावना पर चर्चा हो रही है।
संवैधानिक प्रावधान क्या कहते हैं
संवैधानिक विशेषज्ञों के मुताबिक लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 15 (2) के तहत चुनाव आयोग को विधानसभा कार्यकाल समाप्त होने से छह महीने पहले चुनाव कराने का अधिकार है। उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त होना है, ऐसे में नवंबर 2026 के बाद कभी भी चुनाव की घोषणा संभव है।
अन्य राज्यों में भी एक साथ चुनाव की संभावना
उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब, गोवा, उत्तराखंड और मणिपुर में भी 2027 की शुरुआत में चुनाव होने हैं। यदि चुनाव कार्यक्रम बदला जाता है, तो इन राज्यों में भी मतदान एक साथ कराया जा सकता है। फिलहाल आयोग ने तैयारियां सामान्य प्रक्रिया के अनुसार ही बताई हैं, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति तेज कर दी है।

