लखनऊ।(आवाज न्यूज़ ब्यूरो )। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की टिप्पणी का हवाला देते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार अपनी उपलब्धियों के प्रचार में जुटी है, वहीं दूसरी ओर हाईकोर्ट की फटकार ने सरकार के फैसले पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि हाईकोर्ट ने कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के सरकार के निर्णय को असंवैधानिक बताया है। उन्होंने सवाल किया कि यदि कोई फैसला असंवैधानिक है, तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कारर्वाई होगी। सपा अध्यक्ष ने कहा कि सरकार के इस फैसले से ग्राम प्रधानों में नए विकास कार्यों की उम्मीद जगी थी और उन्होंने ग्रामीणों से कई वादे भी किए थे। अब न्यायालय की टिप्पणी के बाद वे असमंजस की स्थिति में हैं। उन्होंने दावा किया कि ग्रामीण तकनीकी पहलुओं को नहीं समझेंगे और अधूरे कार्यों के लिए ग्राम प्रधानों को जिम्मेदार ठहराएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि ग्राम प्रधानों में इस बात की आशंका है कि इस दौरान हुए खर्च का बोझ कहीं उन्हें स्वयं न उठाना पड़े। अखिलेश यादव ने दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम का असर आगामी चुनावों में देखने को मिलेगा और भाजपा को इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा की रणनीति उसी पर भारी पड़ गई है और पंचायती राज मंत्री भी इस मुद्दे पर जनता के बीच जाने की स्थिति में नहीं होंगे। गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रधानों को प्रशासक बनाये जाने के राज्य सरकार के फ़ैसले पर रोक लगा दी है। मामले कि अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी।