नई दिल्ली।(आवाज न्यूज ब्यूरो)। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर करारा प्रहार किया है। कांग्रेस की रास सांसद ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि संसद के विशेष सत्र में असली मुद्दा महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन है। उन्होंने चेतावनी दी कि जिस तरह का परिसीमन प्रस्ताव सामने आ रहा है, वह बहुत खतरनाक है और यह संविधान पर हमला जैसा हो सकता है।
उन्होंने एक अखबार में लिखे अपने लेख में कहा कि सरकार जिस तेजी से बिल लाना चाहती है, उसके पीछे राजनीतिक फायदा उठाने की मंशा हो सकती है। उनका कहना है कि संसद का यह विशेष सत्र ऐसे समय बुलाया गया है जब नरेंद्र मोदी विपक्ष से समर्थन मांग रहे हैं, लेकिन असली जानकारी साझा नहीं की जा रही। सोनिया गांधी ने साफ कहा कि महिला आरक्षण कानून पहले ही पास हो चुका है, इसलिए यह मुद्दा अब विवाद का विषय नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि 23 में संसद ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पास किया था, जिसमें महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है। लेकिन इस कानून को लागू करने के लिए जनगणना और उसके बाद परिसीमन जरूरी बताया गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार अब 29 से महिला आरक्षण लागू करना चाहती है, तो यह फैसला पहले क्यों नहीं लिया गया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष ने कई बार सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की, लेकिन सरकार ने इसे नजरअंदाज कर दिया।
राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखकर होना चाहिए परिसीमन
उन्होंने कहा कि अगर लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाई जाती है, तो यह केवल गणित के आधार पर नहीं बल्कि राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखकर होना चाहिए। उनका तर्क है कि जो राज्य जनसंख्या नियंत्रण में आगे रहे हैं, उन्हें नुकसान नहीं होना चाहिए, वरना उनकी राजनीतिक ताकत कम हो सकती है।इसके अलावा उन्होंने सरकार पर जातिगत जनगणना को लेकर भी निशाना साधा। उनका आरोप है कि सरकार जानबूझकर इसे टाल रही है। उन्होंने कहा कि बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों ने कम समय में जातिगत सर्वे कर दिखाया है, इसलिए देरी का बहाना सही नहीं है।
परिसीमन ही असली चिंता का विषय
उन्होंने यह भी कहा कि 21 में होने वाली जनगणना को सरकार ने टाल दिया, जिससे करोड़ों लोगों को सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाया। अब सरकार 27 में डिजिटल जनगणना की बात कर रही है, लेकिन इसके बावजूद इतनी जल्दबाजी में परिसीमन लाने का कोई ठोस कारण नहीं है। आखिरी में सोनिया गांधी ने कहा कि सरकार को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने के बजाय विपक्ष के साथ चर्चा करनी चाहिए।
