मंत्री की मौजूदगी में युवक ने गंगा में लगाई छलांग

जमीन विवाद में सुनवाई न होने से आहत था, कहा- लेखपाल-कानूनगो मिले हुए हैं

बृजेश चतुर्वेदी

कन्नौज। (आवाज न्यूज़ ब्यूरो)। गुरुवार शाम 7 बजे समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण की मौजूदगी में युवक ने गंगा में छलांग लगा दी। घटनास्थल से 50 मीटर दूर मेहंदी घाट पर मंत्री असीम अरुण भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। युवक के कूदने पर मौके पर मौजूद लोगों ने उसे बचा लिया और नदी से बाहर निकाल लाए।

युवक का आरोप है कि उसकी जमीन पर दबंग लोगों ने कब्जा कर लिया है। जिसकी शिकायत पर न अधिकारियों ने कार्रवाई की, न ही मंत्री असीम अरुण ने कोई ध्यान दिया। आरोप है आरोपियों से लेखपाल और कानूनगो भी मिले हुए हैं। इससे आहत होकर उसने सुसाइड की कोशिश की। मामला सदर कोतवाली क्षेत्र का है।

चौराचांदपुर गांव के रहने वाले मेवाराम की जमीन पर गांव के ही कुछ लोग जबरदस्ती कब्जा कर रहे हैं। अपनी जमीन को बचाने के लिए मेवाराम 2 महीनों से तहसील में अधिकारियों के यहां चक्कर लगा रहा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।

आरोप है जमीन कब्जाने का प्रयास कर रहे लोग उसे मारने की धमकी भी दे रहे। न्याय न मिलने पर उसे गुरुवार शाम मेहंदी घाट पर समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण के आने की सूचना मिली। ऐसे में वह एप्लिकेशन लेकर परिजनों के साथ वहां पहुंच गया।

शाम 7 बजे उसने मंत्री असीम अरुण को प्रार्थना पत्र सौंपा। जिसे उन्होंने अपने पास रख लिया। ऐसे में युवक उनसे बात करने का प्रयास करने लगा लेकिन मंत्री 50 मीटर दूर गंगा घाट के निर्माण और सौंदर्याकरण के भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल होने चले गए। कार्यक्रम करीब घाट से 15 फीट ऊंचे गंगा मन्दिर में चल रहा था।

मंत्री द्वारा शिकायती पत्र को गम्भीरता से न लेने का आरोप लगाते हुए युवक ने सुसाइड करने के लिए गंगा में छलांग लगा दी। ये नजारा देखकर वहां मौजूद दो गोताखोर भी गंगा में कूद गए और सकुशल बाहर निकाल लाए। युवक के सुसाइड का प्रयास करने के कारण वहां हड़कंप मच गया।

मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने युवक से पूछताछ की। जिसमें उसने जमीन पर कब्जे के प्रयास करने वाले दबंगो के खिलाफ शिकायत पर कार्यवाही न होने के आरोप लगाए। युवक मेवाराम ने बताया कि उसे दबंगों से लगातार मारने की धमकी मिल रही है।

उनके हाथों मरने से बेहतर है कि नेताओं के सामने मर जाओ। मेवाराम ने बताया- जमीन पर कब्जा करवाने के मामले में लेखपाल और कानून-गो की भूमिका संदिग्ध है। इसकी भी जांच होनी चाहिए।