कन्नौज: निपुण भारत मिशन को जन-आंदोलन बनाकर प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ें : सीडीओ

निपुण संकल्प कार्यशाला में तीन जनपदों के शिक्षा अधिकारियों एवं अकादमिक विशेषज्ञों ने किया प्रतिभाग

बृजेश चतुर्वेदी

कन्नौज।(आवाज न्यूज़ ब्यूरो)। निपुण भारत मिशन के अंतर्गत बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा नारायण पैलेस में “निपुण संकल्प कार्यशाला” का आयोजन किया गया। कार्यशाला में जनपद कन्नौज, फर्रुखाबाद एवं हरदोई के खंड शिक्षा अधिकारी, डायट मेंटर, एसआरजी, एआरपी तथा शिक्षा विभाग के अन्य अकादमिक विशेषज्ञों ने प्रतिभाग कर मिशन की भावी रणनीति पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र कुमार श्रीवास ने मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया। इस अवसर पर प्रभारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी श्री संजय कुमार ने मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों—डॉ. अमित कुमार, प्राचार्य डायट छिबरामऊ, श्री संजय कुमार गुप्ता, प्रभारी प्राचार्य डायट हरदोई तथा श्री योगेंद्र सिंह, वरिष्ठ प्रवक्ता डायट हरदोई का पुष्पगुच्छ, पुस्तक एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत एवं अभिनंदन किया।

मुख्य विकास अधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रारंभिक बाल्यावस्था में दी गई गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव होती है। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों में भाषा, गणित एवं सामान्य ज्ञान के साथ-साथ सुनने, समझने और अभिव्यक्ति के कौशल विकसित करने पर विशेष बल देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में बच्चों को पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण एवं प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाना भी शिक्षकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

डायट प्राचार्य छिबरामऊ डॉ. अमित कुमार ने कहा कि एआरपी एवं एसआरजी निपुण भारत मिशन के वास्तविक परिवर्तनकारी नेतृत्वकर्ता हैं। उनका दायित्व केवल शिक्षकों का मार्गदर्शन करना ही नहीं, बल्कि अभिभावकों एवं बच्चों को भी मिशन से जोड़कर सीखने का सकारात्मक वातावरण तैयार करना है। उन्होंने कहा कि बच्चों में जिज्ञासा, तार्किक चिंतन तथा “क्या, क्यों और कैसे” जैसे प्रश्न पूछने की प्रवृत्ति विकसित करना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का मूल आधार है।

राज्य परियोजना कार्यालय, लखनऊ के गुणवत्ता प्रकोष्ठ से आए विशेषज्ञ शिवेश कुमार ने बाल वाटिका से कक्षा 5 तक निर्धारित निपुण लक्ष्यों की समयबद्ध प्राप्ति, शैक्षिक गुणवत्ता संवर्धन एवं विद्यालयों में प्रेरक शैक्षिक वातावरण के निर्माण पर विस्तृत सत्र संचालित किया। उन्होंने विद्यालयों में पठन संस्कृति को बढ़ावा देने पर विशेष बल देते हुए कहा कि बच्चों को अधिकाधिक पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने बताया कि 20 पुस्तकें पढ़ने वाले बच्चों को “सुपर-20”, 30 पुस्तकें पढ़ने वाले बच्चों को “सुपर-30” तथा पूरे शैक्षिक सत्र में सर्वाधिक पुस्तकें पढ़ने वाले विद्यार्थी को “चैम्पियन रीडर ऑफ द ईयर” के रूप में सम्मानित किया जाएगा।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आगामी नवंबर एवं दिसंबर माह में निपुण विद्यालय आकलन आयोजित किया जाएगा। इस वर्ष कक्षा 1 एवं 2 के साथ-साथ कक्षा 3, 4 एवं 5 के विद्यार्थियों का भी आकलन किया जाएगा। कक्षा 3 से 5 का मूल्यांकन बेसलाइन आकलन के रूप में किया जाएगा, जबकि कक्षा 1 एवं 2 का मूल्यांकन निपुण प्लस ऐप के माध्यम से होगा और उसी के आधार पर विद्यालयों को निपुण विद्यालय घोषित किया जाएगा।

कार्यशाला में अकादमिक रणनीति, वार्षिक शैक्षिक कैलेंडर, परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण, प्रभावी कक्षा शिक्षण, टूल किट, कैच-अप टीचिंग, समीक्षा प्रणाली, एनबीएमसी पोर्टल के प्रभावी उपयोग, डेटा आधारित अनुश्रवण एवं सकारात्मक शैक्षिक हस्तक्षेप जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

एआरपी अंग्रेजी मुकेश कुमार ने विद्यार्थियों में समसामयिक घटनाओं की समझ विकसित करने के लिए समाचार-पत्रों के नियमित अध्ययन को बढ़ावा देने पर बल दिया। वहीं एसआरजी श्री अमित मिश्रा ने क्रियाशील बाल वाटिका के सफल संचालन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।

कार्यक्रम के अंत में खंड शिक्षा अधिकारी आनंद द्विवेदी ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन श्री आशुतोष दुबे ने किया, जबकि श्री अतुल दीक्षित एवं उनकी टीम द्वारा बनाई गई आकर्षक रंगोली कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही।

इस अवसर पर जिला समन्वयक (प्रशिक्षण), जिला समन्वयक (एमआईएस) विश्वनाथ शर्मा, शिक्षक ऋतम चतुर्वेदी, स्नेहलता द्विवेदी, श्रीमती गुंजन भदौरिया, रोशनी दुबे सहित बड़ी संख्या में शिक्षा विभाग के अधिकारी, शिक्षक एवं अकादमिक विशेषज्ञ उपस्थित रहे।