सड़क पर नहाने-धोने और खुले नल से पानी बहाने पर कार्रवाई; डेयरी संचालकों को भी नोटिस
बृजेश चतुर्वेदी
गुरसहायगंज।(आवाज न्यूज़ ब्यूरो)। नगर में पेयजल के समुचित एवं मितव्ययी उपयोग के प्रति नागरिकों को संवेदनशील बनाने तथा सार्वजनिक पेयजल की बर्बादी रोकने के उद्देश्य से नगर पालिका परिषद गुरसहायगंज द्वारा 24 अगस्त 2026 से प्रातःकालीन आकस्मिक निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान पेयजल के दुरुपयोग एवं अनावश्यक अपव्यय के कई मामले सामने आने पर पालिका प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाया है।
प्रातःकालीन निरीक्षण के दौरान यह स्थिति सामने आई कि अनेक घरों में पेयजल पाइप की फिटिंग भवन के अंदर न होकर सड़क की ओर की गई है। इन स्थानों पर सड़क पर ही नहाने, कपड़े एवं बर्तन धोने तथा पानी भरने जैसी गतिविधियां की जा रही हैं। इससे न केवल बड़ी मात्रा में पेयजल व्यर्थ बह रहा है, बल्कि सार्वजनिक मार्गों पर गंदा पानी फैलने से स्वच्छता एवं जल निकासी की समस्या भी उत्पन्न हो रही है।
“टोटी लगा देंगे तो पानी आने का पता कैसे चलेगा” निरीक्षण में मिला चौंकाने वाला जवाब
निरीक्षण के दौरान एक और गंभीर प्रवृत्ति सामने आई। कई पेयजल संयोजनों में टोटी ही नहीं लगाई गई थी। पूछताछ में अधिकांश उपभोक्ताओं द्वारा बताया गया कि टोटी लगा देने पर यह पता नहीं चल पाएगा कि पानी कब आया और कब चला गया। इसलिए पानी की धार सड़क पर गिरती रहे तो दूर से ही पानी आने की जानकारी हो जाती है।
नगर पालिका प्रशासन ने इस तर्क को पेयजल संरक्षण के प्रति गंभीर असंवेदनशीलता का परिचायक माना है। पालिका का स्पष्ट संदेश है कि पेयजल की उपलब्धता का पता लगाने के लिए उसे सड़क पर बहाना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।
135 लीटर प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन का लक्ष्य
शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुसार नागरिकों को प्रतिदिन 135 लीटर प्रति व्यक्ति पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है। सामान्यतः पांच सदस्यों वाले परिवार के लिए यह लगभग 675 लीटर प्रतिदिन की मात्रा बैठती है। ऐसे में घरेलू उपयोग से कहीं अधिक मात्रा में पानी को सड़क पर बहा देना जल संसाधनों के प्रति गंभीर लापरवाही है।
नगर पालिका प्रशासन का कहना है कि जल उपलब्धता सुनिश्चित करना केवल पालिका की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि उपलब्ध जल का सदुपयोग और संरक्षण प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। भारत के अनेक क्षेत्रों में जल संकट की स्थिति को देखते हुए वर्तमान समय में पानी की एक-एक बूंद का संरक्षण आवश्यक है।
भैंसों को नहलाने और गोबर बहाने में हो रहा पेयजल का इस्तेमाल
निरीक्षण के दौरान नगर क्षेत्र में कुछ स्थानों पर आवासीय पेयजल संयोजन का व्यावसायिक गतिविधि के लिए उपयोग किए जाने की स्थिति भी सामने आई। कुछ लोगों द्वारा भवन के अंदर डेयरी संचालित की जा रही है तथा पालिका की पेयजल आपूर्ति का इस्तेमाल भैंसों को नहलाने और डेयरी परिसर में गोबर की सफाई करने में किया जा रहा है।
गोबरयुक्त पानी नालियों में प्रवाहित किए जाने से एक ओर पेयजल का अत्यधिक अपव्यय हो रहा है, वहीं दूसरी ओर नगर की जल निकासी व्यवस्था प्रभावित हो रही है। गोबर एवं ठोस अपशिष्ट नालियों में जमा होने से जल प्रवाह बाधित होने, दुर्गंध फैलने तथा मच्छरों के प्रजनन की परिस्थितियां उत्पन्न होने की आशंका रहती है।
