‘‘ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स पर गंभीर आरोप‘‘
लखनऊ।(आवाज न्यूज ब्यूरो) यूजीसी विवाद को लेकर अपने पद से इस्तीफा देकर चर्चा में आए पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने अब एससी/एसटी एक्ट को लेकर खुला विरोध शुरू कर दिया है। अपने गृह जनपद कानपुर पहुंचे अलंकार ने मीडिया से बातचीत में इस कानून को “काला कानून” करार देते हुए इसे समाप्त करने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि इस कानून के तहत दर्ज होने वाली 95 प्रतिशत से अधिक शिकायतें फर्जी होती हैं।
अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि अब वह प्रशासनिक सिस्टम का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए बिना किसी दबाव के अपनी बात रख रहे हैं। उनके अनुसार, एससी/एसटी एक्ट के कारण सामान्य वर्ग, ओबीसी और अन्य समुदायों के लोग भय और मानसिक तनाव में जीवन जी रहे हैं, लेकिन जनप्रतिनिधि खुलकर बोलने से बच रहे हैं। अलंकार ने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर इसलिए चुप हैं क्योंकि उन्हें जांच एजेंसियों का डर है। उन्होंने कहा कि सांसद और विधायक आशंकित रहते हैं कि आवाज उठाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है, इसी कारण संसद और सड़कों पर अपेक्षित विरोध नहीं दिखता।
अपने बयान में अलंकार अग्निहोत्री ने प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय जांच ब्यूरो और इनकम टैक्स विभाग का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि इन एजेंसियों का इस्तेमाल डर और दबाव का माहौल बनाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन एजेंसियों के जरिए जनप्रतिनिधियों पर “कैप” लगा दी गई है।
अलंकार अग्निहोत्री ने साफ कहा कि अगर सरकार ने एक तय समय सीमा के भीतर संसद का विशेष सत्र बुलाकर एससी/एसटी एक्ट को खत्म करने की पहल नहीं की, तो देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। आंदोलन से पहले सरकार को सात दिन का समय दिया जाएगा। उनका दावा है कि देशभर के करीब डेढ़ से दो हजार संगठन पहले से उनके संपर्क में हैं। उन्होंने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भी बड़ा बयान दिया। अलंकार का कहना है कि मौजूदा हालात में यदि चुनाव कराए जाएं तो केंद्र की मौजूदा सरकार को दहाई में भी सीटें मिलना मुश्किल होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सामान्य वर्ग और ओबीसी समाज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। जब उनसे राजनीतिक पार्टी बनाने के सवाल पर पूछा गया तो अलंकार अग्निहोत्री ने साफ कहा कि फिलहाल उनका फोकस किसी पार्टी पर नहीं, बल्कि केवल मुद्दे पर है। उन्होंने कहा कि उनका एकमात्र एजेंडा एससी/एसटी एक्ट को खत्म कराना है और यदि लोकतांत्रिक तरीके से मांग मान ली जाती है तो आंदोलन की जरूरत नहीं पड़ेगी। अपने बयान के अंत में अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि उन्हें किसी तरह का डर नहीं है। उन्होंने ऐतिहासिक आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि जरूरत पड़ी तो दांडी मार्च जैसे आंदोलनों से भी पीछे नहीं हटेंगे। उनके अनुसार, यह लड़ाई सिर्फ एक कानून की नहीं, बल्कि व्यवस्था और लोकतांत्रिक अधिकारों की है।
अब एससी/एसटी एक्ट के विरोध में उतरे अलंकार अग्निहोत्री : चलाएंगे देशव्यापी आन्दोलन

