‘‘अज्ञात के खिलाफ़ मुक़दमा’’
नई दिल्ली।।(आवाज न्यूज ब्यूरो) कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से जुड़े हल्द्वानी शुद्धिकरण मामले में उत्तराखंड पुलिस ने आखिरकार चार हफ़्ते बाद अब एफआईआर दर्ज कर ली है। मुक़दमे में अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराएँ तो लगाई गई हैं, लेकिन इसमें किसी आरोपी का नाम नहीं है। यानी पुलिस ने यह एफ़आईआर अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की है। हालाँकि, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साफ़ तौर पर हवन करने वालों को देखा जा सकता है और उन लोगों के बयान भी आए थे। यह मामला करीब एक महीने से राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। तो एफ़आईआर दर्ज करने में एक महीने का समय क्यों लग गया? इसके लिए आरोप तो कई लग रहे हैं, लेकिन पुलिस का कहना है कि पूरे राज्य से इस मामले में क़रीब 80 शिकायतें और प्रार्थना पत्र मिले थे, इसलिए इनकी क़ानूनी पड़ताल की गई। 80 में से अकेले नैनीताल जिले से 19 शिकायतें प्राप्त हुई थीं। पुलिस का कहना है कि क़ानूनी समीक्षा के बाद हल्द्वानी कोतवाली में पहली औपचारिक शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया।
किसकी शिकायत पर दर्ज हुई एफआईआर?
यह एफआईआर हल्द्वानी की सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता अंजू की शिकायत पर दर्ज की गई है। पुलिस के अनुसार अंजू इस मामले में सबसे पहले लिखित शिकायत देने वाली व्यक्ति थीं। उन्होंने पुलिस को कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम से जुड़े वीडियो और अन्य सामग्री भी उपलब्ध कराई थी। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजूनाथ टीसी ने बताया कि पुलिस को अलग-अलग संगठनों, राजनीतिक दलों और सामाजिक संस्थाओं की ओर से बड़ी संख्या में शिकायतें मिली थीं। सभी शिकायतों की कानूनी जांच के बाद एफआईआर दर्ज करने का फैसला लिया गया।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा के अनुसार जाति के आधार पर अपमान या सार्वजनिक रूप से बेइज्जती करने का आरोप है। एससी-एसटी एक्ट के अलावा भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 यानी विभिन्न समुदायों के बीच दुश्मनी या वैमनस्य फैलाने और धारा 299 यानी जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। फिलहाल एफआईआर में किसी व्यक्ति का नाम शामिल नहीं किया गया है।
शुद्धिकरण का मामला क्या है?
8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक जनसभा को संबोधित किया था। इसके दो दिन बाद 10 अगस्त को श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास नामक संगठन ने उसी मैदान में सफाई अभियान चलाया और शुद्धि यज्ञ आयोजित किया। इस कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह कार्यक्रम इसलिए आयोजित किया गया क्योंकि मंच पर अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाले मल्लिकार्जुन खड़गे ने सभा को संबोधित किया था। कांग्रेस ने इसे दलित समुदाय का अपमान और छुआछूत की मानसिकता का उदाहरण बताया। दूसरी ओर, कार्यक्रम आयोजित करने वाले संगठन ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल मैदान की सफाई, धार्मिक परंपरा के अनुसार स्थल का शुद्धिकरण करना था। संगठन ने किसी भी राजनीतिक दल से संबंध होने से इनकार किया।
शिकायत में क्या कहा गया?
एफआईआर का आधार बनी शिकायत में कहा गया है कि मल्लिकार्जुन खड़गे अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं। ऐसे में उनकी सभा के बाद उसी स्थान पर शुद्धिकरण कराना प्रथम दृष्टया जातिगत भेदभाव, सामाजिक अपमान और अनुसूचित जाति के व्यक्ति के प्रति हीन भावना फैलाने का प्रयास लगता है। शिकायत में सोशल मीडिया पर वायरल एक अन्य वीडियो की जांच की भी मांग की गई है। आरोप है कि वीडियो में धार्मिक नारों को इस तरह पेश किया गया जिससे एक विशेष धार्मिक समुदाय के खिलाफ नफरत और तनाव पैदा हो सकता है।
खड़गे हल्द्वानी शुद्धिकरण: मामले में उत्तराखंड पुलिस ने दर्ज की एफआईआर
