पांचाल शोध एवं विकास समिति की संगोष्ठी में जीवंत हुआ इतिहास

फर्रुखाबाद।(आवाज न्यूज ब्यूरो)।  पाञ्चाल शोध एवं विकास समिति के तत्वावधान में फर्रूखाबाद जनपद के स्थापना दिवस पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुरेन्द्र सिंह सोमवंशी ने की। उन्होंने बताया कि फर्रुखाबाद अत्यंत प्राचीन जनपद है। 1714 में बंगश ने तो 52 गाँवो को जोड़कर फर्रूखाबाद नाम दिया था प्राचीन काम्पिल्य,संकिसा जैसे…

श्री रामलीला के मंच पर साहित्यिक पहल का स्वागत : भव्य कवि सम्मेलन

‘‘कवियों को प्रश्रय देकर महात्मा तुलसीदास की परंपरा को संरक्षण देने की जरूरतः डा.शिव ओम अंबर‘‘फर्रुखाबाद।(आवाज न्यूज ब्यूरो)।  ऐतिहासिक श्री रामलीला मंडल एवं प्रमुख साहित्यिक संस्था अभिव्यंजना के संयुक्त तत्वावधान में सरस्वती भवन के विशाल प्रांगण में श्री राम काव्योत्सव का भव्य आयोजन राष्ट्रीय स्तर के कवि डॉक्टर शिव ओम अंबर की अध्यक्षता में हुआ।…

न्याय के बिना प्रतिष्ठा संभव नहीं, मौन अब अपराध है

“साहित्य अकादमी का कलंक” साहित्य अकादमी पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोप केवल एक व्यक्ति की विफलता नहीं, बल्कि पूरे साहित्यिक समाज की परीक्षा हैं। अदालत ने माना है कि पद का दुरुपयोग हुआ और शिकायतकर्ता को दबाने की कोशिश की गई। फिर भी आरोपी सचिव पद पर बने हुए हैं। यह चुप्पी अस्वीकार्य है।…

कन्नौज: हिंदी दिवस के अवसर पर सांस्कृतिक आयोजन एवं सुलेख प्रतियोगिता

बृजेश चतुर्वेदी कन्नौज।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। हिंदी भाषा की महत्ता और गौरव को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आज जनपद कन्नौज के सभी कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों सहित राधा देवी आदर्श संस्कृत उत्तर माध्यमिक विद्यालय, गुरसहायगंज तथा सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, तिर्वा आदि विद्यालयों में हिंदी दिवस बड़े उत्साह और हर्षोल्लास के साथ…

यश भारती डॉ० रामकृष्ण राजपूत एंव डा. रत्ना सिंह अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन में सम्मानित

फर्रुखाबाद। (आवाज न्यूज ब्यूरो) संयुक्त राष्ट्र संघ सहित विश्व स्तर परं हिन्दी के सम्बर्धन, संरक्षण और प्रचार-प्रसार में वृद्धि के उद्देश्य को लेकर आयोजित किये जाने वाले अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन के 25वें मलेशिया-बाली-इण्डोनेशिया में आयोजित होने वाले रजत पर्व के पाँच सत्रों में मुख्य अतिथि गांधीवादी विचारक पद्मश्री अगुश इन्द्र उदयन तथा बाली के विधायक और…

अख़बारों में साहित्य की हत्या और शब्दकर्मियों की बेइज़्ज़ती

आज के अधिकांश अख़बारों से साहित्यिक पन्ने या तो पूरी तरह गायब हो चुके हैं या केवल खानापूरी तक सीमित हैं। लेखकों को छापकर उन्हें ‘कृपा’ का अनुभव कराया जाता है, परंतु सम्मानजनक मानदेय नहीं दिया जाता। अब कुछ मालिकान पुरस्कार योजनाएं बनाकर लेखक-सम्मान का दिखावा कर रहे हैं, जबकि बुनियादी ज़रूरत है — श्रम…

प्रजापति समाज के अनमोल रत्न: डॉ. सत्यवान सौरभ और प्रियंका सौरभ

(दक्ष प्रजापति जयंती विशेष)  “प्रेरणा के प्रतीक: प्रजापति समाज के साहित्यिक रत्न” नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। डॉ. सत्यवान सौरभ और प्रियंका सौरभ, प्रजापति समाज के ऐसे साहित्यिक रत्न हैं जिन्होंने लेखनी के माध्यम से समाज, संवेदना और चेतना को नई दिशा दी है। गाँव की मिट्टी से निकली उनकी रचनाएं आज राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हैं।…

सावन मनभावन : भीगते मौसम में साहित्य और संवेदना की हरियाली

सावन केवल एक ऋतु नहीं, बल्कि भारतीय जीवन, साहित्य और संस्कृति में एक गहरी आत्मिक अनुभूति है। यह मौसम न केवल धरती को हरा करता है, बल्कि मन को भी तर करता है। लोकगीतों, झूले, तीज और कविता के माध्यम से सावन स्त्रियों की अभिव्यक्ति, प्रेम की प्रतीक्षा और विरह की पीड़ा का स्वर बन…

नई लेखिका आई है — और मंडी के गिद्ध जाग उठे हैं

(साहित्य का मंच या शिकार की मंडी?)  नई लेखिकाओं के उभार के साथ-साथ जिस तरह साहित्यिक मंडियों में उनकी रचनात्मकता की बजाय उनकी देह, उम्र और मुस्कान का सौदा होता है — यह एक गहरी और शर्मनाक सच्चाई है। मंच, आलोचना, भूमिका, सम्मान – सब कुछ एक जाल बन जाता है। यह संपादकीय स्त्री लेखन…

संपादकीय रिक्त है — क्योंकि लोकतंत्र अभी मौन है।

“जब कलम चुप हो जाए: लोकतंत्र का शोकगीत” आपातकाल के दौरान अख़बारों ने विरोध में अपना संपादकीय कॉलम ख़ाली छोड़ा था। आज औपचारिक सेंसरशिप नहीं है, लेकिन आत्म-सेन्सरशिप, भय और ‘राष्ट्रभक्ति’ के नाम पर विचारों का गला घोंटा जा रहा है। सवाल पूछना देशद्रोह बन गया है, और संपादकीय अब सत्ता के प्रवक्ता हो गए…