महेश वर्मा
फर्रूखाबाद। (आवाज न्यूज़ ब्यूरो)। शहर के आवास विकास स्थिति लोहिया अस्पताल महिला के एसएनसीयू में मंगलवार शाम एक नवजात की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शाहजहांपुर निवासी मोहित भदौरिया की पत्नी तनु ने 14 अगस्त को शहर के एक नर्सिंग होम में बच्चे को जन्म दिया था। परिजनों के मुताबिक, जन्म के समय नवजात रोया नहीं था और उसे झटके आने लगे थे। हालत गंभीर होने पर 15 अगस्त की रात बच्चे को लोहिया अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उसे ऑक्सीजन पर रखा गया।
परिजनों का कहना है कि ऑक्सीजन हटाते ही बच्चे का शरीर नीला पड़ने लगा था, जिसके बाद उसे छुट्टी देने का निर्णय रोक दिया गया। मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे बच्चे को दोबारा झटके आए। ड्यूटी डॉक्टर ने बच्चे को देखा। परिवार का आरोप है कि शाम करीब 4रू30 बजे डॉक्टर ने बच्चे की हालत ठीक बताई थी, लेकिन इसके कुछ देर बाद जब परिजन उसे देखने पहुंचे तो उन्हें बच्चे में कोई हलचल नजर नहीं आई। इसके बाद परिवार के लोग एसएनसीयू के बाहर पहुंचे और बच्चे को देखने के लिए अंदर जाने की कोशिश की। परिजनों का आरोप है कि गेट पर तैनात गार्ड ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया और करीब 20 मिनट तक वे बाहर ही खड़े रहे। इसी दौरान डॉक्टर मौके पर पहुंचे और नवजात का उपचार शुरू किया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। शाम करीब 6ः30 बजे डॉक्टर ने नवजात को मृत घोषित कर दिया। नवजात की मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने कादरी गेट थाना पुलिस को सूचना दी। पुलिस अस्पताल पहुंची और परिवार से घटना की जानकारी ली। परिजनों ने मांग की है कि बच्चे को समय पर देखने से रोकने और एसएनसीयू में प्रवेश न देने के आरोपों की जांच की जाए तथा जिम्मेदार गार्ड के खिलाफ कार्रवाई हो।
वहीं, एसएनसीयू में नवजात की देखभाल कर रहे डॉक्टर शिवाशीष उपाध्याय ने बताया कि बच्चे की हालत जन्म से ही गंभीर थी। जन्म के समय बच्चा नहीं रोया था और उसे झटके भी आ रहे थे। डॉक्टर के मुताबिक, नवजात की लगातार निगरानी की जा रही थी। इस मामले में एसएनसीयू की क्षमता को लेकर भी बड़ा सवाल सामने आया है। डॉक्टर के अनुसार, एसएनसीयू में कुल 14 बेड हैं, जबकि मंगलवार को यहां 31 नवजात भर्ती थे। ऑक्सीजन प्वाइंट भी सीमित होने की बात सामने आई है। मंगलवार रात करीब 8 बजे एक महिला अपने नाती को लेकर अस्पताल पहुंची, जिसे भी झटके आ रहे थे। उस समय डॉक्टरों के अनुसार ऑक्सीजन का कोई प्वाइंट खाली नहीं था। बाद में बच्चे को एसएनसीयू में भर्ती किया गया। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या एसएनसीयू में क्षमता से अधिक भर्ती नवजातों के बीच सभी बच्चों की पर्याप्त निगरानी और उपचार संभव है? साथ ही, परिजनों को बच्चे की गंभीर स्थिति में समय पर जानकारी और एसएनसीयू तक पहुंच क्यों नहीं मिल सकी। इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे। नवजात की मौत ने अस्पताल की व्यवस्थाओं, एसएनसीयू की क्षमता और परिजनों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच की जरूरत को एक बार फिर सामने ला दिया है।
फर्रूखाबाद के लोहिया अस्पताल के एसएनसीयू में नवजात की मौत: परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