ऐसे मामलों में नगर पालिका द्वारा संबंधित डेयरी संचालकों को डेयरी बंद कर नगर क्षेत्र से बाहर स्थापित करने के संबंध में नोटिस जारी किए गए हैं।
पेयजल के दुरुपयोग पर 20 कनेक्शन काटे गए
नगर पालिका परिषद ने पेयजल के दुरुपयोग के मामलों में कार्रवाई करते हुए अब तक लगभग 20 जल संयोजन विच्छेदित किए हैं। पालिका प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई केवल दंडात्मक उद्देश्य से नहीं, बल्कि नागरिकों को पेयजल के विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति जागरूक और संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से की जा रही है।
जिन कनेक्शनधारकों के कनेक्शन दुरुपयोग के कारण विच्छेदित किए गए हैं, उनके द्वारा पुनः जल संयोजन बहाल कराने का अनुरोध किए जाने पर नियमों के अधीन शपथ-पत्र लिया जाएगा। इसमें उपभोक्ता को भविष्य में पेयजल का दुरुपयोग न करने तथा कनेक्शन की फिटिंग निर्धारित व्यवस्था के अनुसार भवन के अंदर कराने की घोषणा करनी होगी।
पुनः दुरुपयोग मिला तो ₹10 हजार की कार्रवाई
नगर पालिका ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि पुनर्स्थापित किए गए कनेक्शन पर यदि भविष्य में संबंधित उपभोक्ता को दोबारा पेयजल का दुरुपयोग अथवा अपव्यय करते हुए पाया जाता है, तो लागू नियमों एवं पालिका के सक्षम आदेश के अनुसार ₹10,000 तक की निर्धारित दण्डात्मक देयता जल मूल्य में जोड़कर वसूल किए जाने तथा पेयजल संयोजन पुनः विच्छेदित किए जाने की कार्रवाई की जाएगी।
पालिका प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि पुनः संयोजन के बाद जल के दुरुपयोग की पुनरावृत्ति होने पर भविष्य में नए जल संयोजन के संबंध में भी प्रचलित नियमों एवं सक्षम प्राधिकारी के आदेश के अनुसार कठोर निर्णय लिया जाएगा।
नगर पालिका की नागरिकों से अपील
नगर पालिका परिषद गुरसहायगंज ने नागरिकों से अपील की है कि पेयजल की टोटी अनावश्यक रूप से खुली न छोड़ें। पानी की फिटिंग एवं टोटी भवन के अंदर व्यवस्थित कराएं। सड़क पर नहाने, कपड़े-बर्तन धोने अथवा अन्य कार्यों में पेयजल का उपयोग न करें। पेयजल का उपयोग पशुओं को नहलाने अथवा डेयरी परिसर धोने के लिए न करें।
गोबर अथवा गोबरयुक्त पानी को सार्वजनिक नालियों में प्रवाहित न करें। किसी भी प्रकार की लीकेज अथवा अनावश्यक जल बहाव की सूचना तत्काल पालिका को दें।
नगर पालिका प्रशासन ने कहा कि “पानी केवल सुविधा नहीं, सार्वजनिक संसाधन है।” प्रत्येक नागरिक यदि उपलब्ध पेयजल का विवेकपूर्ण उपयोग करे तो नगर की पेयजल व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और भविष्य की जल समस्या से बचने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।
नगर पालिका का स्पष्ट संदेश है “पानी बहाना नहीं, पानी बचाना है; पेयजल का दुरुपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।”
निरीक्षण के दौरान अधिशासी अधिकारी के साथ सभासद सुरेन्द्र कुमार , लेखा सहायक आकाश कुमार, जलकल पटल सहायक जनार्दन मिश्रा, पथ प्रकाश पटल सहायक राजेश कुमार, निर्माण सहायक शैलेंद्र कुमार तथा प्रधानमंत्री आवास योजना प्रभारी प्रसन्नजीत मिश्रा, अतिक्रमण प्रभारी अशोक कुमार, सफाई प्रभारी शिवशंकर तिवारी तथा पालिका कर्मचारी दीनानाथ एवं अकील ख़ान उपस्थित रहे। सभी संबंधित कर्मचारियों द्वारा निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों को अपनी निर्देश पुस्तिका में अंकित किया गया तथा समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
