इंडिया गठबंधन का सेव डेमोक्रेसी मार्च रुका: संसद से चुनाव आयोग की ओर निकले थे विपक्षी सांसद

‘‘पुलिस ने रोका तो आकाशवाणी भवन में धरने पर बैठे’’
नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)
इंडिया गठबंधन के सभी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के इरादे से अपना सामूहिक अभियान शुरू कर दिया है। मंगलवार (6 अक्टूबर) को ठीक 10.45 पर विपक्षी दलों के इस अलायंस ने सेव डेमोक्रेसी मार्च निकाला। संसद के मकर द्वार से शुरू हुआ यह मार्च चुनाव आयोग तक जाना था लेकिन रास्ते में ही पुलिस ने इसे रोक दिया। फिलहाल, यह प्रोटेस्ट मार्च आकाशवाणी भवन पर ही ठहर गया है। राहुल और प्रियंका गांधी समेत कई सांसद आकाशवाणी कैंपस में धरने पर बैठ हुए हैं।
मार्च में राहुल गांधी और अखिलेश यादव समेत 19 विपक्षी दलों के सांसद मौजूद हैं। करीब 150 सांसद होने के दावे हैं। वायनाड सांसद प्रियंका गांधी, एनसीपी लीडर सुप्रिया सुले, शिवसेना (यूबीटी) के सीनियर लीडर संजय राउत से लेकर लेफ्ट फ्रंट के भी तमाम बड़े चेहरे इस मार्च में दिखाई दे रहे हैं। लोकसभा और राज्यसभा के विपक्षी सांसदों के इस मार्च को देखते हुए मंगलवार सुबह से सेंट्रल दिल्ली में बड़ी संख्या में सुरक्षाबल तैनात कर दिए गए थे। सांसदों को रोकने के लिए चुनाव आयोग की ओर जाने वाले सभी रास्तों पर कई स्तर की बैरिकेडिंग की गई है। इन्हीं बैरिकेड्टस और भारी पुलिसबल के चलते मार्च रुका हुआ है।
कुछ देर जमीन पर बैठे फिर आकाशवाणी भवन के रास्ते ईसीआई पहुंचने की कोशिश
मार्च को जब नीति आयोग भवन के पास रोका गया तो सांसद जमीन पर ही बैठकर नारेबाजी करने लगे। कुछ देर तक यह चलता रहा इसके बाद दूसरी ओर से निर्वाचन सदन जाने की कोशिश हुई। राहुल और प्रियंका गांधी के साथ कुछ सांसद आकाशवाणी भवन के गेट पर पहुंचे हालांकि यहां से भी वे आगे नहीं बढ़ पाए। ऐसे में सभी ने आकाशवाणी भवन परिसर में ही धरना शुरू कर दिया। मार्च के दौरान सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी समेत कई सांसदों को हिरासत में भी लिया गया। विपक्षी सांसदों के हाथों में पोस्टर और तख्तियां नजर आईं। किसी में ज्ञानेश कुमार चोरश् लिखा हुआ दिखाई दिया तो किसी में पीएम मोदी के फोटो पर वोट चोर-गद्दी छोड़ लिखा नजर आया। राहुल गांधी सेब डेमोक्रेसी का पोस्टर लेकर आगे बढ़े। बाद में वह ज्ञानेश कुमार इट्स डन ब्रो की तख्ती लेकर भी चले। वह बैरिकेड्स पर चढ़कर तिरंगा लहराते भी नजर आए। मार्च में पूरे वक्त नारेबाजी होती रही। वोट चोर कहां मिलेंगे, बीजेपी के दफ्तर में जैसे नारों के साथ-साथ ज्ञानेश कुमार, पीएम मोदी और अमित शाह के इस्तीफे के भी नारे लगे।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा- यह लड़ाई है। हम लोकतंत्र के लिए लड़ रहे हैं और लड़ते रहेंगे। इन चोरों को बाहर निकालकर लोकतंत्र को बचाएंगे। सरकार लोगों के वोट देने के हक को छिन रहे हैं। सीईसी तो बस कठपुतली बन कर रह गए हैं। मोदी-शाह जो बोलते हैं, वहीं चुनाव आयोग करता है। इसीलिए इन सबको सिस्टम से बाहर निकालना जरूरी है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा- अगर सीईसी सही है तो यहां हमारे सामने आकर बात करें। ये सालों से चोरी कर रहे हैं। चंडीगढ़ में मेयर पद के चुनाव में लिए सीसीटीवी के सामने वोट चोरी हुई। वोटरों के नाम कटवाने के लिए एक-एक आदमी 100-100 फॉर्म-7 भर रहा है। चुनाव आयोग इन सब पर चुप्पी साधे हुए हे। 2017 से लेकर 2026 तक हर चुनाव वोट चोरी कर जीते गए।
क्या हैं मांगें?
विपक्षी दल अपनी चार मांगों के तत्काल पूरी होने के लिए यह मार्च निकाल रहा है। यह मांगें हैं-
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए।
एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को पूरी तरह रद्द किया जाना चाहिए।
एसआईआर के दौरान जिन भी वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, उन्हें दोबारा शामिल किया जाना चाहिए।
आने वाले सभी चुनावों में ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से वोटिंग होनी चाहिए।
कैसे शुरू हुआ पूरा मसला?
कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल बीते कई सालों से मोदी सरकार पर वोट चोरी का आरोप लगा रहे हैं। इनका कहना है कि कई ईवीएम में गड़बड़ी कर तो कभी चुनाव आयोग के जरिए विपक्षी दलों पर सख्ती के जरिए देशभर में बीजेपी को जिताया जा रहा है। हाल ही में जब इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि एसआईआर और चुनाव से जुड़े कई मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग के भीतर ही मतभेद हैं तो विपक्षी दलों को अपने दावे के सपोर्ट में फैक्ट मिल गए। रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ था कि दोनों चुनाव आयुक्त ने बीते 10 महीने में 14 बार चुनाव आयोग के फैसलों पर लिखित में आपत्ति दर्ज कराई थी। इसी के बाद विपक्षी लीडर लामबंद हुए और एक स्वर में सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर डाली। कांग्रेस ने देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। दिल्ली के जंतर-मंतर और मुंबई के शिवाजी पार्क पर आम लोग भी इस प्रोटेस्ट में शामिल हो गए। अगर ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नहीं होता है तो इंडिया गठबंधन ने आगे के लिए भी पूरी रणनीति बना रखी है। इसमें राष्ट्रपति से मुलाकात के साथ ही सीईसी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की भी योजना है।