क्लिक के दलदल में फँसा समाज : गालियों से ग्रोथ, शोर से शोहरत
(जहाँ सच सन्नाटा है, तमाशा उत्सव है — क्लिक की संस्कृति में खोता हुआ समाज और डिजिटल मंच पर किनारे पड़ा विवेक) डॉ. सत्यवान सौरभ नई दिल्ली। (आवाज न्यूज ब्यूरो)। डिजिटल दुनिया कभी ज्ञान, संवाद और रचनात्मकता की प्रयोगशाला मानी जाती थी। यह विश्वास था कि इंटरनेट लोकतंत्र को मज़बूत करेगा, हाशिये पर खड़े लोगों…

