यश भारती डॉ० रामकृष्ण राजपूत एंव डा. रत्ना सिंह अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन में सम्मानित

फर्रुखाबाद। (आवाज न्यूज ब्यूरो) संयुक्त राष्ट्र संघ सहित विश्व स्तर परं हिन्दी के सम्बर्धन, संरक्षण और प्रचार-प्रसार में वृद्धि के उद्देश्य को लेकर आयोजित किये जाने वाले अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन के 25वें मलेशिया-बाली-इण्डोनेशिया में आयोजित होने वाले रजत पर्व के पाँच सत्रों में मुख्य अतिथि गांधीवादी विचारक पद्मश्री अगुश इन्द्र उदयन तथा बाली के विधायक और मंत्रि मण्डल के सदस्य डॉ० सोमवीर द्वारा यश भारती डॉ० रामकृष्ण राजपूत को राष्ट्रपति सुकर्णो सम्मान तथा भारत के वरिष्ठ उपन्यासकार डॉ० शरद पगारे सम्मान से समादृत किया गया।
फर्रुखाबाद की प्रतिनिधि डॉ० रत्ना सिंह को वीरमती माहेश्वरी सम्मान तथा डॉ० शरद पगारे सम्मान प्रदान किया गया। अध्यक्ष मण्डल की ओर से अपने वक्तव्य में डॉ० राजपूत ने सम्मेलन के केन्द्रीय विषय ’रचना के केन्द्र मेंः विचारधारा या कला’ पर बोलते हुये प्रगतिशील, सकारात्मक, विकासशील, शोषित पीड़ित मानवता की पक्षधर विचारधारा के समर्थन में अपनी अभिव्यक्त करते हुये बुद्ध, मार्क्स और अम्बेदकर की राह पर चलना श्रेयस्कर बताया, तमाम विद्वानों की हिन्दी पुस्तकों के अतिरिक्त अन्य भाषा की किताबों का विमोचन करते हुये मंचस्थ विद्वानों में डॉ० राजपूत ने अपनी अभिव्यक्ति की, “तमाम हिन्दी तथा अन्य भाषा भाषी विद्वानों ने लोककला, संस्कृति तथा सभ्यता निकट लाकर सम्पूर्ण देशों को ग्लोबल मानते हुये अन्तर्राष्ट्रीय मंच के रूप में प्रयोग करके विकसित होने पर बल दिया। समृद्ध भाषाओं में हिन्दी भी समर्थ है, जिसके विकास के लिये अन्य देशों की एकाध भाषा का भी अध्ययन आवश्यक है। भारतीय संस्कृति, दर्शन, इतिहास, पुरातत्व और लोककलाओं की जड़ें राष्ट्रीय ही नहीं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के योगदान वाली है। डॉ० सोमवीर ने भाषण के प्रारम्भ में ओम स्वस्ति अस्ति कहा कि इण्डोनेशियन शब्दकोष में लगभग 2000 शब्द संस्कृत के हैं। वहां से वापस लौटने के बाद डा.राजपूत ने इंडोनेशिया यात्रा के अनुभव साझा किये।