सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश: देश भर में नीट प्रदर्शनों से जुड़ी सभी एफआईआर रद्द

नई दिल्ली। (आवाज न्यूज़ ब्यूरो)। सुप्रीम कोर्ट ने नीट प्रोटेस्ट से जुड़ी देश भर में दर्ज सभी एफआईआर को रद्द कर दिया है। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 20 जुलाई से 25 जुलाई के बीच हुए छात्र आंदोलनों से संबंधित देशभर की सभी एफआईआर को बंद करने का यह आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ किया कि इन प्रदर्शनों से जुड़ी किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में दर्ज एफआईआर पर अब न तो आगे जाँच होगी और न ही उन पर कोई कार्रवाई की जाएगी। इन मामलों को सभी क़ानूनी उद्देश्यों के लिए बंद माना जाएगा। सुनवाई के दौरान ही कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित विरोध मार्च वापस लेने की घोषणा भी कर दी।
पाँच राज्यों की थीं याचिकाएँ
इस मामले में केंद्र सरकार (दिल्ली पुलिस), बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन देकर छात्र प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज एफ़आईआर रद्द करने की मांग की थी। हालाँकि केवल इन पांच सरकारों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपना आदेश पूरे देश पर लागू कर दिया। अदालत ने कहा कि यह फैसला उन छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जो ईमानदारी से और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे।
नई एफआईआर दर्ज करने पर भी रोक
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि 20 जुलाई से 25 जुलाई के बीच हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में अब कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। अदालत ने कहा कि इस अवधि की घटनाओं को लेकर भविष्य में भी पुलिस नए मामले दर्ज नहीं कर सकती।
2873 लोगों के मामले में जांच जारी रहेगी
हालाँकि अदालत ने एक अपवाद भी रखा। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को 2873 ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने की अनुमति दी है, जिनके बारे में पुलिस का दावा है कि उनके खिलाफ हत्या, बलात्कार, अपहरण जैसे गंभीर आपराधिक मामलों का रिकॉर्ड मौजूद है। अदालत ने कहा कि इन मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रह सकती है और संबंधित लोगों को कानूनी उपाय अपनाने का अधिकार रहेगा।
अनुच्छेद 142 का किया इस्तेमाल
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत दिया। अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को ऐसे मामलों में विशेष अधिकार देता है, जहां पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए असाधारण कदम उठाने की ज़रूरत हो। एफ़आईआर को रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ़ किया कि यह आदेश मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए दिया गया है और इसे भविष्य के मामलों में मिसाल नहीं माना जाएगा।
वादा निभाऊँगा: केंद्र सरकार
सुनवाई के दौरान भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार ने 25 जुलाई को सीजेपी नेताओं से जो आश्वासन दिया था, उसके अनुसार छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और भविष्य में नई एफ़आईआर दर्ज न करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के अपने वादे पर कायम है। सरकार ने अदालत से इस संबंध में नीति तैयार करने के लिए तीन महीने का समय मांगा।
तीन महीने में बनेगी मुआवजा नीति
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार का यह बयान रिकॉर्ड पर लिया कि नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के लिए तीन महीने के भीतर नीति तैयार की जाएगी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से परामर्श कर पूरे देश के लिए मुआवजा देने की एक समान व्यवस्था तैयार की जाए, ताकि भविष्य में भी ऐसे मामलों में इसका उपयोग किया जा सके।
पिछली सुनवाई में अदालत ने दिए थे संकेत
इस मामले की पिछली सुनवाई 18 अगस्त को हुई थी। उसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया था कि वह अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर एफआईआर रद्द करने पर विचार कर रही है। उस समय अदालत को बताया गया था कि एक बार एफआईआर दर्ज हो जाने के बाद उन्हें सामान्य कानूनी प्रक्रिया के तहत बंद करने के लिए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करनी होती है, जिसे संबंधित मजिस्ट्रेट स्वीकार या अस्वीकार कर सकता है। इसी कानूनी जटिलता को देखते हुए अदालत ने अपनी विशेष संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करने का फैसला किया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सीजेपी ने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताया है। पार्टी का कहना है कि अदालत के इस आदेश से हजारों छात्रों को राहत मिलेगी और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल युवाओं का भविष्य प्रभावित होने से बचेगा। वहीं, अदालत ने यह भी सुनिश्चित किया है कि गंभीर आपराधिक मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई जारी रह सकेगी।
फैसला अहम क्यों?
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से देशभर के हजारों छात्रों और युवाओं के खिलाफ दर्ज मामले प्रभावी रूप से ख़त्म हो जाएंगे। इसके साथ ही राज्यों को निर्देश दिया गया है कि संबंधित घटनाओं को लेकर अब कोई नई एफआईआर दर्ज न की जाए। इसके साथ ही अदालत ने केंद्र सरकार को तीन महीने के भीतर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजा नीति तैयार करने का निर्देश देकर प्रभावित परिवारों को राहत देने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है।