बृजेश चतुर्वेदी
‘‘एसआईआर पर रार’’
नई दिल्ली।(आवाज न्यूज़ ब्यूरो)। पूर्व भारतीय राजनयिक नवदीप सिंह सूरी ने पंजाब में चल रही मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (एसआईआर) को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि भारत की ओर से तीन देशों (यूएई, मिस्र व ऑस्ट्रेलिया) में राजदूत और उच्चायुक्त के तौर पर सेवाएं देने के बावजूद उन्हें अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए दस्तावेज देने को कहा गया।
एसआईआर में क्या अनुभव बताया ?
सूरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) के पास गए और अपना वोटर आईडी तथा आधार कार्ड जमा किया। उन्हें बताया गया कि सब कुछ ठीक है। हालांकि, अब मैसेज आया कि 2003 के एसआईआर रिकॉर्ड से कुछ जानकारियां मेल नहीं खा रही हैं। सूरी के मुताबिक, बीएलओ ने उन्हें एक नोटिस लेने और कुछ दस्तावेजों के साथ दोबारा आने को कहा, ताकि उनकी भारतीय नागरिकता स्थापित की जा सके।
पासपोर्ट भी मांगा गया
पूर्व राजनयिक ने बताया कि उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वह 2003 में भारत में मौजूद नहीं थे। इसके बाद उनसे नागरिकता के प्रमाण के तौर पर पासपोर्ट पेश करने को कहा गया। सूरी ने सवाल उठाया कि अगर तीन देशों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके व्यक्ति को भी अपनी नागरिकता साबित करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, तो आम नागरिकों के सामने क्या स्थिति होगी। प्रशासन ने क्या कहा ?
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर दलविंदरजीत सिंह ने कहा कि वह मामले की जांच करवाएंगे। वहीं, खबर लिखे जाने तक निर्वाचन आयोग, पंजाब सरकार या केंद्र सरकार की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था।
पंजाब में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की घर-घर जाकर गणना का चरण हाल ही में पूरा हुआ है। जानकारी के मुताबिक, इस दौरान सीमावर्ती राज्य के 90.4 प्रतिशत पंजीकृत मतदाताओं ने अपने गणना फॉर्म जमा किए हैं।
चिदंबरम ने नवदीप सूरी के बयान का किया जिक्र, ईसीआई पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने पूर्व राजदूत नवदीप सिंह सूरी के एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े बयान को साझा करते हुए निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाए हैं। चिदंबरम ने दावा किया कि अब तक सामने आए परिणामों के आधार पर एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद भारत की करीब 10 प्रतिशत वयस्क आबादी ऐसी हो सकती है, जिसके पास नागरिकता तो होगी, लेकिन मतदान का अधिकार नहीं होगा। उन्होंने यह संख्या करीब 10 करोड़ बताई और निर्वाचन आयोग पर आरोप लगाते हुए कहा कि आयोग ने वोट न देने वाले नागरिकों की एक नई श्रेणी बना दी है।
तीन देशों में भारत के राजदूत रहे, फिर भी नागरिकता पर शक; नवदीप सूरी बोले- आम नागरिक का क्या होगा ?
